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सस्‍ते इंटरनेट और स्‍मार्टफोन्‍स के चलते छोटे शहरों में भी बढ़ा डिजिटल पेमेंट का चलन: राजीव कुमार

लेसकैश सोसायटी बनाने के सरकार के विजन में योगदान देने के लिए सभी कॉम्पिटीटर्स के पास पर्याप्‍त स्‍पेस

in small cities digital payment is gradually growing due to affordable internet and smartphones

नई दिल्ली. डिजिटल इकोनॉमी का लक्ष्‍य हासिल करने की राह में नोटबंदी एक बड़ा कदम साबित हई है। नोटबंदी के चलते लोगों के पेमेंट करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। वहीं, सस्ते इंटरनेट व स्मार्टफोन ने राह और आसान कर दी है। इसके चलते बड़े शहरों के बाद अब छोटे और मझोले शहरों में भी डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की ओर से भी पॉलिसी लेवल पर कई तरह की राहत दी गई हैं, जिससे लोग इसे आसानी से अपना ले रहे हैं। यह कहना है मास्‍टरकार्ड के साउथ एशिया में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (मार्केट डेवलपमेंट) राजीव कुमार का। कुमार से moneybhaskar.com ने डिजिटल पेमेंट, प्‍लास्टिक कार्ड, मार्केट कॉम्पिटीटर्स, डाटा सेफ्टी आदि को लेकर विस्‍तार से बात की, पेश हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:  

 

- नोटबंदी के चलते भारत में पेमेंट र्इकोसिस्‍टम में बदलाव आया है। आपके नजरिए से डिजिटल पेमेंट को अपनाने में कैसी ग्रोथ हुई है, विशेषकर छोटे शहरों में?

डिजिटल इकोनॉमी की ओर भारत के सफर में नोटबंदी एक महत्‍वपूर्ण कदम था। नोटबंदी के दौरान लोगों ने अपने रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों में भी डिजिटल पेमेंट को अपनाना सीखा। नोटबंदी के चलते लोगों के पेमेंट करने के तरीके में उल्‍लेखनीय बदलाव आया और यह आज भी जारी है। हमें विश्‍वास है कि डिजिटाइजेशन की अगली लहर टीयर 2 और टीयर 3 मार्केट के जरिए आएगी क्‍योंकि सस्‍ते इंटरनेट और स्‍मार्टफोन्‍स के चलते वहां डिजिटल पेमेंट को अपनाया जाना धीरे-धीरे बढ़ रहा है। इसके अलावा नोटबंदी के बाद से देश में प्‍वॉइंट ऑफ सेल (POS) टर्मिनल्‍स की संख्‍या दोगुनी होकर लगभग 30 लाख पर पहुंच चुकी है। GST लागू होने से भी मर्चेंट्स में डिजिटल पेमेंट की स्‍वीकार्यता बढ़ी है। 

 

सरकार की ओर से भी डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी के मोर्चे पर उचित सहयोग मिला है। सरकार ने डिजिटल पेमेंट्स पर सरचार्ज हटाया, छोटे ट्रान्‍जैक्‍शंस के लिए मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट (MDR) पर सब्सिडी शुरू की और इस साल की शुरुआत में डेबिट कार्ड्स पर जीरो MDR लागू किया। इससे भारत ऐसे कदम उठाने वाला दुनिया का अकेला देश बन गया। हम भारत QR के लिए भी ऐसे ही सहयोग की उम्‍मीद करते हैं। भारत QR दुनिया का पहला इंटरऑपरेबल, EMV सर्टिफाइड QR पेमेंट सॉल्‍युशन है। ये सारे बदलाव मिलकर वित्‍त वर्ष 2019 में डिजिटल पेमेंट को बढ़ाकर 3000 करोड़ पहुंचाने के सरकार के लक्ष्‍य को पूरा करने में योगदान देंगे।


- रूपे कार्ड, मास्‍टरकार्ड के लिए एक बड़ा खतरा बनने जा रहा है। इसे कैसे देखते हैं?

अभी देश में 90 फीसदी से ज्‍यादा रिटेल ट्रान्‍जैक्‍शंस कैश में होते हैं। इसलिए डिजिटल ट्रान्‍जैक्‍शंस में आगे बढ़ने और लेसकैश सोसायटी बनाने के सरकार के विजन में योगदान देने के लिए सभी कॉम्पिटीटर्स के पास पर्याप्‍त स्‍पेस है।  

 

- प्‍लास्टिक कार्ड का भविष्‍य क्‍या है? क्‍या आपको लगता है कि भविष्‍य में इंडस्‍ट्री कार्ड लेस पेमेंट सिस्‍टम की ओर शिफ्ट होगी?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुताबिक, जनवरी 2018 में डेबिट कार्ड्स की संख्‍या बढ़कर 84.67 करोड़ हो गई, जबकि ऑपरेशनल क्रेडिट कार्ड्स की संख्‍या 3.62 करोड़ थी। जनवरी 2017 से जनवरी 2018 के बीच क्रेडिट कार्ड्स की संख्‍या में लगभग 73.9 लाख और डेबिट कार्ड्स की संख्‍या में 2.87 करोड़ का इजाफा हुआ। यह डाटा दर्शाता है कि पेमेंट इकोसिस्‍टम में कार्ड्स जरूरी हैं। कॉन्‍टैक्‍टलेस पेमेंट सॉल्‍युशंस में इनोवेशन से वर्चुअल कार्ड्स की स्‍वीकार्यता को भी बढ़ावा मिलेगा। इसलिए कह सकते हैं कि कार्ड्स रहेंगे।      

 

- लोगों को डिजिटल पेमेंट को अपनाने से रोकने वाली प्रमुख चिंताएं क्‍या हैं? आप उन्‍हें कैसे दूर करने की सोच रहे हैं?

नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रान्‍जैक्‍शन में हुई तेज प्रगति के बावजूद भारत अभी भी इस मोर्चे पर शुरुआती स्‍तर पर है। डिजिटल ट्रान्‍जैक्‍शन के सुरक्षित होने की चिंता और जागरुकता की कमी प्रमुख अवरोध हैं। मर्चेंट्स द्वारा इसे अपनाया जाना एक और महत्‍वपूर्ण मुद्दा है। हमारी रिसर्च दर्शाती है कि लगभग 60 फीसदी छोटे कारोबारी डिजिटल पेमेंट के फायदों के बारे में नहीं जानते। इसलिए सरकार, बिजनेस और इंडस्‍ट्री बॉडीज को मिलकर आवश्‍यक जागरुकता फैलाने और इनोवेटिव सॉल्‍युशंस विकसित करने की जरूरत है। ताकि लोगों के लिए डिजिटल पेमेंट करना और उन्‍हें प्राप्‍त करना आसान व सुगम बन सके। 

 

मास्‍टरकार्ड का 'कैश के आगे की दुनिया' का विजन सरकार के डिजिटल इंडिया विजन के साथ है। 2019 में डिजिटल ट्रान्‍जैक्‍शंस को 3000 करोड़ पर ले जाने के लक्ष्य को सहयोग देने के लिए हमने सरकार, बैंकों और व्‍यापारिक बैंकों के साथ साझेदारी की है। मास्‍टरकार्ड के लिए सुरक्षा हमेशा से प्रमुख मुद्दा रही है। हमने प्रोडक्‍ट डिजाइन को सुदृढ़ बनाने और मल्‍टीपल सिक्‍योरिटी लेयर्स लागू करने के लिए पिछले 3 सालों में ग्‍लोबली 100 करोड़ डॉलर (लगभग 6798 करोड़ रुपए) इन्‍वेस्‍ट किए हैं। ताकि आज की जरूरतों को पूरा किया जा सके और भविष्‍य के खतरों को दूर किया जा सके। हमने कंज्‍यूमर के पेमेंट व्‍यवहार में बदलाव लाने के लिए कई प्रोग्राम्‍स को लॉन्‍च और सपोर्ट किया है। 


- हर दिन नए कॉम्पिटीटर्स के मार्केट में आने से पेमेंट इंडस्‍ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है। क्‍या इससे भारत में मास्‍टरकार्ड के बिजनेस में गिरावट आई है?

मास्‍टरकार्ड भारत में लंबे अर्से से मौजूद है। हमारा मानना है कि नए कॉम्पिटीटर्स के आने से केवल लेसकैश सोसायटी की ओर भारत के सफर में तेजी आएगी। हम कैश को अपने सबसे बड़े कॉम्पिटीटर के तौर पर देखते हैं और हमें लगता है कि हम काफी हद तक इसे पीछे छोड़ चुके हैं। इस बात का अहसास करना जरूरी है कि भारत डिजिटल इकोनॉमी बनने की ओर अग्रसर है और मास्‍टरकार्ड इस सपने को पूरा करने के लिए अपनी पूरी क्षमता का इस्‍तेमाल करेगी। 


- RBI ने सभी पेमेंट ऑपरेटर्स को डाटा भारत में ही स्‍टोर करने का निर्देश दिया है। इस नियम को लेकर आपका क्‍या कहना है? देश में डाटा सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए मास्‍टरकार्ड ने क्‍या कदम उठाए हैं?

जब भी हम नए प्रोडक्‍ट और सर्विस विकसित करते हैं तो सबसे पहले सुरक्षा के बारे में ही सोचते हैं। हम साइबर सिक्‍योरिटी को लेकर भारत की चिंता को समझते हैं। मास्‍टरकार्ड का नेटवर्क इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर इन्‍सान, हर बिजनेस, हर पेमेंट और हर डिवाइस सुरक्षित है। हम कंज्‍यूमर और मर्चेंट दोनों के लिए पेमेंट्स सरल, तेज और सु‍रक्षित बनाने के लिए हमारी डिजिटल टेक्‍नोलॉजी और सिक्‍योरिटी प्रोटोकॉल्‍स का इस्‍तेमाल करते हैं। 

 

हमारे 6798 करोड़ रुपए के ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टमेंट में से एक बड़ा हिस्‍सा इंडियन डेवलपमेंट सेंटर्स में इन्‍वेस्‍ट किया गया है। ताकि प्रोडक्‍ट डिजाइन और सिक्‍योरिटी की मल्‍टीपल लेयर्स को सुदृढ़ बनाया जा सके। यह समझना जरूरी है कि ट्रान्‍जैक्‍शन प्रोसेस में मास्‍टरकार्ड के पास बहुत ही कम इनफॉरमेशन आती है। इनमें कार्ड नंबर, मर्चेंट का नाम और लोकेशन, तारीख और ट्रान्‍जैक्‍शन का अमाउंट शामिल है। हम नहीं जानते कि कार्ड किसका है और वह क्‍या खरीद रहा है। ये इनफॉरमेशन बैंकों के पास रहती है। 

 

हम पेमेंट और डाटा प्रैक्टिसेज को लेकर पूरी दुनिया में सरकारों, रेगुलेटर्स और पॉलिसी मेकर्स के साथ बातचीत कर रहे हैं। इसी के हिस्‍से के तौर पर हम RBI से भी उसके निर्देश को विस्‍तृत तौर पर जानने के लिए चर्चा करेंगे। लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं है कि हम भारत और इसकी लगातार सफलता के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 

- भारत में मास्‍टकार्ड के ग्रोथ अवसरों के बारे में आपका क्‍या कहना है?

आज की बात करें तो हमारी ग्‍लोबल वर्कफोर्स का 14-15 फीसदी हिस्‍सा भारत में है, जो मास्‍टरकार्ड के लिए एक मार्केट के तौर पर भारत के महत्‍व को स्‍पष्‍ट तौर पर दर्शाता है। भारत में 3.73 करोड़ क्रेडिट कार्ड और 86 करोड़ डेबिट कार्ड हैं। POS टर्मिनल में ग्रोथ और भारत QR के आने से हम कंज्‍यूमर और मर्चेंट्स दोनों के लिए समान अवसरों की पेशकश कर रहे हैं। हम 50 करोड़ डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट कर चुके हैं, साथ ही अगले 5 सालों में और 80 करोड़ डॉलर इन्‍वेस्‍ट करने की योजना है। हम दुनिया और भारत के लिए मोबाइल सॉल्‍युशंस जैसी चीजों में इन्‍वेस्‍ट कर रहे हैं। हाल ही में हमने वडोदरा में एक नया अत्‍याधुनिक टेक्‍नोलॉजी सेंटर खोला है, जो मास्‍टरकार्ड के लिए मोबाइल पेमेंट सॉल्‍युशंस हब है। इसमें मास्‍टरकार्ड के लिए अन्‍य बिजनेस वैल्‍युएबल एप्‍लीकेशंस विकसित की गई हैं। हमें विश्‍वास है कि आने वाले सालों में हम भारत में ग्रोथ दर्ज करना जारी रखेंगे।   

 

- मास्‍टरकार्ड के भारत में दो टेक्‍नोलॉजी सेंटर हैं। क्‍या आप इन सेंटर्स में भारत में लिए पेमेंट्स सॉल्‍युशन विकसित करने पर विचार कर रहे हैं?

हमारा पुणे टेक्‍नोलॉजी सेंटर भारत की एकेडमीज, फिनटेक एक्‍सपर्ट, टेक्‍नोलॉजिस्‍ट्स और डेवलपर्स के साथ सहयोग और पेमेंट सॉल्‍युशंस की को-क्रिएशन को बढ़ावा देता है। यह आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस, ब्‍लॉकचेन, मशीन लर्निंग जैसी भविष्‍य की टेक्‍नोलॉजी के साथ एक्‍सपेरिमेंट करेगा, जिससे इन्‍क्‍यूबेशन, प्रूफ ऑफ कॉन्‍सेप्‍ट, पायलट और कमर्शियलाइजेशन के जरिए नए कॉन्‍सेप्‍ट्स और इनोवेशंस लाए जा सकें। 

 

हमारा वडोदरा टेक्‍नोलॉजी सेंटर मोबाइल पेमेंट्स और सुरक्षा के लिए नए प्रोडक्‍ट और सॉल्‍युशंस पर काम करता है। लोकल, स्‍मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज को कम लागत पर डिजिटल पेमेंट स्‍वीकारने का तरीका उपलब्‍ध कराने वाला भारत QR यहीं विकसित हुआ है। 

 

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