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कोयला घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा समेत 4 दोषी करार, सजा पर फैसला कल

मधु कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एच. सी. गुप्ता, झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार बसु और एक अन्य को दोषी करार दि‍या है।

former Chief Minister Madhu Koda with 4 other convicted in coal scam

नई दि‍ल्‍ली. दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एच. सी. गुप्ता, झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार बसु और एक अन्य को धारा 120 बी केे तहत अपराधि‍क साजिश का दोषी करार दिया है। कोर्ट ने आरोपि‍यों की सजा पर फैसला गुरुवार तक के लि‍ए सुरक्षि‍त रख लि‍या है।

 

क्‍या है मामला 
 
यह मामला झारखंड में राजहरा नॉर्थ कोयला ब्लॉक को कोलकाता की विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड (वीआईएसयूएल) को आवंटित करने में कथित अनियमिताओं से संबंधित है। सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश ने बुधवार को फैसला सुनाने के समय सभी आरोपियों को अदालत में मौजूद रहने का आदेश दिया था। 
 
झारखंड सरकार ने नहीं की थी आवंटन की सिफारिश 
 
सीबीआई ने आरोप लगाया कि वीआईएसयूएल कंपनी ने 8 जनवरी 2007 को राजहरा नॉर्थ कोयला ब्लॉक के आवंटन के लिए आवेदन दिया था। आरोप मेें कहा गया है कि‍ झारखंड सरकार और इस्पात मंत्रालय ने वीआईयूएसएल को कोयला ब्लॉक का आवंटन करने की सिफारिश नहीं की थी। इसके बावजूद 36वीं स्क्रीनिंग कमेटी ने आरोपी कंपनी को ब्लॉक का आवंटन करने की सिफारिश की। 
 
प्रधानमंत्री को नहीं दी थी पूरी जानकारी 
 

सीबीआई ने कहा कि स्क्रीनिंग कमेटी के तत्कालीन चेयरमैन गुप्ता ने यह तथ्य तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से छिपाया कि झारखंड सरकार ने वीआईएसयूएल को कोयला ब्लॉक का आवंटन करने की सिफारिश नहीं की है। उस समय कोयला मंत्रालय का प्रभार तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास ही था। 

 
 
सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कि‍ए सभी आवंटन 

- 24 सितंबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के बाद हुए सभी कोल ब्लॉक आवंटन रद्द किए। 

- 218 ब्लॉक आवंटन किए गए थे कुल जिनमें से 214 को किया रद्द। 

- 04 ब्लॉक केंद्र सरकार द्वारा संचालित थे इसलिए उनका आवंटन नहीं हुआ रद्द। 

कोयला ब्लॉक घोटाला 

- कैग की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि‍ इस आवंटन से सरकार को 1.86 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। 
 
- 2004 के बाद आवंटित किए गए 142 ब्लॉक के आवंटन की प्रक्रिया पर कैग ने जताया था ऐतराज। 
 
- 2012 के अगस्त में संसद में पेश की गई कैग की रिपोर्ट जिस पर विपक्ष ने किया था हंगामा। 

- 25 निजी क्षेत्र की कंपनियों को सीधे नामांकन के आधार पर ब्लॉक आवंटित किए गए थे। 
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