Home » Economy » Policyसरकार पर कर्ज के दबाव ने रोका भारत का रेटिंग अपग्रेड: फिच - Fitch Ratings said high debt burden of the government constrains Indias rating upgrade

सरकार पर कर्ज के दबाव ने रोका भारत का रेटिंग अपग्रेड: फिच

फिच ने पिछले साल मई में भारत की सॉवरेन रेटिंग को 'BBB-' पर स्थिर रखा था।

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नई दिल्‍ली. ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि सरकार पर कर्ज के भारी दबाव ने भारत का रेटिंग अपग्रेड रोक दिया है। रेटिंग एजेसी की तरफ से यह बयान वित्‍त मंत्री अरुण जेटली की ओर से 2017-18 में फिस्‍कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) का अनुमान 3.5 फीसदी करने के एक दिन बाद आया है। पहले यह अनुमान 3.2 फीसदी था। सरकार ने अगले वित्‍त वर्ष 2018-19 के लिए फिस्‍कल डेटिसिट का लक्ष्‍य जीडीपी का 3.3 फीसदी रखा है। 

 

बता दें, गुरुवार को बजट 2018-19 में आर्थिक जरूरतों और सामाजिक बेहतरी के लिए कई पॉलिसी एलान किए गए। इनमें से कृषि इनकम में बढ़ोत्‍तरी और नए मेडिकल कॉलेज बनाने समेत चिकित्सा बीमा योजना आदि शामिल हैं। 

 

GDP के करीब 68% के बराबर कर्ज 

फिच रेटिंग्‍स (इंडिया) के डायरेक्‍टर थॉमस रूकमाकर ने कहा कि यदि बजट एलान सही तरीके से लागू किए गए तो इन क्षेत्रों में किया गया खर्च वोटर्स के बड़े वर्ग तक पहुंचेगा जो अगले चुनाव के लिहाज से महत्‍वपूर्ण होगा। रूकमाकर ने कहा कि सरकार की कमजोर आर्थिक स्थिति ने भारत की सॉवरेन रेटिंग के सुधार में रुकावट डाली है। सरकार के ऊपर जीडीपी के करीब 68 प्रतिशत के बराबर कर्ज का बोझ है और यदि राज्यों को शामिल किया जाए तो फिस्‍कल डेफिसिट जीडीपी का 6.5 प्रतिशत है।

 

3 फीसदी घाटे के लक्ष्य 2020-21 तक टला 

रूकमाकर ने कहा कि सरकार ने फिस्‍कल डेफिसिट को जीडीपी के 3 फीसदी तक सीमित रखने के लक्ष्य को 2020-21 तक के लिए टाल दिया है, जोकि इसके कार्यकाल से भी आगे है। उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जीडीपी के अनुपात में कर्ज को 40 फीसदी पर रहने के एफआरबीएम कमिटी की सिफारिशों को अपनाने की प्रतिबद्धता दिखाई है, जोकि पॉजिटीव है। हालांकि अस्‍थाई तौर पर इसे पूरे करने में देरी हो सकती है। 

 

स्‍टेबल आउटलुक के साथ 'BBB-'है रेटिंग 

रेटिंग एजेंसी फिच ने पिछले साल मई में कमजोर आर्थिक हालात का हवाला देकर भारत की सॉवरेन रेटिंग को 'BBB-' पर स्थिर रखा था। यह स्‍टेबल आउटलुक के साथ सबसे निचला इन्‍वेस्‍टमेंट ग्रेड है। 

 

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