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'मोदीकेयर' के ड्रॉफ्ट पर इस महीने होगी बात, 10 करोड़ परिवारों को मिलेगा 5 लाख का मेडिकल कवर

एनएचपीएस को लागू करने का खाका तैयार करने के लिए इस महीने फाइनेंस और हेल्‍थ मिनिस्‍ट्री की पहली मीटिंग होगी।

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नई दिल्‍ली. नेशनल हेल्‍थ प्रोटेक्‍शन स्‍कीम (एनएचपीएस) को लागू करने का खाका तैयार करने के लिए इस महीने फाइनेंस और हेल्‍थ मिनिस्‍ट्री की पहली मीटिंग होगी। इसमें यह भी तय किया जाएगा कि मेडिक्‍लेम का निपटारा बीमा कंपनी के जरिए हो या एक ट्रस्‍ट बनाकर किया जाए। 

 

एनएचपीएस को अमेरिका के ओबामाकेयर की तरह भारत में 'मोदीकेयर' के रूप में देखा जा रहा है। इस स्‍कीम के तहत, 10 करोड़ गरीब परिवारों को 5 लाख रुपए सालाना का मेडिक्‍लेम मिलेगा। इस पर करीब 12 हजार करोड़ तक सालाना खर्च होंगे। इसके लागू होने से भारत की करीब 40 फीसदी आबादी मेडिकल इन्‍श्‍योरेंस के दायरे में आ जाएगी। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बजट 2018-19 में इस स्‍कीम का एलान किया है। 

 

एक सीनियर अफसर ने बताया कि एनएचपीएस को ट्रस्‍ट आधारित मॉडल पर चलाया जाए या जनरल इन्‍श्‍योरेंस कंपनियों के जरिए ऑपरेट किया जाए, इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा। कुछ राज्‍य ट्रस्‍ट मॉडल पर पहले ही हेल्‍थकेयर स्‍कीम सफलतापूर्वक चला रहे हैं। इस मॉडल के तहत केंद्र और राज्‍य सरकारों के फंड से सरकार एक ट्रस्‍ट बना देगी। यह ट्रस्‍ट लाभर्थियों के हॉस्पिटल क्‍लेम का निपटान करेगा। 

 

हेल्‍थ मिनिस्‍ट्री तैयार करेगी ड्रॉफ्ट 

अफसर ने बताया कि हेल्‍थ मिनिस्‍ट्री इस स्‍कीम  का ड्रॉफ्ट तैयार करेगी। राज्‍यों के साथ परामर्श के बाद इसे 15 अगस्‍त या 2 अक्‍टूबर को लॉन्‍च किया जा सकता है। कुछ राज्‍य खास बीमारियों के लिए इस तरह की स्‍कीम चला रहे हैं। उनसे यह भी चर्चा होगी कि एनएचपीएस लागू होने के बाद वह अपनी मौजूदा स्‍कीम को कैसे ऑपरेट करेंगे। इन्‍हें मर्ज करने पर भी चर्चा हो सकती है। वहीं, केंद्र सरकार के स्‍तर पर राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना को एनएचपीएस के साथ शामिल कर लिया जाएगा। 
 

2000 करोड़ का शुरुआती आवंटन 

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में एनएचपीएस के लिए 2000 करोड़ रुपए का शुरुआती आवंटन किया है। इसके साथ ही स्‍कीम के लिए जरूरत पड़ने और फंड दिया जाएगा। सोशियो इकोनॉमिक कॉस्‍ट सेंसस के तहत वंचितों के तय मानकों के आधार पर 10 करोड़ लोगों को चिन्हित किया जाएगा। इंडिकेटर्स के आधार पर  बजट में करीब 10 करोड़ परिवार इस नई स्‍कीम के तहत आएंगे।  

 

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