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Home » Economy » PolicyIf Ram statue OK, why not mine? says Mayawati

3,000 करोड़ रु. में सरदार पटेल की मूर्ति, 200 करोड़ रुपए में राम की मूर्ति बन सकती है तो मेरी क्यों नहीं : मायावती 

मायावती ने लखनऊ और नोएडा समेत कई जगहों पर मूर्तियों के निर्माण में 4148 करोड़ रुपए खर्च किए थे

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि अगर राम की मूर्ति बन सकती है तो उनकी मूर्ति क्यों नहीं बन सकती। मायावती ने यूपी की मुख्यमंत्री रहते हुए अपनी और अन्य दलित नेताओं की मूर्तियां बनवाई थीं। इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। बीएसपी सुप्रीमो (Mayawati) ने शहरों में अपने द्वारा बनाई गई मूर्तियों की स्थापना को सही ठहराया और कहा कि मूर्तियां लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती हैं। मायावती ने कहा कि राज्य की विधानसभा की इच्छा का उल्लंघन कैसे करूं? इन प्रतिमाओं के माध्यम से विधानमंडल ने दलित नेता के प्रति आदर व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए उनकी तरफ से इन मूर्तियों के लिए बजट का उचित आवंटन किया गया था

उन्होंने अपने शपथ पत्र में कहा है कि जाने माने लोगों की मूर्तियां लगवाना और उनकी यादें ताज़ा रखना भारत में कोई नई बात नहीं है कांग्रेस के शासन काल में केंद्र और राज्य सरकारों ने देशभर में सरकारी खजाने से जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पी वी नरसिम्हा राव की मूर्तियां लगवाईं। लेकिन, इन मूर्तियों को लेकर न तो मीडिया और न ही याचिकाकर्ता ने कोई सवाल उठाया।'

भगवान राम, शिवाजी, पटेल की मूर्तियां क्यों?


मायावती ने इसी क्रम में गुजरात सरकार द्वारा 3,000 करोड़ रुपए की लागत से सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची मूर्ति और मुंबई में शिवाजी महाराज की मूर्तियों का भी जिक्र किया। साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भी भगवान राम की मूर्ति बनाने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण, डिजाइन डिवेलपमेंट और प्रॉजेक्ट रिपोर्ट आदि पर 200 करोड़ रुपए की शुरुआती लागत आएगी। साथ ही यह कहा कि यह पैसा शिक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए या अस्पताल पर यह एक बहस का सवाल है और इसे अदालत द्वारा तय नहीं किया जा सकता है। लोगों को प्रेरणा दिलाने के लिए स्मारक बनाए गए थे। इन स्मारकों में हाथियों की मूर्तियां केवल वास्तुशिल्प की बनावट मात्र हैं और ये बीएसपी के पार्टी प्रतीक का प्रतिनिधित्व नहीं करते।


बता दें कि सुप्रीम कोर्ट नेबहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती को एक याचिका की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए उन्हें अपनी और हाथियों की मूर्तियां बनाने में जितना जनता का पैसा खर्च किया है, उसे वापस करने के लिए कहा गया था।

 

स्मारक और मूर्ति निर्माण में हुआ 1410 करोड़ रुपए का घोटाला 

 

मायावती के कार्यकाल में लखनऊ और नोएडा समेत विभिन्य जगह बनाए गए स्मारकों के निर्माण में 4148 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। इसमें से कुछ मूर्तियां काशीराम के साथ हैं, जबकि कुछ एकल प्रतिमाएं हैं। लोकायुक्त की जांच में पाया गया कि स्मारक निर्माण में 1410 करोड़ रुपे का घोटाला हुआ था। स्मारक में लगे एक हाथ पर करीब 50 लाख रुपए की लागत आई है। यूपी के विभिन्य स्थलों पर मायावती की करीब दर्जन भर मूर्तिया लगाई गई हैं। बसपा कार्यकाल में बने स्मारकों और पार्कों के रखरखाव पर पिछले सालों में 30 करोड़ रुपए का खर्च आया  है।

 


 

 

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