सिंगल डिजिट इंक्रीमेंट से बचना चाहते हैं तो इन्हें अजमा कीजिए अपनी सैलरी में इजाफा

नोटबंदी के बाद बीते दो सालों से यदि आपकी सैलरी में कोई खास अंतर नहीं आया है तो अब आपके लिए नए मौके तलाशने की जरूरत है। एऑन के सर्वे में बताया गया है कि स्किल के हिसाब से कर्मचारी की सैलरी में बढ़ोतरी होगी। खास स्किल वाले हाई परफॉर्मेंस की सैलरी में 2.2 गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है। जबकि बाकी कर्मचारियों को सिंगल डिजिट इंक्रीमेंट से ही संतोष करना होगा।

money bhaskar

Mar 09,2019 02:37:00 PM IST

नई दिल्ली.
नोटबंदी के बाद बीते दो सालों से यदि आपकी सैलरी में कोई खास अंतर नहीं आया है तो अब आपके लिए नए मौके तलाशने की जरूरत है। एऑन के सर्वे में बताया गया है कि स्किल के हिसाब से कर्मचारी की सैलरी में बढ़ोतरी होगी। खास स्किल वाले हाई परफॉर्मेंस की सैलरी में 2.2 गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है। जबकि बाकी कर्मचारियों को सिंगल डिजिट इंक्रीमेंट से ही संतोष करना होगा। हालांकि इसमें बीते साल के मुकाबले मामूली बढ़त देखने काे मिल सकती है। एऑन सैलरी इंक्रीज सर्वे में दावा किया गया है कि 2019 में ‌एवरेज सैलरी इंक्रीमेंट 9.7 फीसदी होगा, जो पिछले साल 9.5 फीसदी था।

इन सेक्टरों में अच्छे दिन

सर्वे में बताया गया है कि सबसे अधिक इंक्रीमेंट डेटा ऐनालिटिक्स, डिजिटल, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐंड मशीन लर्निंग और सायबर सिक्यॉरिटी प्रफेशनल्स को मिलेगा। कन्ज्यूमर इंटरनेट, प्रोफेशनल सर्विसेज, फाइनैंशल इंस्टीट्यूशंस, हाई-टेक और आईटीईएस सेक्टर हाई परफॉर्मर्स के लिए सबसे अच्छे रहेंगे। कन्ज्यूमर इंटरनेट, प्रोफेशनल सर्विसेज, लाइफ साइंसेज, ऑटोमोटिव और कन्ज्यूमर प्रॉडक्ट्स सेक्टर में सैलरी में दोहरे अंकों में बढ़ोतरी हो सकती है। इस सर्वे में 20 से अधिक सेक्टर की 1,000 से अधिक कंपनियों के डेटा का विश्लेषण किया गया। इनमें से 16 सेक्टरों की अधिकांश कंपनियों ने बताया कि वो पिछले साल के बराबर ही इंक्रीमेंट देंगी। लाइफ साइंसेज, केमिकल, एनर्जी, इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरिंग, मेटल, इंजीनियरिंग डिजाइन, हाई-टेक, रिटेल और फाइनैंशल इंस्टीट्यूशंस ने पिछले साल की तुलना में इस साल इंक्रीमेंट का अधिक बजट रखा है। कंपनियों को आने वाले समय में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। उनका कहना है कि कम महंगाई दर के बीच उन्हें डिमांड में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

चुनाव का भी पड़ सकता है असर

एऑन में इमर्जिंग मार्केट्स के हेड आनंदोरूप घोष ने बताया कि जो कंपनियां जून से जुलाई का अप्रेजल साइकल फॉलो करती हैं, उनमें इंक्रीमेंट पर लोकसभा चुनाव का असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि एशियाई देशों में भारत में पिछले 10 साल से सबसे अधिक इंक्रीमेंट होता आया है और इस ट्रेंड के आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, सभी सेक्टर्स में अप्रेजल में काफी सख्ती की जा रही है। 2018 में सिर्फ 7.8 फीसदी कर्मचारियों को कंपनियों ने टॉप परफॉर्मर कैटिगरी में रखा था।

सर्विस सेक्टर में सैलरी हाइक का फासला कम हुआ

मैन्युफैक्चिरिंग और सर्विसेज सेक्टर के बीच सैलरी हाइक का फासला भी कम हो रहा है। दोनों का अंतर घटकर औसतन 1 पर्सेंट रह गया है। वर्ष 2017 के बाद से सैलरी इंक्रीमेंट 10 पर्सेंट से नीचे
रहा है। इससे पहले 2007 से 2016 (2009 में सिर्फ 6.6 पर्सेंट) के बीच इंक्रीमेंट में दोहरे अंकों में बढ़ोतरी हुई थी।

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