Home » Economy » PolicyMehul Choksi is Master Mind of PNB Scam Claims Gitanjali Gems Former MD, चौकसी ने हिमेश रेशमिया समेत कई लोगों को ठगा

चौकसी ने हिमेश रेशमिया समेत कई लोगों को ठगा, 10 गुना तक कमाया प्रॉफिट: गीतांजलि जेम्‍स के पूर्व एमडी

गीतांजलि के पूर्व प्रेसिडेंट और एमडी संतोष श्रीवास्तव ने मेहुल चौकसी की धोखाधड़ी के बारे में सोमवार को लेकर खुलासे किए।

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मुंबई. गीतांजलि के पूर्व प्रेसिडेंट और एमडी संतोष श्रीवास्तव ने मेहुल चौकसी की धोखाधड़ी के बारे में सोमवार को लेकर खुलासे किए। श्रीवास्‍तव ने बताया कि चौकसी ने सिर्फ पीएनबी के साथ ही फ्रॉड नहीं किया गया, बल्कि कस्टमर्स को भी ठगा है। यहां तक की मेहुल ने अपने ब्रांड के लिए अपनी सर्विस देने वाली सेलिब्रिटीज को भी ठगा। उन्होंने बताया कि संगीतकार हिमेश रेशमिया को भी इस शख्स ने बेवकूफ बनाया। उन्हें एक टीवी विज्ञापन करने के एवज में कम कीमत के हीरे दिए। इतना ही नहीं वह 10 गुना ज्यादा कीमत पर हीरा बेचता था। बता दें कि मेहुल और नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक में 11,356 करोड़ रुपए का फ्रॉड करने का आरोप है। फिलहाल दोनों देश से भाग गए हैं।

 

 

संतोष श्रीवास्तव ने यह खुलासा रिपब्लिक टीवी को दिए इंटरव्यू में किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे कई मौके उनके सामने आए जब कस्टमर को नकली हीरे दिए गए। उदाहरण के लिए एक कस्टमर को एक हीरा 50 लाख में दिया गया। असल में गीतांजलि के लिए इसकी लागत 2000 से 3000 रुपए रही। वह असली और नकली हीरे की मिक्सिंग कर ऐसा करता था।

 

- उन्होंने बताया कि मैं प्राइस तय करने के मामले से सीधा नहीं जुड़ा था, लेकिन यह सब मेरी जानकारी में आता था। मैंने कई बार इन मामलों को मेहुल चौकसी के सामने उठाया, लेकिन उन्होंने कहा कि यह तुम्हारा बिजनेस नहीं है। तुम अपने काम से काम रखो।

 

कई संदिग्ध गतिविधियां देखीं

- संतोष ने बताया- "मैंने गीतांजलि ग्रुप में 2009 से 2013 तक काम किया। इस दौरान कई संदिग्ध गतिविधि देखीं।"

 

हिमेश रेशमिया को कैसे ठगा?

- उन्होंने बताया- "हिमेश रेशमिया से टीवी कर्मिशयल के बदले 50 लाख के हीरे देने का वादा किया गया था। रेशमिया ने जब इन्हें बाहर बाजार में क्रॉस चेक कराया, तो उसकी वैल्यू काफी कम थी। ऐसा एक नहीं बल्कि कई और सेलिब्रिटीज के साथ किया गया।"

 

राउंड ट्रिपिंग से ठगता था लोगों को

- श्रीवास्तव ने बताया- "वह विदेशों में बिना तराशे हीरे खरीदता था। फिर इन्हें भारत लाता था। यहां तराश कर वापस विदेश ले जाकर बेच देता था। यह पूरा काम वह फेक कंपनियों के जरिए करता था। बिना तराशा हीरा खरीदने के लिए लोन लेता था। फिर बेचने के लिए भी ऐसा करता था। यह काम वह टैग चेंज कर। फर्जी बिल बनाकर और लोन लेकर करता था। इस दौरान वह हीरे की कीमत को 10 गुना तक बढ़ा देता था।"

 

बनते थे फर्जी बिल

- उन्होंने बताया कि "कंपनी का जोर फेंचाइजी बिजनेस पर था। इसमें 10 रुपए के सामान की वेल्यू 500 रुपए दिखाकर बिल जनरेट किए जाते थे। करोड़ों की राशि फर्मों से ली जाती थी।इसको लेकर मैंने फाइनेंस मिनिस्ट्री लेकर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी तक में शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।" 
- " 2013 में मैंने इसकी शिकायत पीएमओ में की। वहां से केस आरओसी (रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी) में भेज दिया गया। लेकिन से भी निराशा ही हाथ लगी। कुछ समय बाद उनके साथी हरिप्रसाद को मेल वहां से मेल आया कि शिकायत बंद कर दी गई।" 
- " स्टॉक आने की जानकारी मिलती थी, लेकिन कोई स्टॉक नहीं आता था।"

 

मुझे कई केस में फंसाने की कोशिश की

- श्रीवास्तव ने बताया कि मुझ पर 2013 से ही प्रेशर बनाया गया, कई केसों में फंसाने की कोशिश की गई। चौकसी ने इकॉनोमिक ऑफेंस विंग में शिकायत की। 2014 में आई रिपोर्ट में बताया गया कि कंप्लेंट झूठी है। वहीं, रिपोर्ट में ईओडब्लू ने गीतांजलि कंपनी में अकाउंटिंग को संदिग्ध बताया। 
- मुख्य दोषी मेहुल चौकसी हैं। उन्होंने घोटाले की नींव रखी। बाद में नीरव ने ज्वाइन किया।

 

कैसे सामने आया PNB फ्रॉड?

- पंजाब नेशनल बैंक ने बुधवार को स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,356 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।
- इस घोटाले की शुरुआत 2011 से हुई। 7 साल में हजारों करोड़ की रकम फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LoUs) के जरिए विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई।
- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। 
- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।


घोटाले में कौन-कौन हैं आरोपी ?

- हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप्स के मालिक मेहुल चौकसी इस घोटाले के मुख्‍य आरोपी हैं। इन दोनों ने गोकुलनाथ शेट्टी के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।
- 280 करोड़ के फ्रॉड केस में ED ने नीरव मोदी की पत्नी आमी, भाई निशाल, मेहुल चीनूभाई चौकसी, डायमंड कंपनी के सभी पार्टनर्स, सोलर एक्सपर्ट्स, स्टेलर डायमंड और बैंक के दो अफसरों गोकुलनाथ शेट्टी (अब रिटायर्ड) और मनोज खरात के खिलाफ केस दर्ज किया है।

 

 

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