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पूर्व लोकसभा स्‍पीकर सोमनाथ चटर्जी का 89 साल में निधन

हिंदूवादी पिता के कम्‍प्‍यूनिस्‍ट बेटे थे चटर्जी का लोकसभा स्‍पीकर के तौर पर उनका कार्यकाल बेहद चर्चित रहा था...

somnath chatarji passes away at age of  89, former Lok Sabha Speaker somnath chatterjee dies

कोलकाता। किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का सोमवार को निधन हो गया। वह 89 साल के थे। 10 बार सांसद रहे चटर्जी कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। किडनी की बीमारी के चलते उनका डायलिसिस चल रहा था। पिछले महीने वह ब्रेन हमरेज का भी शिकार हुए थे। चटर्जी कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए-1 सरकार में 2004 से 2009 तक लोकसभा के अध्यक्ष रहे थे। 

 

पीएम मोदी और राहुल गांधी ने जताया शोक 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमनाथ के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके कहा कि उन्होंने हमारे संसदीय लोकतंत्र को और मजबूत किया। वह गरीबों और वंचित लोगों की एक मजबूत आवाज थे। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और समर्थकों के साथ हैं। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि सभी सांसद पार्टी लाइन से हटकर उनकी प्रशंसा करते थे। मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों के साथ हैं।


हिंदूवादी पिता के कम्‍प्‍यूनिस्‍ट बेटे थे चटर्जी 
सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई 1929 को असम के तेजपुर में हुआ था। उनके पिता निर्मलचंद्र चटर्जी और मां वीणापाणि देवी थीं। मशहूर वकील और कलकत्ता हाई कोर्ट के जज रहे निर्मलचंद्र चटर्जी आजादी से पहले हिंदू महासभा के संस्थापक सदस्य रहे थे। देश के पहले लोकसभा चुनाव में सोमनाथ के पिता अखिल भारतीय हिंदू महासभा के टिकट पर निर्वाचित भी हुए थे। हालांकि हिंदूवादी पिता के पुत्र सोमनाथ चटर्जी की राजनीति की धारा उलटी बही। सोमनाथ चटर्जी को वामपंथ की राजनीति रास आई। 1968 में वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सदस्य बने और 1971 में पार्टी के टिकट पर पहली बार संसद पहुंचने में कामयाब रहे।

 

लोकसभा स्‍पीकर के तौर पर उनका कार्यकाल रहा था चर्चित 
CPI (M) के नेता सीताराम येचुरी ने बताया कि पार्टी के कई नेताओं के साथ सोमनाथ चटर्जी ने अपना शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए दान किया था। उनके पार्थिव शरीर को पार्टी ऑफिस में रखा जाएगा, जहां उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। सोमनाथ चटर्जी ने अपनी लंबी राजनीतिक पारी में तमाम ख्याति हासिल की, लेकिन लोकसभा स्पीकर का उनका कार्यकाल कुछ खास ही चर्चित रहा। चटर्जी ने बतौर स्पीकर एक ऐसा काम किया जो उनकी पार्टी सीपीएम को नागवार गुजरा और पार्टी ने इस दिग्गज नेता को बाहर का रास्ता दिखा दिया। 

 

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