Home » Economy » Policyभारत में और ज्‍यादा बढ़ी आर्थिक असमानता -Income inequality in India has reached high levels

आधी आबादी जितने में करती है गुजारा, उतनी दौलत पर है अंबानी, टाटा जैसे अमीरों का कब्जा

आय की असमानता का स्‍तर ऐतिहासिक रूप से उच्‍च स्‍तर पर पहुंच गया है।

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नई दिल्‍ली. भारत में गरीब और अमीर के बीच की खाई और बढ़ गई है। आय की असमानता का स्‍तर ऐतिहासिक रूप से उच्‍च स्‍तर पर पहुंच गया है। देश के टॉप 0.1 फीसदी अमीरों की दौलत बढ़कर सबसे गरीब तबके के 50 फीसदी लोगों की कुल दौलत से भी ज्‍यादा हो गई है। यह बात वर्ल्‍ड इन‍इक्‍वलिटी लैब की वर्ल्‍ड इनइक्‍वलिटी रिपोट 2018 से सामने आई। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में आर्थिक असमानता बहुत ज्‍यादा है और यह 1980 के बाद से लगातार बढ़ी है। 

 

1947 के बाद कम था असमानता का स्‍तर 

रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ती आर्थिक असमानता का यह ट्रेंड 1947 में मिली आजादी के बाद के 30 सालों से विपरीत है। उस वक्‍त आय में असमानता में काफी गिरावट आई थी और सबसे गरीब स्‍तर वाले 50 फीसदी लोगों की आय बढ़ने की दर नेशनल एवरेज से ज्‍यादा थी। रिपोर्ट को रिपोर्ट को इकॉनमिस्ट फाकुंडो अल्वारेदो, लुकास चांसेल, थॉमस पिकेटी, इमेनुएल साएज और गैब्रिएल जुकमैन ने तैयार किया है।
यह पिछले 40 सालों में ग्‍लोबलाइजेशन के असमान प्रभावों को दर्शाती है। 

 

क्‍या है रिपोर्ट का उद्देश्‍य 

रिसर्च आय और संपत्ति में असमानता के एतिहासिक विकास के डेटाबेस पर आधारित है। इसका उद्देश्‍य ताजा और व्‍यापक आंकड़ों को सार्वजनिक विचार-विमर्श के लिए पेश कर आर्थिक असमानता पर ज्‍यादा जानकारी वाली ग्‍लोबल डेमोक्रेटिक डिबेट में योगदान देना है। 2014 की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत की नेशनल इनकम में टॉप 1 फीसदी कमाने वालों का योगदान 22 फीसदी था, जबकि टॉप 10 फीसदी का लगभग 56 फीसदी था। 

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