सिर्फ चार घंटे में मिलेंगे पैन कार्ड, अभी लगते हैं 10 दिन

अभी पैन कार्ड बनवाने में 10 दिन लग जाते हैं। कई बार आपके घर तक इसकी डिलिवरी होने में 15 दिन भी लग सकते हैं। लेकिन बहुत जल्द यह काम सिर्फ चार घंटे में हो जाएगा। इनकम टैक्स विभाग आपको सिर्फ चार घंटे में ई-पैन जारी कर देगा और आपको 10 दिनों तक इंतजार नहीं करना होगा। 

Money Bhaskar

Dec 04,2018 06:11:00 PM IST

नई दिल्ली.

अभी पैन कार्ड बनवाने में 10 दिन लग जाते हैं। कई बार आपके घर तक इसकी डिलिवरी होने में 15 दिन भी लग सकते हैं। लेकिन बहुत जल्द यह काम सिर्फ चार घंटे में हो जाएगा। इनकम टैक्स विभाग आपको सिर्फ चार घंटे में ई-पैन जारी कर देगा और आपको 10 दिनों तक इंतजार नहीं करना होगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने नई दिल्ली के एक कार्यक्रम के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हम एक नई प्रणाली सामने ला रहे हैं। एक साल या कुछ समय बाद हम चार घंटे में पैन देना शुरू कर देंगे। आपको आधार पहचान देनी होगी और आपको चार घंटे में ही ई-पैन मिल जाएगा। चंद्रा ने कहा कि सीबीडीटी जल्दी ही चार घंटे के भीतर ई-पैन देने की शुरुआत करेगा।

आयकर रिटर्न में 50 फीसदी की बढ़ोतरी

चंद्रा ने बताया कि निर्धारण वर्ष 2018-19 में दायर होने वाले आयकर रिटर्न (आईटीआर) में पिछले साल की तुलना में अब तक 50 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। सीआईआई के एक कार्यक्रम से इतर यह जानकारी देते हुए चंद्रा ने कहा कि यह नोटबंदी का असर है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी देश में कर दायरा बढ़ाने के लिए काफी अच्छी रही है। इस साल हमें अब तक ही करीब 6.08 करोड़ आईटीआर मिल चुके हैं जो पिछले साल की इसी अवधि में मिले आईटीआर से 50 प्रतिशत अधिक हैं। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि राजस्व विभाग चालू वित्त वर्ष के दौरान 11.5 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष कर संग्रह का बजट लक्ष्य प्राप्त कर लेगा। चंद्रा ने कहा, ‘‘हमारे सकल प्रत्यक्ष कर में 16.5 प्रतिशत और शुद्ध प्रत्यक्ष कर में 14.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है। इससे पता चलता है कि नोटबंदी से कर दायरा बढ़ाने में वास्तव में मदद मिली है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अभी तक कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह बजट आकलन का 48 प्रतिशत है।’’ उन्होंने बताया कि सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान के तहत 70 देश भारत के साथ सूचनाएं साझा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण कॉर्पोरेट करदाताओं की संख्या पिछले साल के सात लाख की तुलना में बढ़ाकर आठ लाख हो चुकी है।

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