Nipah Virus: केरल में मरने वालों की संख्‍या हुई 16, हाई अलर्ट जारी

हालांकि, राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने अभी सिर्फ तीन मौतों की पुष्टि की है। हालांकि, राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने अभी सिर्फ तीन मौतों की पुष्टि की है।
1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया। 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया।

हालांकि, राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने अभी सिर्फ तीन मौतों की पुष्टि की है। इस बीच पुणे वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट ने खून के तीन नमूना में निपाह वायरस होने की पुष्टि की है। वायरस से हो रही मौतों को देखते हुए केरल हेल्‍थ डिपार्टमेंट के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

moneybhaskar

May 21,2018 06:07:00 PM IST

कोझिकोड. केरल के कोझीकोड में निपाह वायरस से मरने वाले लोगों की संख्‍या 16 हो गई है। यह आंकड़ा स्थानीय मीडिया ने दिया है। मरने वालों में एक ही परिवार के चार लोग और इलाज में लगी एक नर्स भी शामिल है। चार की हालत गंभीर है, वहीं 25 लोगों को निगरानी में रखा गया है। हालांकि, राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने अभी सिर्फ तीन मौतों की पुष्टि की है। इस बीच पुणे वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट ने खून के तीन नमूना में निपाह वायरस होने की पुष्टि की है। वायरस से हो रही मौतों को देखते हुए केरल हेल्‍थ डिपार्टमेंट के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

बता दें कि केरल सरकार ने इस पर केंद्र से तत्काल मदद मुहैया कराने की गुहार लगाई थी, इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने रविवार को नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC) के डायरेक्‍टर को कोझिकोड जाकर राज्‍य सरकार की मदद करने और सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

आज केरल जाएगी NSDC की टीम

- राज्य सरकार की गुहार पर केंद्र से नेशनल सेंटर फॉर डीसीज कंट्रोल (NSDC) की टीम केरल में निपाह वायरस प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी।
- इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने इस संबंध में एक कमेटी गठित की है। जो बीमारी की तह तक जाने में जुटी है। इसके साथ वायरस की जद में ज्यादा लोग न आ सके इसके लिए उपाय किए जा रहे हैं।

क्‍या है निपाह वायरस

- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों पर हमला करता है।
- 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया। पहले इसका असर सुअरों में देखा गया।
- 2004 में यह बांग्लादेश में इस वायरस के प्रकोप के मामले सामने आए थे। बताया जा रहा है कि केरल में यह पहली बार फैला है।
- इस वायरस से प्रभावित शख्स को सांस लेने की दिक्कत होती है फिर दिमाग में जलन महसूस होती है। तेज बुखार आता है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत हो जाती है।
- इंसान या जानवरों को इससे बचाने के लिए कोई वैक्सीन नहीं है। इससे प्रभावित शख्स को आईसीयू में रखकर इलाज करना होता है।

लक्षण

निपाह वायरस हवा से नहीं बल्कि एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में व्यक्ति में फैलता है। इन्‍फेक्‍शन होने पर वायरल फीवर होने के साथ सिरदर्द, मिचली आना, सांस लेने में तकलीफ और चक्कर आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ये लक्षण लगातार 1—2 हफ्ते दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे पहले फिजिशियन से राय लें।

बचाव के उपाय

निपाह वायरस के इंफेक्शन से बचनने के लिए बीमार सुअर, घोड़े, पेड़ से गिरे फल और ताड़ी से दूर रहें। कोई फल और सब्जी खरीदें तो ध्यान रखें कि ये कहीं से कटा या खुंरचा हुई न हो। साथ ही पेड़ों से गिरे फल या खुले में टंगी मटकी वाली ताड़ी का सेवन न करें।

स्‍पेशल टास्‍क फोर्स हुई गठित

कोझिकोड में निपाह वायरस से हुई मौतों के बाद हेल्‍थ सर्विस डायरेक्‍टर डॉ. आरएल सरिता ने एक स्‍पेशल टास्‍क फोर्स गठित की है। इस टास्‍क फोर्स को कोझिकोड के डिस्ट्रिक्‍ट कलेक्‍टर यूवी जोस हेड कर रहे हैं। इसके अलावा किसी भी तरह की स्थिति में इमरजेंसी ट्रीटमेंट को मॉनिटर करने के लिए एक सिंगल विंडो सिस्‍टम भी बनाया गया है।

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हालांकि, राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने अभी सिर्फ तीन मौतों की पुष्टि की है।हालांकि, राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने अभी सिर्फ तीन मौतों की पुष्टि की है।
1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया।1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया।
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