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खराब आर्थिक स्थिति में इन तरीकों को अपना कर आसानी से चुका पाएंगे लोन

वित्तीय संकट में लाेन चुकाने के लिए अपनाएं यह टिप्स

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नई दिल्ली। आज, दुनिया की सरकारों, अर्थशास्त्रियों और पॉलिसी मेकर के सामने विशेषकर 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद, पिछले कुछ वर्षों में एकॉनामिक ग्रोथ का कम होना चिंता का विषय बना हुआ है। न केवल सरकारें, बल्कि आम जनता भी लोन चुकाने के लिए परेशानी झेल रहे हैं लेकिन बेहतर विकल्प और पॉज़िटिव माइंडसेट वाले लोग भी हैं जो ऐसे क्राइसिस के समय भी अपने लोन को चुकाने में सफल हो रहे हैं। ऐसे लोग अपनी ज़रूरतों की प्राथमिकता तय करते हैं, बजट बनाते हैं और अपनी आमदनी और खर्चों के बीच मॉडरेट करने के संसाधनों को मैनेज करते हैं और अंत में फाइनेंशियल जिम्मेदारियों से खुद को आज़ाद करते हैं। यह काम मुश्किल तो है लेकिन संभव है लेकिन उपाय करने में आपको बहुत सावधानी बरतनी होगी। वर्तमान परिस्थितियों का सही आंकलन करने से आप यह जान सकते हैं कि आमदनी के सोर्स कौन से हैं और पैसा कहां खर्च होता है, आमदनी का किस ज़रिया का पता लगाना होगा और खर्च को कहां कम किया जा सकता है।

 

आपको यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि अपना मासिक, तिमाही और वार्षिक बजट बनाना और उसका सख्ती से पालन करना फाइनेंशियल जिम्मेदारियों को पूरा करने का सबसे चतुर और बेहतरीन तरीका है। इसके बाद का बड़ा उपाय ऐसे क्राइसिस के समय में लोन को चुकाने का फीज़िबल ऑप्शन चुनना है। फिनवे कैपिटल प्रा. लि. के सीईओ रचित चावला के अनुसार, कुछ प्रैक्टिकल साल्यूशन बताए गए हैं जो इसके लिए सचमुच काम के साबित होंगे।

 

प्लान्ड स्कीन अपनाना

आम तौर पर, होम और एजुकेशन जैसे लोन मे 6 महीने या उससे अधिक का रीपेमेंट हालीडे होता है। इसलिए, अपने पास पर्याप्त राशि रखनी चाहिए ताकि नियत तारीख से ही प्रीमियम का पेमेंट करना शुरु किया जा सके। इस बारे में यदि सावधानी नहीं बरती गई तो आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है। यदि आप स्टुडेंट हैं और आपने एजुकेशन ऋण लिया है जिसे आप समय पर रोजगार न मिलने के कारण चुका नहीं पा रहे हैं तो आपको तुरंत बैंक से संपर्क करना चाहिए और नौकरी पाने में मदद मांगने का अनुरोध करना चाहिए। कर्जदार के रोजगार की स्थिति के बारे में ईमानदारी से बताने से न केवल नौकरी पाने में मदद मिलेगी बल्कि लोन को चुकाने के लिए कुछ अतिरिक्त समय भी मिल सकता है।

 

पेमेंट की अवधि बढ़ाने के बारे में सोचें

सही सूचना देने से कई जोखिम और समस्याओं को दूर किया जा सकता है। बैंक के स्टाफ़ से दोबारा चर्चा करने और उन्हें अपनी मौजूदा एकॉनामिक कंडीशन के बारे में बताने से पेमेंट की अवधि बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इस तरह, आप ई.एम.आई. का दबाव कम कर सकते हैं और कम की गई ई.एम.आई. की रकम मौजूदा आय से चुका सकते हैं। इसके अलावा, पेमेंट की अवधि बढ़ने से आपको कमाई के अधिक विकल्प खोजने का भी समय मिल जाएगा।

 

आगे पढ़ें : एकोमोडेटिव टर्म के साथ रीफाइनेंसिंग बेहतर विकल्प होगा

 

 

एकोमोडेटिव टर्म के साथ रीफाइनेंसिंग बेहतर विकल्प होगा

 

कर्जदार रिफाइनेंसिंग करा सकते हैं यानी अधिक एकोमोडेटिव या सुविधाजनक कंडीसन के साथ नए प्लान के अनुसार लोन लेना । जैसेअनेक मामलों मेंलेंडर आर्थिक रूप से वीक को-एप्लीकेंट को आर्थिक रूप से स्ट्रांग को-एप्लीकेंट से बदलने का मौका दे सकते हैं।

एक्ज़िस्टिंग असेट्स क्राइसिस से निकलने में मदद कर सकती हैं

असेट्स हमेशा फाइनेंशियल क्राइसिस से निकलने में आदमी की मदद करती हैं और लोन चुकाने में ऐसे असेट्स सचमुच बहुत कारगर होते हैं। कर्जदार अपनी असेट को गिरवी रख सकता है और यदि उसके पास किसी कंपनी के शेयर हैं तो लोन से मुक्ति पाने के लिए ऐसे शेयरों से लोन लेना एक और बेहतर विकल्प हो सकता है। इस बेहतरीन विकल्प सेआपको ब्याज पर कर की कटौती के लाभ के साथ-साथकम ब्याज दरों और अपेक्षाकृत कम प्रीमियम का लाभ मिल सकता है लेकिन कम दर तभी संभव होगा जब आपकी क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी हो।

 

आगे पढ़ें स्मार्ट बनें और लोन निपटाने की कोशिश करें

 

स्मार्ट बनें और लोन निपटाने की कोशिश करें

यदि आपमें अच्छे निगोसिएशन स्किल हैं तो आपके लिए लोन का बोझ कम करने का एक दूसरा उपयोगी विकल्प है लेंडर से कुल राशि में राहत पाने के लिए कम अवधि में एकमुश्त राशि का पेमेंट करना। फाइनेंस मेंइस उपाय को लोन निपटाना कहते हैं और कर्जदार अपने लेंडर को समझाने के बाद इसे अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इस विकल्प का लाभ लेने के लिएआपके पास लोन खत्म करने की पर्याप्त और एकमुश्त राशि होनी चाहिए। इसलिएनिगोसिएशन करते हुए लेंडर को समझाने की क्षमता होना और धनराशि उपलब्ध होना लोन को सफलतापूर्वक निपटाने के लिए ज़रूरी हैं। इस मामले में आपको लोन चुकाने से पहले लिखित कागज़ातों के बारे में बहुत सावधान रहना होगालेंडर के पास सबंधित अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित लिखित एग्रीमेंट होना बहुत ज़रूरी है।

 
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