कृष्ण नगरी में जाने का रास्ता हुआ आसान, अब बेट द्वारका जाने के लिए नहीं लेनी पड़ेगी फेरी, बन रहा है सबसे लंबा केबल स्टे ब्रिज, काम शुरू

अब द्वारका से द्वारकाधीश जाने वाले श्रद्धालुओं का सफर आसान होने वाला है। मंत्रालय ने ओखा-बेट-द्वारका द्वीप को गुजरात तट से जोड़ने का काम शुरू कर कर दिया है। इस पुल का नाम सिग्नेचर ब्रिज रखा गया है। 3.75 कि.मी. लम्बे इस पुल पर 27.20 मीटर चौड़ाई वाले चार लेन बनेंगे। 

Money Bhaskar

Jan 08,2019 03:11:00 PM IST

नई दिल्ली। अब द्वारका से द्वारकाधीश जाने वाले श्रद्धालुओं का सफर आसान होने वाला है। मंत्रालय ने ओखा-बेट-द्वारका द्वीप को गुजरात तट से जोड़ने का काम शुरू कर कर दिया है। इस पुल का नाम सिग्नेचर ब्रिज रखा गया है। 3.75 कि.मी. लम्बे इस पुल पर 27.20 मीटर चौड़ाई वाले चार लेन बनेंगे। इस ब्रिज को 689.47 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। यह परियोजना को 1 जनवरी 2018 को आवंटित की गई थी। यह भारत का सबसे लंबा केबल स्टे ब्रिज होगा जिसका मुख्य स्पैन 500 मीटर होगा। अब यह परियोजना 30 महीने की अवधि में पूरी होने वाली है। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे। बता दें यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है।

पुल पर ढाई मीटर चौड़ा फुटपाथ बनेगा

परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, इस ब्रिज का काम 2020 में पूरा हो जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को द्वारकाधीश जाने में फेरी या नाव नहीं करना पड़ेगा। इस पुल पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इस पुल को तार से बांधकर दो ऊंचे टावरों यानी पायलोन से खड़ा किया जाएगा। इसकी ऊंचाई 150 मीटर होगी। दो पायलोन के बीच आधा किलोमीटर की दूरी होगी।

पर्यटकों को मिलेगी राहत

हर साल 20 लाख पर्यटक बेट द्वारका आते हैं। इसके अलावा 8 हजार लोगों को द्वारका से ओखा जाने के लिए बोट का इस्तेमाल करना पड़ता है। बताया जाता है कि द्वारका जाने के बाद द्वारकाधीश जाना जरूरी होता है तभी यात्रा सफल माना जाती है। इस पुल के बन जाने से इस समस्या से लोगों को मुक्ति मिल जाएगी। पुल के निर्माण के बाद वे दिन के किसी भी समय यात्रा कर सकते हैं।

    2000 से 2200 साल पुराना है यह मंदिर गुजरात के द्वारका में स्थित द्वारकाधीश मंदिर द्वारका नगरी आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित देश के 4 धामों में से एक है। यह मंदिर श्री कृष्ण को समर्पित है। पुरातात्त्विक खोज में सामने आया है कि यह मंदिर करीब 2000 से 2200 साल पुराना है। इस मंदिर की इमारत 5 मंजिला है और इसकी ऊंचाई 235 मीटर है। यह इमारत 72 स्तंभों पर टिकी हुई है। ऐसा माना जाता है कि द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण भगवान श्री कृष्ण के पोते वज्रभ ने करवाया था।ऐसे पहुंच सकते हैं द्वारका एयरप्लेन से: द्वारका पहुंचने के लिए कोई भी सीधी फ्लाइट नहीं है। द्वारका से सबसे नजदीक एयरपोर्ट जामनगर है जो यहां से 47 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा आप पोरबंदर एयरपोर्ट तक की फ्लाइट भी ले सकते हैं। यह एयरपोर्ट द्वारका से करीब 98 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से आप कैब ले सकते हैं, जो आपको सीधे द्वारकाधीश मंदिर पहुंचाएगी। दोनों ही एयरपोर्ट्स के लिए देश की बड़े शहरों से आसानी से फ्लाइट मिल जाएगी। ट्रेन: द्वारका देश के कई शहरों से रेल नेटवर्क के जरिए कनेक्टेड है। द्वारका रेलवे स्टेशन तक आपको रोज कई ट्रेनें मिल जाएंगी। एक बार द्वारका स्टेशन पहुंचने पर आपके लिए मंदिर जाना आसान है, क्योंकि स्टेशन और मंदिर के बीच की दूरी महज एक किलोमीटर है। सड़क मार्ग: द्वारका देश के लगभग सभी बड़े शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। आप न सिर्फ खुद की गाड़ी से वहां पहुंच सकते हैं बल्कि मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको कई बस सर्विस भी मिल जाएंगी, जिसे आप अपनी सुविधा के अनुसार चुन सकते हैं।
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