Advertisement
Home » इकोनॉमी » पॉलिसीGovt would be changed Reservation criteria for General Category

अब 8 लाख आय और 5 एकड़ संपत्ति वाले नहीं होंगे सवर्ण आरक्षण के हकदार, सरकार बदलेगी गरीबी की परिभाषा, हो सकते हैं ये बदलाव

सवर्ण आरक्षण बिल में आय और संपत्ति का नहीं है कोई जिक्र, थावरचंद्र गहलोत

1 of

नई दिल्ली. सवर्ण आरक्षण के दायरे को कम करने के लिए सरकार 8 लाख रुपए आय सीमा को बदलकर 5 लाख कर सकती है। साथ ही 5 एकड़ संपत्ति को कम किया जा सकता है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अगले एक माह में इन बदलावों पर मुहर लग सकती है। केंद्रीय केंद्रीय सामाजिक न्याय एंव अधिकारिता मंत्री थावरचंद्र गहलोत ने भी बदलावों की ओर इशारा किया है। उन्होंने कहा कि 8 लाख सालाना आय और 5 एकड़ संपत्ति की लिमिट काफी ज्यादा है। इसमें बदलाव किया जा सकता है। लेकिन गहलोत ने ये भी कहा कि संसद से गरीब सवर्णों को आरक्षण को बिल पास हुआ, उसमें कहीं भी आय सीमा और संपत्ति का जिक्र नहीं किया गया है।

 

राज्यों को दिया जा सकता है सवर्ण आरक्षण का अधिकार 

वित्त मंत्रालय के कुछ सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार इस पर भी विचार कर रही है कि राज्यों को अपने हिसाब से सवर्ण आरक्षण के दायरे आने वालों के लिए नियम बनाने की छूट दे दी जाए। हालांकि अगर राज्यों को यह अधिकार दिया जाता है, तो राज्य सरकार अपने राजनीतिक फायदे के लिए इनका इस्तेमाल कर सकती हैं। 

Advertisement

 

 

सवर्ण आरक्षण पर विपक्ष के सवाल 

विपक्ष की ओर से सवर्ण आरक्षण के दायरे के लिए जो आय लिमिट और संपत्ति तय की गई है, उस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार की ओर से सवर्ण आरक्षण के लिए जो लिमिट तय की है, उसके दायरे में देश के सामान्य वर्ग के 95 फीसदी परिवार आएंगे। ऐसे में देश के गरीब सवर्ण परिवारों को सही मायने में आरक्षण का फायदा नहीं मिलेगा। साथ ही सरकार से पूछा गया है कि जब सरकार 2.5 लाख सलाना कमाने वाले से टैक्स लेती है, तो 8 लाख रुपए सालाना इनकम वाले को गरीब बताकर आरक्षण का लाभ कैसे दे सकती है। 

 

 

किसे मिलेगा आरक्षण का फायदा

ऐसे सवर्ण परिवार, जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपए से कम है, उन्हें 10 फीसदी आरक्षण के दायरे में लाया जाएगा। इसके साथ ही शहरी सवर्ण परिवार, जिनका शहर में 1000 स्क्वेयर फीट से छोटा मकान है और 5 एकड़ से कम की कृषि भूमि है, उन्हें भी आरक्षण का लाभ मिलेगा। 

 

ये भी पढ़ें- गरीबी की परिभाषा तय नहीं कर पा रही सरकार, 2.5 लाख पर टैक्स वसूली, 8 लाख पर आरक्षण

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
Advertisement