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IT छापे के बीच पहली बार विस चुनाव लड़ रहे कमलनाथ की संपत्ति 38 फीसदी कम हुई, फिर भी तीसरे सबसे अमीर सीएम

हलफनामें में बताया कि कमाई हर साल बढ़ी पर कुल संपत्ति घटी, इमरजेंसी के वक्त स्टाफ को सैलरी भी नहीं दे पाए थे

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कुलदीप सिंगोरिया. नई दिल्ली
आयकर छापों की वजह से पूरे देश में चर्चा में आए मप्र के सीएम कमलनाथ छिंदवाड़ा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को दिए हलफनामें में खुद के नाम 75.37 करोड़ रुपए और पत्नी अलकानाथ के नाम 49 करोड़ रुपए की संपत्ति बताई है। यानी कुल संपत्ति 124.66 करोड़ रुपए है। खास बात यह है कि वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के वक्त दंपती की कुल संपत्ति 204 करोड़ रुपए थी जो अब 38 फीसदी कम हो गई है। यह भी तब जबकि आयकर रिटर्न के अनुसार सालाना कमाई बीते पांच साल में 32 लाख से बढ़कर एक करोड़ पांच लाख रुपए हो गई। इसी तरह उनकी पत्नी की भी आमदनी में तीन गुना इजाफा हुआ है। दंपति पर 2014 में पांच करोड़ रुपए का कर्ज था जब अब घटकर ढाई करोड़ रुपए रह गया है। 

 

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पत्नी की आय एक साल में 15 गुना कम हो गई

आईटी रिटर्न में बताया गया है कि पत्नी अलकानाथ ने वर्ष 2016-17 में करीब 15.95  करोड़ की कमाई की थी लेकिन दूसरे ही साल वर्ष 2017-18 में आय 15 गुना कम होकर महज 96 लाख रुपए ही रह गई। हालांकि यह आय भी वर्ष 2013-14 की 23 लाख रुपए के मुकाबले चार गुना ज्यादा थी।  कमलनाथ की संपत्ति में उनके परिवार  के स्वामित्व वाली कंपनियां और ट्रस्ट भी शामिल हैं। कमलनाथ और उनके परिवार से जुड़ी 23 कंपनियां हैं। वह छिंदवाड़ा जिले में 63 एकड़ जमीन के मालिक भी हैं। 

अब सिर्फ दो कारें और 300 ग्राम सोना 

 कमलनाथ ने बीते पांच साल में कोई कार नहीं खरीदी है। उनके पास पुरानी एंबेसडर और टाटा सफारी स्टॉर्म ही हैं। पत्नी के पास कोई कार नहीं है। इसी तरह कमलनाथ के पास 300 ग्राम सोना ही है जबकि पत्नी के पास  915 ग्राम सोना है। 

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कम कैसे हुई आय 

शपथ पत्र में सिर्फ संपत्ति की जानकारी और मूल्य दिया जाता है। दोनों शपथ का अध्ययन करने पर लगभग सारी संपत्ति वैसे ही जैसी 2014 में थी। कमलनाथ की दिल्ली वाली संपत्तियों का जिक्र 2019 के शपथ पत्र में नहीं है। यानी अब यह संपत्ति उनके पास नहीं है। लिहाजा, उनकी संपत्ति का मूल्य भी कम आ रहा है। 

 

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शपथ पत्र से पहले थे सबसे अमीर सीएम 

2014 के लोकसभा चुनाव में जमा किए गए शपथ पत्र के मुताबिक, कमलनाथ के पास कुल 187 करोड़ रुपए की संपत्ति थी। जब वे दिसंबर 2018 में मप्र के सीएम बने तो इसी आधार पर उनकी तुलना दूसरे मुख्य मंत्रियों से भी की गई। इसमें वे सबसे अमीर साबित हुए। तब 177 करोड़ रुपए की कुल संपत्ति के साथ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू दूसरे स्थान पर थे। लेकिन अब यदि कमलनाथ के नए शपथ पत्र को माना जाए तो वे पहले पायदान से खिसकर तीसरे स्थान पर चले गए हैं। दूसरे स्थान पर अरुणाचल प्रदेश की सीएम प्रेम खांडू है जिनकी कुल संपत्ति करीब 129 करोड़ रुपये हैं। 

 

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आपातकाल से पहले घाटे में चल रही थी कंपनी

आपातकाल से पहले तक उनकी कंपनी ईएमसी लिमिटेड जमकर घाटे में चल रही थी। हालात इतने खराब हो गए थे कि कंपनी के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं थे। आपतकाल के दौरान कमलनाथ ने संजय गांधी की दोस्ती का कथित फायदा उठाया और कई टेंडर हासिल किए थे। आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी की सरकार न बनने पर कमलनाथ के लिए परेशानी वाले दिन शुरू हो गए थे। लेकिन उन्होंने स्थितियों का सही लाभ उठाया। कमलनाथ की डायरी का एक हिस्सा वरुण सेन गुप्त की किताब लास्ट डेज आफ मोरारजी राज में छपा है। इसके मुताबिक चरण सिंह के साथ नजदीकी बढ़ाने में उनकी खासी भूमिका रही है। उन दिनों वे सुरेश राम, भजन लाल, बीजू पटनायक, राजनारायण, चरण सिंह और इंदिरा गांधी के बीच पुल बने हुए थे। इमरजेंसी के बाद हुए आम चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हारी इंदिरा गांधी भी अपना चुनाव हार गईं। इसके बाद ईएमसी कंपनी को दिए गए ठेके की जांच के लिए आयोग बनाया गया। जनवरी 1978 में इस आयोग की बैठक हुई थी। इसमें कुछ नहीं हुआ। बाद के सालों में आयोग का क्या हुआ यह भी पता नहीं चला। कमलनाथ खुद कहते हैं कि इंदिरा गांधी उन्हें तीसरा बेटा बताती थीं। 

 

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