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एक्सपोर्ट को बूस्ट देने के लिए कई इंसेंटिव्स का एलान; FTP का मिड टर्म रिव्यू जारी

सरकार ने एक्सपोर्ट को बूस्ट देने के लिए कई बड़े फैसले लिए।

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नई दिल्ली. सरकार ने एक्सपोर्ट को बूस्ट देने के लिए कई बड़े फैसले लिए। फॉरेन ट्रेड पॉलिसी (एफटीपी) 2015-20 के मिड टर्म रिव्यू में सरकार ने कुछ सेक्टर के लिए एक्सपोर्ट इंसेंटिव बढ़ाने, डॉक्यूमेंटेसन प्रोसिजर्स आसान बनाने और सालाना 8500 करोड़ रुपए के एडिशनल बेनिफिट्स देने का ऐलान किया। कामर्स मिनिस्‍ट्री के अनुसार इन कदमों से नए मार्केट में निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा ट्रेडिशनल मार्केट में फोकस बढ़ाने में मदद मिलेगी।

 

 

एक्सपोर्ट को मिलेगा बूस्टः प्रभु

नई पॉलिसी को जारी करते हुए कामर्स मिनिस्‍टर सुरेश प्रभु ने कहा कि एक्सपोर्ट इंसेंटिव्स की बदौलत पिछले 14 में से 13 महीने में बढ़त दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से एक्सपोर्ट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा। प्रभु ने कहा कि एफटीपी का उद्देश्य एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट्स पर केंद्रित नीति के माध्यम से किसानों की इनकम में बढ़ोत्तरी को आसान बनाना है।

 

 

मिड टर्म रिव्‍यू की खास बातें

-निर्यात प्रोत्‍साहन स्‍कीम्‍स को जारी रखते हुए उनमें सुधार करना।

-ऐसे स्‍माल बिजनेस को 2 फीसदी का इनसेंटिव देना जिनमें रोजगार के ज्‍यादा अवसर हों।

-ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप की समय सीमा को बढ़ाकर 24 महीने करना

 

इन बातों का रखा गया है ध्‍यान

इस बार फॉरेन ट्रेड पॉलिसी में कई बातों का ध्‍यान रखा गया है। इसमें एक्सपोर्ट को कैसे GST का पूरा लाभ मिले और निर्यात में आने वाली दिक्‍कतों को तुरंत दूर करने का मैकेनिज्‍म बनाने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा विदेश व्‍यापार में ईज ऑफ डूइंग से लेकर कृषि निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

 

MEIS के लिए बढ़ाया गया इनसेंटिव

मर्चेंडाइज एक्‍सपोर्ट फ्राम इंडिया स्‍कीम (MEIS) में इनसेंटिव में 2 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। यह 2 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा देश से होने वाले सर्विस एक्‍सपोट्र पर भी 2 फीसदी का इनसेंटिव बढ़ाया गया है।

 

पहले मिड टर्म रिव्यू 1 जुलाई से पहले जारी होना था, जब जीएसटी को लागू किया गया था, लेकि‍न इसे आगे बढ़ा दि‍या गया क्‍योंकि‍ सरकार इसमें एक्‍सपोर्टर्स का जीएसटी पर फीडबैक भी चाहती थी। अप्रैल 2015 में पांच साल की वि‍देश व्‍यापार नीति‍ की घोषणा हुई थी, जि‍समें भारतीय सेवाओं व वस्‍तुओं के नि‍र्यात को 2020 तक 900 अरब अमेरि‍की डॉलर करने का लक्ष्‍य रखा गया था।

 
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