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Home » Economy » PolicyFinance Minister Arun Jaitley claims Rahul Gandhi minimum income scheme is a bluff

गरीबों को हर साल 1 लाख से ज्यादा रुपए देती है मोदी सरकार: जेटली

राहुल गांधी के 72 हजार रुपए देने के वादे पर वित्त मंत्री का दावा

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नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे पांच करोड परिवारों  को वार्षिक 72 हजार रुपए देने के कांग्रेस के वायदे पर सोमवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी सरकार विभिन्न विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं के जरिए गरीबों को हर साल एक लाख से ज्यादा रुपए दे रही है। 

गरीबों पर 5.34 लाख रुपए सालाना खर्च कर रही है सरकार
जेटली ने फेसबुक पर लिखे अपने ब्लॉग और बाद में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कांग्रेस पार्टी को छोड़कर देश का कोई भी ऐसा राजनीतिक दल नहीं हैं जिसने देश को सात दशक से अधिक समय तक छला हो। इस पार्टी ने देशवासियों को कई नारे दिए लेकिन उन पर क्रियान्वयन के लिए बहुत कम संसाधन दिए। उन्होंने कहा कि 55 मंत्रालयों की विभिन्न योजनाओं के तहत कुल मिलाकर 1.8 लाख करोड़ रुपए की राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में हस्तातंरित की  जा रही हैं। इसके अतिरिक्त खाद्य सब्सिडी के तौर पर 1.84 लाख करोड़ रुपए दिए गए हैं। उर्वरक सब्सिडी के तौर पर 75 हजार करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं। किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत 75 हजार करोड़ रुपए, 50 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार के लिए 20 हजार करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन 5.34 लाख करोड़ रुपए के अतिरिक्त विभिन्न योजनाओं के माध्यम से भी गरीबों को हजार करोड़ रुपए दिए हैं। यदि इन 5.34 लाख करोड़ रुपए को 5 करोड़ परिवारों में बराबर बांट दिया जाए तो इस हिसाब से मोदी सरकार गरीबों को आवास, रसोई गैस, बिजली, स्वच्छता और कई अन्य सरकारी सामाजिक योजनाओं के तहत सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा की राशि दे रही है। यदि कांग्रेस की घोषणा को साधारण तरीके से समझना है तो पांच करोड़ परिवार को 72 हजार रुपए के हिसाब से कुल 3.6 करोड़ रुपए देने का वादा किया गया है जो मोदी सरकार द्वारा दी गई राशि का दो तिहाई है।  

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यूपीए सरकार ने घोषणाएं कीं लेकिन संसाधन नहीं दिए
जेटली ने कहा कि इंदिरा जी ने 1971 में गरीब हटाओ का नारा दिया था और उसके बाद पिछले 48 वर्षों में दो तिहाई समय तक उनकी पार्टी सत्ता में रही है। इसके बावजूद अभी भी गरीबी अभिशाप बनी हुई है। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने वर्ष 2004-14 के दौरान बहुत सी घोषणाएं की लेकिन उसे क्रियान्चित करने के लिए संसाधन नहीं दिए। एक मुश्त 70 हजार करोड़ रुपए की कृषि ऋण माफी की घोषणा की गई लेकिन इसके लिए मात्र 52 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया गया और उसमें से भी अधिकांश राशि दिल्ली के कारोबारियों के पास गई जिसका उल्लेख कैग की रिपोर्ट में भी है। इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मनरेगा की घोषणा की गई और इसके लिए सालाना 40 हजार करोड़ रुपए देने की बात की गई। इसके तहत 28 हजार करोड़ रुपए से लेकर 30 हजार करोड़ रुपए तक ही वास्तविक व्यय रहा है।  

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पहले भी गरीबी हटाने की बात कह चुकी है कांग्रेस


उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने न्यूनतम आय 12 हजार रुपए मासिक करने की घोषणा की जिसके तहत जिसकी आय छह हजार रुपए हैं उन्हें छह हजार रुपए की मासिक सब्सिडी दी जाएगी। यह घोषणा भी गरीबी हटाओ की घोषणा की तरह है जिसको न तो कभी इंदिराजी ने और न ही उनके पुत्र ने और न ही संप्रग सरकार ने पूरा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह से और गांधी परिवार ने विशेष रूप से गरीबी हटाओ के नारे के बाद से दो तिहाई समय देश पर शासन किया है। इस दौरान यदि यह गरीबी की समस्या का समाधान करने में विफल रहे हैं तो अब भारत उन पर क्यों विश्वास करें। उन्होंने कहा कि अभी इस योजना के बारे में  कैसे विश्वास किया जा सकता है। इस योजना में भी प्रत्यक्ष लाभ हंस्तातंरण (डीबीटी) से भुगतान करने की बात कही गई है। कांग्रेस पार्टी के आतंरिक अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस योजना से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। 

ऋण माफी का वादा पूरा नहीं कर रही कांग्रेस सरकार


वित्त मंत्री ने कहा कि पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, राजस्थान और कर्नाटक में कृषि ऋण माफी का वादा किया गया था और इनमें से अधिकांश राज्यों में इसे पूरा नहीं किया जा सका है। कांग्रेस में बगैर संसाधन के नारे देने का पुराना इतिहास रहा है। इसका धोखा देने का इतिहास है। कर्नाटक में अब तक किसान ऋण माफी के लिए मात्र 2600 करोड़ रुपए, मध्य प्रदेश में तीन हजार करोड़ रुपए और पंजाब में 5500 करोड़ रुपए दिए गए हैं। किसान अभी भी ऋण माफी की राह देख रहे हैं। जेटली ने कहा कि भूमिहीन और गरीबों को ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत भुगतान मिलता है। न्यूनतम दैनिक मजदूरी में 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। अभी देश के अधिकांश औद्योगिक कामगारों को मासिक 12 हजार रुपए से अधिक का वेतन मिल रहा है। सरकार ने सातवां वेतन आयोग के लागू होने के बाद न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपए है। छोटे और सीमांत किसानों को आवास, सड़क, शौचालय, बिजली, रसोई गैस सब्सिडी , फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य भुगतान के साथ ही आय सहायता भी दी गई है। 
 

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