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दिवाली पर लक्ष्मी के इन मंदिरों में पूजा से होती है धन की वर्षा

इन मंदिरों में सच्चे दिल से मांगने पर पूरी होती है मनोकामना

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नई दिल्ली। हिंदू मान्यता के मुताबिक धन और संपन्नता की देवी लक्ष्मी की पूजा करने से धन संपदा के द्वार खुलते हैं। धनतेरस और दिवाली पर तो इनका पूजन और भी महत्वपूर्ण बताया गया है। आज हम आपको बता रहे हैं देश के ऐसे लक्ष्मी मंदिरों के बारे में जो बेहद प्रसिद्ध हें और जहां धनतेरस और दिवाली पर पूजन करने से लक्ष्मी माता आपकी मनोकामना पूरी करेंगी।

 

लक्ष्मी नारायण मंदिर (बिड़ला मंदिर), दिल्ली

1939 में बिड़ला मंदिर को बलदेव दास बिड़ला और विजय त्यागी ने बनवाया था। यह मंदिर देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर का उद्घाटन महात्मा गांधी ने किया था। 7.5 एकड़ में फैले इस मंदिर में शिव, कृष्ण और बुद्ध भगवान के मंदिर भी हैं। यहां दिवाली के आसपास हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

 

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श्रीपुरम स्वर्ण मंदिरवेल्लोरतमिलनाडु

तमिलनाडु के वेल्लोर में स्थित श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर देश के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। माता लक्ष्मी को समर्पित यह मंदिर अपने आप में अनोखा है क्योंकि यह 1500 किग्रा शुद्ध सोने से ढका हुआ है। दिवाली के दौरान यहां काफी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

 

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महालक्ष्मी मंदिरमुंबईमहाराष्ट्र

देश के सबसे प्रसिद्ध देवी मंदिरों में से एक महालक्ष्मी मंदिर को 1831 में एक हिंदू व्यापारी धाकजी दादाजी ने बनाया था। इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक कहानी है। मुंबई के सभी द्वीपों को जोड़ने के लिए एक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था। हॉर्नबी वेल्लार्ड नाम के प्रोजेक्ट के लिए समुद्र में जो निर्माण किया जा रहा था उसकी दीवारें दाे बार ढह गईं। प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर को वर्ली के पास समुद्र में देवी की मूर्ति होने का सपना आया था। ढूंढने पर वहां मूर्ति मिल गईजिसके बाद वहां मंदिर बनावाया गया। मंदिर बनने के बाद प्रोजेक्ट भी निर्विघ्न पूरा हो सका। तब से इस मंदिर को लेकर लोगों में गहरी आस्था है।

 

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लक्ष्मी देवी मंदिरहसनकर्नाटक

कर्नाटक के हसन जिले में स्थित इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1114 में होसला साम्राज्य के राजा विष्णुवर्धना ने किया था। मंदिर अपनी बेहद सुंदर नक्काशी और निर्माणकला के लिए जाना जाता है। मंदिर के प्रांगण में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी प्रतिष्ठित हैं। देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में शामिल इस मंदिर को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

 

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अष्टलक्ष्मी मंदिरचेन्नईतमिलनाडु

चेन्नई स्थित अष्टलक्ष्मी मंदिर का उद्घाटन 1976 में हुआ। इसमें माता लक्ष्मी के सभी आठ रूपों की पूजा की जाती है। देवी के हर स्वरूप के लिए मंदिर परिसर में अलग-अलग मंदिर बनाए गए हैं। ये आठों स्वरूप आठ तरह की संपदा प्रदान करते हैंसंतानसफलतासंपन्नतादौलतसाहसहिम्मतअन्न व ज्ञान। यहां भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन को आते हैं।

 

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महालक्ष्मी मंदिरकोल्हापुरमहाराष्ट्र

श्री महालक्ष्मी मंदिर हिंदू धर्म में दी हुई 18 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी को अंबाबाई नाम से भी पुकारा जाता हैजिसका मतलब है दैवीय मां। काेल्हापुर में पंचगंगा नदी के किनारे बने इस मंदिर को लेकर मान्यता हैकि यहां भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ निवास करते हैं। यहां लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं।

 
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