Home » Economy » PolicyMistakes in the time new joining. common mistakes in job interview

नौकरी बदलना पड़ जाएगा भारी, अगर नहीं रखा इन 8 बातों का ध्यान

कंपनी में ज्वानिंग के वक्त ऑफर लेटर दिया जाता है, जिसमें आपकी सैलरी की सारी डिटेल रहती हैं। कई मौकों पर लोग जल्दबाजी में

1 of

नई दिल्ली. अगर आप नई नौकरी ज्वाइन कर रहे हैं या फिर कंपनी बदलने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखें। ज्वानिंग के वक्त की सारी फॉर्मैलिटी ध्यान से पूरी करें। अगर कोई दिक्कत आ रही है, तो अपने एचआर से सलाह लें। अगर आपने ज्वाइनिंग के वक्त इन 8 बातों का ध्यान नहीं दिया तो आपको आगे काफी दिक्कतें हो सकती हैं।

 

1. ऑफर लेटर

कंपनी में ज्वानिंग के वक्त ऑफर लेटर दिया जाता है, जिसमें आपकी सैलरी की सारी डिटेल रहती हैं। कई मौकों पर लोग जल्दबाजी में ऑफर स्वीकार कर लेते हैं, जिससे बचना चाहिए। ऑफर लेटर को ध्यान से पढ़कर उसे स्वीकार करना चाहिए। साथ ही नई कंपनी ज्वाइन करते वक्त आपसे पुराना ऑफर लेटर मांगा जाता है, इसलिए कंपनी से ऑफर लेटर की हार्ड कॉपी भी लेना चाहिए।

 

2. प्रोबेशन पीरियड

सरकारी और प्राइवेट सभी कंपनियों में प्रोबेशन पीरियड से गुजरना होता है। यह एक तरह से आपके काम के आकलन का दौर होता है। इस दौरान गलतियां न करें, क्योंकि इस दौरान कर्मचारी के खिलाफ कंपनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होती है। कई मौकों पर आपकी नौकरी भी जा सकती है।

 

 

3. नोटिस पीरियड

नौकरी छोड़ते वक्त आपको नोटिस पीरियड पूरा करना होता है। आप किसी कंपनी में अचानक नौकरी नहीं छोड़ सकते हैं। इसके लिए एक निश्चित पीरियड तय होता है, जिसे इस्तीफे के बाद कंपनी में बिताना पड़ता है। विभिन्न कंपनियों में अलग-अलग नोटिस पीरियड होता है, ज्यादातर कंपनियों में यह एक से तीन महीने होता है।

 

4. मेडिकल इंश्योरेंस

लेबर कानून के तहत कंपनियों की तरफ से कर्मचारी को मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा मिलती है, जिसका प्रीमियम आपकी सैलरी से डिडक्ट किया जाता है। इसके अंतर्गत किसी बीमारी की चपेट में आने पर आपको और आपकी फैमिली को मेडिकल कवर मिलता है।

 

5. पीएफ

लेबर कानून के तहत 10 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों को अपने कर्मचारी को provident fund (कर्मचारी भविष्य निधि) देना होता है। इसके तहत कर्मचारी की सैलरी का कुछ हिस्सा उसकी सैलरी से डिडिक्ट किया जाता है, जबकि उतना ही हिस्सा कंपनी की ओर से डाला जाता है। इसे आप रिटायरमेंट के बाद निकाल सकते हैं। हालांकि कुछ जरूरी कार्यों के लिए भी इसे निकाला जा सकता है। इसके बारे में कंपनी से जानकारी ले लें।

 

6.पे-रोल

आज कल कई कंपनियां अपने यहां लोगों को कॉन्ट्रैक्ट पर रखती है। मतलब उन्हें पे-रोल पर नहीं रखा जाता है। इस स्थिति में कंपनी को पीएफ, मेडिकल इंश्योरेंस जैसी बाकी सुविधाएं देने से बच जाती हैं। इसलिए नौकरी ज्वाइन करते वक्त पे-रोल को लेकर एचआर से बातचीत कर लेनी चाहिए।

 

आगे पढ़ें : इस बात का भी रखें ध्यान

7. ग्रैच्युटी

लेबर मंत्रालय के कानून के तहत कंपनी को अपने कर्मचारी को एक साल में 15 दिन का वेतन ग्रैच्युटी के तौर पर देना होता है। हालांकि इसके लिए आपको एक कंपनी में 5 साल लगातार काम करना होगा। कई कंपनियां आपकी सैलरी से ग्रैच्युटी डिडक्ट करती है। ऐसे में ज्वाइंन के वक्त इसके बारे में जानकारी ले लेनी चाहिए।

आगे पढ़ें : इस बात का भी रखें ध्यान 

 

 

 

8. लीव एडं अटेंडेंस

कोई कंपनी ज्वाइन करते वक्त वहां मिलने वाला वीक-ऑफ और अटेंडेंस या फिर शिफ्ट को लेकर बातचीत कर लेनी चाहिए। इसमें पेड लीव, कैजुअल लीव, मेडिकल लीव, फेस्टिवल लीव शामिल होती हैं। इसके अलावा अपने ऑफिस टाइमिंग के बारे में पता कर लेना चाहिए।  

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट