Home » Economy » Policyसिक्किम रॉयल फैमिली वांग्‍चुक नामग्‍याल संन्‍यासी

पिता की चलती थी देश में हुकूमत, सबकुछ छोड़कर बेटा बन गया संन्‍यासी

सिक्किम रॉयल फैमिली के युवराज नामग्‍याल वांगचुक अब बौद्ध संन्‍यासी हो चुके हैं...

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नई दिल्‍ली। आजादी के समय भारत में सैकड़ों रॉयल फैमिली देश के अलग-अलग हिस्‍सों पर राज कर रहीं थी। आजादी के बाद इन सबका भारत में विलय हो गया। हालांकि समय बदलने के साथ ही बहुत सी रॉयल फैमिली ने अपना रुतबा बरकरार रखने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए।

 

- आजादी के बाद कुछ रॉयल फैमिली ने राजनीति का रुख किया। मध्‍य प्रदेश की सिंधिया और पंजाब में पटियाला रॉयल फैमिली का नाम इसमें लिया जा सकता है।
- कुछ ने अपनी बेशकीमती प्रॉपर्टी को होटल, बार, रेस्‍टोरेंट या मैरिज हॉल में बदल दिया। इसमें राजस्‍थान के रजवाड़ों का नाम सबसे आगे है।
- ऐसे तरीकों के चलते ही इन रॉयल फैमिली के वंशजों का रुतबा और लग्‍जरी लाइफ स्‍टाइल अब भी बरकार है।
- हालांकि हम जिस रॉयल के बारे में बता रहे हैं उसकी कहानी थोड़ी डिफरेंट है।
- उसके पिता की कभी हुकूमत चलती थी, लेकिन आज वह संन्‍यासी का जीवन जी रहा है। 
 
आगे पढ़ेें-   कभी सिक्किम के युवराज रहे वांग्‍चुक नामग्‍याल से 


 

मिलिए वांग्‍चुक नामग्‍याल से
 - वांग्‍चुक नामग्‍याल सिक्किम के आखिरी राजा पाल्‍डेन थोंडप के बेटे हैं।
- सिक्किम के भारत में विलय के समय वह वहां के युवराज हुआ करते थे।   
- उनके पिता की सिक्किम में हुकूमत चलती थी, लेकिन अब वह बौद्ध संन्‍यासी बन चुके हैं।
- वह सिक्किम, अरुणाचल, नेपाल और भूटान में फैले सैकड़ों बौद्ध मठों में ध्‍यान और साधना करते हैं।
- पुरानी हकूमत के नाम पर उनके पास बस यादें है और सामने आध्‍यात्‍म का एक बड़ा संसार।
 
आगे पढ़ें- सि‍क्किम में नामग्‍याल डाइनेस्‍टी् के बारे में....

 

 

ये है नामग्‍याल डाइनेस्‍टी 
- नामग्‍याल फैमिली ने 1642 से सिक्किम पर शासन करना शुरू किया था।
-  फुटसोंग नामग्‍याल इसके पहले शासक थे, वहीं पाल्‍डेन थोंडप नामग्‍याल इसके आखिरी शासक थे।
- 1975 में सिक्किम के भारत में विलय तक वह राजा के पद पर रहे। इसके बाद सिक्किम भारत का हिस्‍सा बन गया।
- पाल्‍डेन थोंडप नामग्‍याल की मौत 1982 में हुई। सिक्किम में राजा को चोग्‍याल कहा जाता है, इसका मतलब होता है, धर्मराज।
 
आगे पढ़ें- पिता की गद्दी गई तो 22 साल के थे वांग्‍चुक नामग्‍याल  

 

 

पिता की गद्दी गई तो 22 साल के थे वांग्‍चुक नामग्‍याल  
- सिक्किम का भारत में आधिकारिक विलय 1975 में हुआ।
- भारत के पक्ष में सिक्किम की जनता ने राजा पाल्‍डेन थोंडप नामग्‍याल के खिलाफ विद्रोह कर दिया।
-  इसके चलते भारत को वहां दखल देना पड़ा और संविधान संशोधन के जरिए सिक्किम भारत का एक राज्‍य बन गया।
- यह सब जब हो रहा था तब वांगचुक नामग्‍याल करीब 22 साल के थे। वह अपने पिता के दूसरे बेटे थे। 
- वह 1952 में पैदा हुए और अब करीब 64 साल के हो चुके हैं। 
- उनके बड़े भाई और एक बहन की हादसे में मौत हो गई थी। वह शाही परिवार के एक मात्र वारिस हैं।
 
आगे पढ़ें- वांग्‍चुक नामग्‍याल ने सबकुछ छोड़ दिया..... 

 

 

नामग्‍याल ने सबकुछ छोड़ दिया
 - रायल फैमिली से जुड़े लोग अक्‍सर इस फिराक में रहते हैं कि कैसे उनकी संपत्ति में और इजाफा हो।
- हालांकि वांग्‍चुक नामग्‍याल जब बड़े हुए तो उन्‍होंने सबकुछ छोड़ दिया।
- मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 35 साल पहले उन्‍होंने अपनी शाही पदवी ही छोड़ दी।
- इसके बाद वह बौद्ध संन्‍यासी हो गए।  वह आमतौर पर पब्लिक में कम दिखाई पढ़ते हैं।  
- वह पिछले 35 साल से सिर्फ ध्‍यान और साधना कर रहे हैं और यही उनके जीवन का सत्‍य है। 
 
आगे पढ़ें- पिता के 110 करोड़ रुपए के क्‍लेम पर भी नहीं जताया दावा

 

 

पिता के क्‍लेम पर भी नहीं जताया दावा
- नामग्‍याल फैमिली से जुड़े कुछ लोगों ने इलायची के कई बगीचों के मालिक हैं, जबकि कुछ के पास दुनिया भर के कई बड़ें होटलों में हिस्‍सेदारी है।
- हालांकि वांगचुग इन सबसे अलग हैं।
- यहां तक उन्‍होंने पिता के 110 करोड़ रुपए के क्‍लेम का मुकदमा भी छोड़ दिया जिसका दावा उनके पिता ने कभी भारत सरकार के खिलाफ ठोका था।
- उनके पिता ने यह दावा सिक्किम को भारत में मिलाने के हर्जाने के एवज में ठोका था। 

 

 

पैलेस में तो कई बार गए पर रात नहीं गुजारी
- वांग्‍चुक पिछले 35 सालों से संन्‍यासी का जीवन जी रहे हैं। इस दौरान गंगटोक स्थित उनके पैत्रिक महल में भी उनका आना जाना हुआ।
- हालांकि वहां उन्‍होंने कभी रात नहीं गुजारी। वह हमेशा मठ में ही सोते हैं और वहीं ध्‍यान साधना करते हैं।
- उन्‍हें कई बार नेपाल और भूटान की गुफआों में भी कठित योग साधना करने पाया गया है।  
- उन्‍होंने 1982 में अपने पिता की मौत के बाद घर छोड़ा था और फिर उन्‍होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 

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