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आप भी अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं तो ऐसे पहुंचे आसानी से, इतना आएगा खर्च, रजिस्ट्रेशन शुरू हैं

इस साल अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई से 15 अगस्त के बीच होगी।

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नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा के लिए 1 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गई है। इस साल अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई से 15 अगस्त के बीच होगी। इस वर्ष 46 दिन की यात्रा हो रही है। यात्रा के लिए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड द्वारा तैयारियां कर ली गई है। अगर आप भी इस बार अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं या फिर जाने का मन बना रहे हैं तो जान लिजिए अमरनाथ यात्रा पर आपका लगभग कितना खर्च आएगा। अमरनाथ यात्रा के लिए घोड़ा, पालकी, टेंट और हेलीकाप्टर का किराया इसके आसपास होगी।

 

अमरनाथ कैसे जाएं

पवित्र हिमलिंग के दर्शन के लिए अमरनाथ गुफा की यात्रा दो मागरें से की जा सकती है। पहला मार्ग पहलगाम से शुरू होता है और दूसरा बालटाल से। तीर्थयात्री देश के विभिन्न हिस्सों से यात्रा के इन दोनों प्रस्थान बिंदुओं तक रेल, सड़क व हवाई मार्ग से पहुंच सकते है।

जानिए रूट के बारे में...

पहलगाम अमरनाथ यात्रा का बेस कैंप है जहां से अमरनाथ की पवित्र गुफा तक की पैदल चढ़ाई शुरू होती है। इसके अलावा बालटाल से भी एक दूसरा रास्ता अमरनाथ गुफा के लिए निकलता है।

पहलगाम या बालटाल तक आप किसी भी वाहन से पहुंच सकते हैं लेकिन इससे आगे का सफर आपको पैदल ही करना होगा। पहलगाम और बालटाल से ही अमरनाथ की पवित्र गुफा तक पहुंचने के दो रास्ते निकलते हैं। ये दोनो ही स्थान श्रीनगर से अच्छी तरह जुड़े हैं इसलिए अधिकतर श्रद्धालु श्रीनगर से ही अपनी यात्री की शुरुआत करते हैं। पहलगाम से अमरनाथ की पवित्र गुफा की दूरी करीब 48 किलोमीटर और बालटाल से 14 किलोमीटर है।

बालटाल रूट - अमरनाथ गुफा तक बालटाल से कम समय में पहुंचा जा सकते हैं यह छोटा रूट है। बालटाल से अमरनाथ गुफा की दूरी करीब 14 किलोमीटर है लेकिन यह रास्ता काफी कठिन और सीधी चढ़ाई वाला है इसलिए इस रूट से ज्यादा बुजुर्ग और बीमार नहीं जाते हैं।

पहलगाम रूट - पहलगाम रूट अमरनाथ यात्रा का सबसे पुराना और ऐतिहासिक रूट है। इस रूट से गुफा तक पहुंचने में करीब 3 दिन लगते हैं। लेकिन यह ज्यादा कठिन नहीं है। पहलगाम से पहला पड़ाव चंदनवाड़ी का आता है जो पहलगाम बेस कैंप से करीब 16 किलोमीटर दूर है यहां तक रास्ता लगभग सपाट होता है इसके बाद चढ़ाई शुरू होती है। इससे अगला स्टॉप 3 किलोमीटर आगे पिस्सू टॉप है। तीसरा पड़ाव शेषनाग है जो पिस्सू टॉप से करीब 9 किलोमीटर दूर है। शेषनाग के बाद अगला पड़ाव पंचतरणी का आता है जो शेषनाग से 14 किलोमीटर दूर है। पंचतरणी से पवित्र गुफा केवल 6 किलोमीटर दूर रह जाती है।

सड़क और हवाई यात्रा से ऐसे जुड़ा है

सड़क मार्ग से ऐसे पहुंचे :

अमरनाथ गुफा का बेहद पर्वतीय और कठिन स्थान पर है यहां देश के दूसरे हिस्सों से सीधे सड़क की सुविधा नहीं है। सड़क के रास्ते अमरनाथ पहुंचने के लिए पहले जम्मू तक जाना होगा फिर जम्मू से श्रीनगर तक का सफर करना होगा। श्रीनगर से आप पहलगाम या बालटाल पहुंच सकते हैं इन दो स्थानों से ही पवित्र यात्रा की शुरुआत होती है। श्रीनगर से पहलगाम करीब 92 किलोमीटर और बालटाल करीब 93 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा आप बस या टैक्सी सेवाओ के जरिए भी पहलगाम पहुंच सकते हैं।

इतना आएगा खर्च : यात्री बस के माध्यम से न्यूनतम 130 और अधिकतम 220 रुपये(डीलक्स बस) किराया खर्च कर पहलगाम तक पहुंच सकते हैं। टैक्सी का किराया 360 से 520 रुपए प्रति यात्री तक है। इसी प्रकार बालटाल तक बस का किराया 160 से 270 रुपए तक और टैक्सी का किराया 550 से 760 रुपए तक है।

हवाई मार्ग से ऐसे पहुंचे पहलगाम से अमरनाथ की पैदल चढ़ाई शुरु होती है और पहलगाम से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट श्रीनगर में है जो करीब 90 किलोमीटर दूर है इसके अलावा जम्मू एयरपोर्ट भी दूसरा विकल्प है जो करीब 263 किलोमीटर दूर है। श्रीनगर ओर जम्मू एयरपोर्ट देश के लगभग सभी बड़े शहरों से जुड़े हुए हैं।

रेल मार्ग से ऐसे पहुंचे : पहलगाम से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन उधमपुर है जो करीब 217 किलोमीटर दूर है। लेकिन जम्मू रेलवे स्टेशन, उधमपुर की तुलना में ज्यादा अच्छी तरह से पूरे देश से जुड़ा है। जम्मू रेलवे स्टेशन का नाम जम्मू तवी है यहां से देश के करीब सभी बड़े शहरों के लिए ट्रेन चलती है।

इतना आएगा खर्च

 

गुफा तक जाने से लेकर वापसी के लिए कुली-1650

बालटाल से गुफा और वापसी के लिए खच्चर/घोड़ा-2800

गुफा और वापसी के लिए पालकी-8500

बालटाल से बारीमार्ग के लिए कुली-700

बालटाल से बारीमार्ग के लिए घोड़ा या खच्चर- 1000

बालटाल से संगम के लिए कुली- 1000

बालटाल से संगम के लिए घोड़ा या खच्चर- 1200

बालटाल से पंचतरणी के लिए कुली - 1200

बालटाल से पंचतरणी के लिए घोड़ा या खच्चर – 14500

 

हर साल लगभग इसी के आसपास किराया होता है।

 


 

आज ही करा लें रजिस्ट्रेशन

 

श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि किसी श्रद्धालु को बिना परमिट के यात्रा नहीं करने दी जाएगी। परमिट एक निश्चित दिन और मार्ग के लिए वैध होगा।तीर्थयात्रियों का रजिस्ट्रेशन पंजाब नैशनल बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक और यस बैंक की 440 नामित शाखाओं के माध्यम से किया जा रहा है, जो 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित हैं। 46 दिवसीय अमरनाथ यात्रा एक जुलाई को मासिक शिवरात्रि के दिन से शुरू होगी। यात्रा श्रावण पूर्णिमा के दिन 15 अगस्त को संपन्न होगी।

रजिस्ट्रेशन करते समय तीर्थयात्रियों को एक अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (सीएचसी) प्रस्तुत करना होगा।

 

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