विज्ञापन
Home » Economy » PolicyGood fund change time to time

हर महीने, हर तिमाही, हर साल बदलते रहते हैं बेहतरीन फंड

निवेश करते समय लोग करते हैं ये गलतियां

Good fund change time to time

Good fund change time to time एक म्यूचुअल फंड सलाहकार के नाते मुझसे एक सर्वसाधारण सा प्रश्न पूछा जाता है कि हाल फिलहाल का सबसे अच्छा म्यूचुअल फंड कौन है? जवाब में मैं उनसे पूछता हूं कि आपको सबसे अच्छा फंड क्यों चाहिए। उसके बाद वो मुझे बड़ी विचित्र नजरों से देखते हैं और कहते हैं निश्चित रूप से अच्छे रिटर्न के लिए सबसे अच्छा फंड ही सबसे अच्छा रिटर्न दे सकता है। और तब मेरी बारी आती है जब मैं उन्हें विचित्र नजरों से देखने लगता हूं। अगर आपको सचिन तेंदुलकर का वह बल्ला भी दिया जाए जिससे उन्होंने शतकों की बरसात की, तो क्या आप भी उसी बल्ले से उतना रन बना पाएंगे? इसका जवाब होगा नहीं।

आशीष मोदानी

(निदेशक- एसएलए फाईनेंशियल सोल्यूशंस)

नई दिल्ली। एक म्यूचुअल फंड सलाहकार के नाते मुझसे एक सर्वसाधारण सा प्रश्न पूछा जाता है कि हाल फिलहाल का सबसे अच्छा म्यूचुअल फंड कौन है? जवाब में मैं उनसे पूछता हूं कि आपको सबसे अच्छा फंड क्यों चाहिए। उसके बाद वो मुझे बड़ी विचित्र नजरों से देखते हैं और कहते हैं निश्चित रूप से अच्छे रिटर्न के लिए सबसे अच्छा फंड ही सबसे अच्छा रिटर्न दे सकता है। और तब मेरी बारी आती है जब मैं उन्हें विचित्र नजरों से देखने लगता हूं। अगर आपको सचिन तेंदुलकर का वह बल्ला भी दिया जाए जिससे उन्होंने शतकों की बरसात की, तो क्या आप भी उसी बल्ले से उतना रन बना पाएंगे? इसका जवाब होगा नहीं। लेकिन बात जब म्यूचुअल फंडों में निवेश की आती है तो लोग अक्सर सबसे बेहतरीन फंडों के बारे में ही सोचते हैं। उनको ऐसा लगता है कि उनके रिटर्न का भविष्य फंडों पर ही निर्भर है, जिसका वे चुनाव करेंगे और इसलिए ऐसे फंड हमेशा बेहतरीन फंड होने चाहिए। आइए थोड़ा अतीत में चलते हैं और देखते हैं कि क्या यह सच है?

अनुमानित गलतियां- अपनी किताब प्रेडक्टिबली इरेशनल में लेखक डैन ऐरली बताते हैं कि बात जब भी पैसे की होती है मानव अतार्किक हो जाता है और यहीं से वह गलतियां करना शुरू कर देता है। मजे की बात यह है कि यह गलतियां पहले से अनुमानित होती हैं, और यह हम बता सकते हैं कि किसी विशेष घटनाचक्र में निवेशक गलतियों के इन्हीं पैटर्न को फिर से दोहराएगा। किसी भी चीज को जल्दी और आसानी से हासिल कर लेने की इच्छा काफी बलवती होती है। निवेशक भी यही फॉर्मूला अपनाने की कोशिश में रहते हैं और यत्र तत्र प्रयास करने की कोशिश करते रहते हैं। वह काफी हाथ पैर मारते हैं और बाद में इसमें उन्हें असफलता ही हाथ लगती है। परंतु फिर भी वह इसी जल्द और आसान वाले फार्मूले पर काम करते रहते हैं और तब तक हार नहीं मानते जब तक उन्हें यकीन नहीं हो जाता कि ऐसा कोई फार्मूला नहीं होता है।

रिटर्न के पीछे भागना, न कि लक्ष्य के पीछे- लोग अक्सर बेहतरीन या उच्च रिटर्न प्राप्त करने की लालसा में हमेशा बेहतरीन फंड के बारे में ही सोचते हैं, क्योंकि उन्हें यह बताया जाता है कि बेहतरीन फंड ही बेहतरीन रिटर्न देंगे, परंतु वास्तविकता यह है कि यह बेहतरीन हर महीने, हर तिमाही, हर साल बदलता रहता है। अगर कोई निवेशक बेहतरीन फंड में निवेश करता है तो अगले साल किसी दूसरे बेहतरीन में निवेश बदल देता है और यह प्रक्रिया दस सालों तक लगातार अपनाता है, तो यह गारंटी के साथ कहा जा सकता है कि उसका फंड कम से कम प्रदर्शन ही करेगा, और यहां तक कि औसत से भी कम प्रदर्शन कर पाएगा। आपके निवेश की रणनीति का आखिरी उद्देश्य आपके लक्ष्य की प्राप्ति होनी चाहिए। यह लक्ष्य आपका रिटायरमेंट हो सकता है, बच्चे की उच्च शिक्षा हो सकती है या फिर कुछ करोड़ रुपये जमा करने का हो सकता है। हम हर समय बेहतरीन या सर्वोत्तम रिटर्न नहीं हासिल कर सकते। यह सिर्फ आपकी सोच में ही संभव है। अगर आप अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो आप सिर्फ रिटर्न के बारे में नहीं सोचेंगे। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि रिटर्न जरूरी नहीं है, मेरा कहने का मतलब यह है कि किसी भी बातचीत की शुरुआत सिर्फ रिटर्न से नही्ं हो सकती। 


जटिलताओं से प्यार करना- लोग अक्सर यह भी सोचते रहते हैं कि जब तक वह निवेश की कोई बड़ी जटिल मॉडल के जरिए निवेश नहीं करेंगे, उन्हें अच्छा रिटर्न प्राप्त नहीं होगा और आगे चलकर होता यह है कि जटिलताओं की इन्हीं जाल में फंसकर वे काफी कुछ गंवा बैठते हैं। कंफ्यूशियत ने सही ही कहा है कि जीवन बड़ा साधारण है, परंतु हम ही इसे जटिल बनाते रहते हैं। याद रखिए कि निर्माता और मार्केटिंग के गुरू लोगों को पता होता है कि निवेशक लोग जटिल चीजों के प्रति आकर्षित होते हैं और वे इसकी ओर आसानी से झुक भी जाते हैं। इसलिए वे हमेशा से चाहते हैं कि आप एक निवेशक की तरह उनके जटिल उत्पादों को खरीदें जिन्हें बेचना तो आसान होता है, परंतु उनकी खरीदारी निश्चित रूप से अच्छी नहीं मानी जाती है।

याद रखिए कि जो संपत्ति का अर्जन काफी समय देने के बाद किया जाता है, और आप उसका निर्माण काफी आसानी से कर सकते हैं, वह संपत्तियां निश्चित ही जटिल नहीं होती हैं। अंत में मैं यह कहना पसंद करूंगा कि भावनात्मक गुणक, बुद्धिमान गुणक से सदैव अच्छा रहता है और जो निवेशक इस रहस्य को समझ लेते हैं वह निश्चित रूप से विजेता बनते हैं। वारेन बफेट ने एक बार कहा था कि अगर आप अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सकते, तो समझिए कि आप अपने पैसे को भी नियंत्रित नहीं कर पाएंगे।

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
विज्ञापन
विज्ञापन