हकीकत में बन सकेंगे ग्रीन पटाखे, निरी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, ग्रीन पटाखों का उत्पादन संभव

Improved formulation for manufacturing green crackers finalised PESO tells SC राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) और सेंटर फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि पटाखा निर्माताओं के लिए पर्यावरण और वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए 'ग्रीन पटाखों' का उत्पादन संभव है। न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने पटाखा निर्माताओं के परामर्श से 2 वैज्ञानिक निकायों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेने के बाद केंद्र और याचिकाकर्ता को 1 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दायर करने के लिए कहा और इस मामले को 12 मार्च को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

Money Bhaskar

Mar 06,2019 05:24:00 PM IST

नई दिल्ली। राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) और सेंटर फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि पटाखा निर्माताओं के लिए पर्यावरण और वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए 'ग्रीन पटाखों' का उत्पादन संभव है। न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने पटाखा निर्माताओं के परामर्श से 2 वैज्ञानिक निकायों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेने के बाद केंद्र और याचिकाकर्ता को 1 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दायर करने के लिए कहा और इस मामले को 12 मार्च को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में पर्यावरण प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए ग्रीन पटाखे बनाने के लिए बेरियम नाइट्रेट और पोटेशियम नाइट्रेट जैसे पारंपरिक कैमिकल की कम मात्रा के साथ कुछ अतिरिक्त योजक जोड़कर ग्रीन पटाखे बनाए जा सकते हैं।

लाइव लॉ में छपी खबर के मुताबिक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील गोपाल शंकरनारायन ने बेरियम नाइट्रेट और पोटेशियम नाइट्रेट के इस्तेमाल का विरोध किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पूर्व में केंद्र ने कहा था कि इन रसायनों का इस्तेमाल नहीं होगा। ऐसे में केंद्र सरकार इस मुद्दे पर अपनी राय दे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 23 अक्तूबर 2018 को देश भर में दिवाली के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण का मुकाबला करने के लिए पटाखों की बिक्री और पटाखे चलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए कई दिशा निर्देश भी जारी किए थे और पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगा दी थी।

ग्रीन फायर क्रेकर्स का इस्तेमाल किया जाए जो कम होगा धुआं


जस्टिस ए. के. सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने ये फैसला सुनाते हुए केंद्र के हलफनामे को मंजूर करते हुए कहा था कि कम शोर और प्रदूषण वाले एवं सुधार वाली क्वॉलिटी के पटाखों की बिक्री व निर्माण हो जिनमे राख और धूल 20 फीसदी तक कम हो। इनका मानक PESO की विशेषज्ञ टीम तय करेगी ताकि पटाखों में चारकोल और बारूदी रसायन की मात्रा को पैरोटेक्नीक से तय करने के बाद ही मंज़ूरी दी जाएगी। इसके साथ ही ग्रीन फायर क्रेकर्स का इस्तेमाल किया जाए जो कम धुआं दें। साथ ही कम धुंआ और आवाज वाले ऐसे पटाखे और आतिशबाज़ी जिनसे 30-35 फीसदी पीएम (पार्टिक्युलेट मैटर) कम उत्सर्जित होता है। इनमें खतरनाक रसायन NOx और SO2 कम होता है। पीठ ने कहा कि दिल्ली और NCR में जो पटाखे बनाए जा चुके हैं और शर्तों के मुताबिक नहीं हैं उन्हें बेचने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी अदालत ने पटाखों के निर्माण और बिक्री पर रोक पर विचार नहीं किया है और इसके लिए उन्हें व्यापक रिसर्च और शोध का इंतजार है। जब ये रिपोर्ट आ जाएंगी तो अदालत द्वारा और भी कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।

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