हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना होने जा रहा है महंगा

जीवन बीमा खरीदना पहले के मुकाबले अब ज्यादा सस्ता और आसान हो गया है, जबकि हेल्थ इंश्योरेंस लेना काफी महंगा हो गया है और इसके भविष्य में ज्याद महंगा होने की उम्मीद जताई जा रही है। दरअसल देश की आबादी के जीवन जीने औसत आयु बढ़ी है, जिसकी वजह से लाइफ कवर की कॉस्ट कम हुई है। लेकिन हेल्थ कवर की कॉस्ट बढ़ती जा रही है। इसकी एक वजह कई कोर्ट निर्देशों को माना जा रहा है।

Money Bhaskar

Nov 29,2018 01:00:00 PM IST

नई दिल्ली. जीवन बीमा खरीदना पहले के मुकाबले अब ज्यादा सस्ता और आसान हो गया है, जबकि हेल्थ इंश्योरेंस लेना काफी महंगा हो गया है और इसके भविष्य में ज्याद महंगा होने की उम्मीद जताई जा रही है। दरअसल देश की आबादी के जीवन जीने औसत आयु बढ़ी है, जिसकी वजह से लाइफ कवर की कॉस्ट कम हुई है। लेकिन हेल्थ कवर की कॉस्ट बढ़ती जा रही है। इसकी एक वजह कई कोर्ट निर्देशों को माना जा रहा है।

एचआईवी और मानसिक रोगों को हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल करने का दवाब

दरअसल कोर्ट ने हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों पर इंश्योरेंस में एचआर्इवी, मानसिक रोगों को शामिल करने का दबाव डाला है, जो कि अब तक इससे बाहर रहते थे। हेल्थ कंपनियां कुछ क्रिटिकल बीमारियों के लिए अलग से एक हेल्थ कवर लेकर आता था। लेकिन कोर्ट की ओर से इसमें कमी का निर्देश दिया गया है। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनियों को अब अपने सभी प्रोडक्टों के साथ दोबारा काम करना पड़ रहा है। इनमें जरूरी बदलाव के बाद इन्हें बीमा नियामक के पास फाइल करना होगा।

मार्टेलिटी टेबल में 10 फीसदी का सुधार

बीमा जानकारों की मानें तो नई मोर्टेलिटी टेबल में करीब 10फीसदी का सुधार देखा गया है। इसे इंस्टीट्यूट ऑफ एक्चुएरीज ऑफ इंडिया (Institutes of Actuaries of India) ने तैयार किया है। बता दें कि बीमा कंपनियां इंश्योरेंस की कीमत मार्टैलिटी के आधार पर तय करती हैं। संभव यह भी है कि जीवन बीमा कंपनियां नई मोर्टेलिटी टेबल के आधार पर कीमत न तय करें, क्योंकि जीवन बीमा की कीमतें पहले से ही कम हैं।

वैश्विक सुधार का भारत में असर

भारत में टर्म इंश्योरेंस रेट ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले सस्ती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में जीवन जीने की औसत आयु ज्यादा है। ऐसे में वैश्विक बीमा कंपनियां भारत में लाइफ इंश्योरेंस कम दर उपलब्ध करा रही हैं। वैश्विक बीमा कंपनियों को भारत में जीवन बीमा को लेकर काफी संभावनाएं नजर आ रही है। ऐसे में वो कम दर पर लाइफ इंश्योरेंस दे सकती हैं। जानकारो के मुताबिक टेक्नोलॉजी के कारण लाइफ इंश्योरेंस ऑपरेशनों की लागत कम हो रही है।

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