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Home » Economy » PolicyGovt to open 478 Jan Aushadhi Kendra by March, 2019; Here's how you can apply

जन औषधि केंद्र खोलने के लिए सरकार दे रही है 2.5 लाख रुपए की सहायता, मार्च तक 478 केंद्र खोलने के लिए कर सकते हैं अप्लाई

औषधी केंद्र के संचालन के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर भी दिए जाएंगे

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नई दिल्ली.

नए साल में औषधि के क्षेत्र में उद्यमी बनने का मौका सरकार दे रही है। अगले 31 मार्च तक सरकार को जन औषधि के नए 478 केंद्र खोलने हैं और इस काम के लिए सरकार की तरफ से सहायता राशि भी दी जाती है। जन औषधि केंद्र खोलने के काम ब्यूरो ऑफ फार्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग ऑफ इंडिया (बीपीपीआई) की देखरेख में किया जाता है जो कि डिपार्टमेंट ऑफ फार्मा के अधीनस्थ एक सोसायटी है। बीपीपीआई द्वारा केंद्र खोलने वाले उद्यमियों को 2.5 लाख रुपए तक की सहायता दी जाती है जो विक्रय आधारित है तथा प्रतिमाह अधिकतम 10,000 रुपए तक सीमित है। इसके अलावा व्यापार मार्जिन 20 फीसदी है ताकि यह एक आकर्षक व्यापार बन सके। परियोजना से जुड़े मुख्य कार्यपालक अधिकारी सचिन कुमार सिंह के मुताबिक 4 दिसंबर, 2018 तक जन औषधि केंद्र की संख्या 4522 हो चुकी है और 31 मार्च, 2019 तक 5000 केंद्र खोलना एवं देश के हर जिले तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। यानी कि अगले तीन महीने में 478 नए केंद्र खोले जाएंगे। बीपीपीआई जन औषधि केंद्र के सुगम संचालन के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर भी प्रदान करता है।

 

 

केंद्र खोलने की प्रक्रिया

 

कोई भी व्यक्ति, एनजीओ या फर्म जिसके पास 120 वर्ग फुट की दुकान तथा एक फार्मासिस्ट हो, वह जन औषधि केंद्र खोल सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है तथा विस्तृत जानकारी के लिए janaushadhi.gov.in वेबसाइट पर जा सकते हैं। वर्ष 2015 में जन औषधि केंद्रों की संख्या सिर्फ 99 थी जो 4 दिसंबर, 2018 तक 4522 हो गई। प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के टर्नओवर में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वित्त वर्ष 2015-6 में यह टर्न ओवर सिर्फ 12.16 करोड़ रुपए का था जो वित्त वर्ष 2018-19 में अप्रैल से लेकर 4 दिसंबर तक 177.76 करोड़ के स्तर को छू चुका था।

 

 

मूल्य निर्धारण मानदंड एवं इसके प्रभाव

जनऔषधी दवाएंबाजार के तीन शीर्ष दवा ब्रांड के औसत मूल्य से न्यूनतम 50 फीसदी तक सस्ती रहती हैं। कुछ दवाओं में यह अंतर 90 फीसदी है। वित्त वर्ष 2017-18में इस योजना के तहत लगभग 140.84 करोड़ रुपए की बिक्री की गई। ब्रांडेड दवाओं की कीमत से तुलना की जाए तो इनकी कीमत 600 करोड़ रुपए आंकी जाएगी। यानी इस योजना के तहत लोगों काे तकरीबन 450 करोड़ रुपए का लाभ मिला है। इस वित्त वर्ष में एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत का अनुमान है।

 

 

 

जन औषधि की मुख्य विशेषताएं

 

-यहां पर उच्च गुणवत्ता वाली जेनरिक दवाएं किफायती दामों पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

-शिक्षा और प्रचार के माध्यम से जेनरिक दवाओं के बारे में जागरूकता पैदा की जाएगी।

-‘बाजार हस्तक्षेप नीति’ के द्वारा दवाओं की कीमतों में ककी के लिए बाजार को प्रेरित किया जाएगा।

-रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

 

 

पर्यावरण को प्राथमिकताएं

बीपीपीआई ने देश का सबसे पहला ऑक्सो-बायो डिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन पैड ‘जनऔषधी सुविधा’ के नाम से बाजार में उपलब्ध कराया है। यह खुद ही कुछ महीनों में नष्ट हो जाता है। चार पैड के एक पैक की कीमत 10 रुपए रखी गई है।

 

 

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