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सरकार राजनीतिक चंदे में ट्रांसपरेंसी लाने के नए सुझाव पर विचार को तैयार: जेटली

जेटली ने कहा कि इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड देश में राजनीतिक चंदे में ट्रांसपरेंसी लाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है।

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नई दिल्‍ली. वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड की व्यवस्था देश में राजनीतिक चंदे में ट्रांसपरेंसी लाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। सरकार इस दिशा में किसी भी नए सुझाव पर विचार के लिए तैयार है। रविवार को एक फेसबुक पोस्‍ट में जेटली ने लिखा कि अभी तक राजनीतिक दलों को चंदा देने और उनका खर्च दोनों कैश में होता आ रहा है। चंदा देने वालों के नाम का या तो पता नहीं होता है वे छद्म होते हैं। 

 

बता दें, वित्‍त मंत्री ने पिछले हफ्ते राजनीतिक दलों को बॉन्‍ड के जरिए चंदा देने का विकल्‍प जारी किया। इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड की बिक्री जल्दी ही शुरू की जाएगी। इन बांडों की मैच्‍योरिटी 15 दिन की होगी। इन्हें एसबीआई से खरीदा जा सकेगा। कोई भी व्‍यक्ति यह बॉन्‍ड खरीद कर किसी भी पार्टी को चंदे के रूप में दे सकेगा और वह दल उसे बैंक के जरिए भुना लेगा। इन बांडों को कैश चंदे के विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है।

 

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पूरी तरह नॉन-ट्रांसपरेंट सिस्‍टम 

वित्‍त मंत्री जेटली ने लिखा, चंदे के रूप में कितना पैसा दलों को मिला, यह कभी नहीं बताया जाता और सिस्‍टम ऐसा बना दिया गया कि अज्ञात स्रोतों से संदिग्ध (अनक्‍लीन) मनी आती रहे। यह बिल्कुल नॉन-ट्रांसपरेंट सिस्‍टम है। ज्यादातर राजनीतिक ग्रुप इस मौजूदा सिस्‍टम से बहुत संतुष्‍ट दिखते हैं। यह सिस्‍टम चलता रहे, तो भी उनको कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उनकी सरकार का प्रयास यह है कि ऐसा वैकल्पिक सिस्‍टम लाया जाए, जो राजनीति चंदे की व्यवस्था में स्वच्छता ला सके। 
 

बॉन्‍ड से एक बड़ा सुधार आएगा 

जेटली ने लिखा, अब लोग सोच समझ कर यह तय कर सकेंगे कि वे अनक्‍लीन मनी के चंदे की मौजूदा व्यवस्था को अपनाए रखना चाहते हैं या चेक, ऑनलाइन ट्रांजैक्‍शन और इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड का रास्‍ता चुनते हैं। वित्‍त मंत्री ने कहा कि बाद के तीन तरीकों में से दो चेक और ऑनलाइन पूरी तरह ट्रांसपरेंट जबकि बॉन्‍ड स्‍कीम मौजूदा नॉन-ट्रासंपरेंट राजनीतिक चंदे की मौजूदा व्यवस्था की तुलना में एक बड़ा सुधार है।

 

सभी सुझावों पर विचार करेगी सरकार 

वित्‍त मंत्री ने लिखा, सरकार भारत में राजनीतिक चंदे की वर्तमान व्यवस्था को स्वच्छ बनाने और मजबूत करने के लिए सभी सुझावों पर विचार करने को तैयार है। लेकिन यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि अव्यवहारिक सुझावों से कैश डोनेशन चंदे की व्यवस्था नहीं सुधरेगी बल्कि उससे यह और पक्की ही होगी। उन्‍होंने लिखा, सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद भारत राजनीतिक चंदे का ट्रांसपरेंट सिस्‍टम नहीं बना पाया। राजनीतिक दलों को पूरे साल बहुत बड़ी राशि खर्च करनी होती है। ये खर्चे सैकड़ों करोड़ रुपए के होते हैं। इसके बाद भी राजनीतिक सिस्‍टम में चंदे के लिए अभी कोई ट्रांसपरेंट फंडिंग मैकेनिज्‍म नहीं बन पाया है। 

 

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