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Home » Economy » PolicyESIC Corporation took important decision towards improvement in its service delivery mechanism

ESIC के तहत आने वाली 13 करोड़ 32 लाख आबादी के लाभ के लिए सरकार ने किए बदलाव, 15 फरवरी से मान्य हो गए नए फैसले

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया फैसला

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नई दिल्ली। केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), संतोष कुमार गंगवार की अध्यक्षता में हाल ही में हुई ईएसआई कॉरपोरेशन की 177 वीं बैठक के दौरान ईएसआईसी की सेवा वितरण प्रक्रिया में सुधार लाने की दिशा में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

 

इन निर्णयों में, ईएसआई के अंशदान की दर में कमी, बीमा धारक व्यक्ति पर आश्रित माता-पिता को चिकित्सा का लाभ प्रदान करने के लिए के लिए आय की सीमा में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव, ईएसआई योजना की पूर्ण लागत को प्रति आईपी व्यय की निर्धारित सीमा में ईएसआईसी द्वारा वहन किया जाना, विशाखापत्तनम के शीलानगर में 500 बेड वाले ईएसआईसी मॉडल अस्पताल की स्थापना, 30 बेड वाले ईएसआई अस्पताल में ईएसआई डिस्पेंसरी का उन्नतीकरण, पीडीबी/ डीबी की दरों में वृद्धि की मात्रा तय करने के लिए उप-समिति का गठन और डॉट और डीएमआरटी पाठ्यक्रमों की शुरुआत शामिल है।

 

ये हैं महत्वपूर्ण निर्णय

 

इस बैठक में यह बताया गया कि सरकार ने नियोक्ताओं के अंशदान की दर में 4.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत और कर्मचारियों द्वारा दिए जा रहे अंशदान में 1.75 प्रतिशत से 1 प्रतिशत तक कटौती करने की मंजूरी प्रदान की है और सरकार द्वारा योगदान की दरों में कटौती करने के लिए एक मसौदा अधिसूचना दिनांक 15.02.2019 को जारी कर दिया गया है। अंशदान में कमी आने से ईएसआई योजना के अंतर्गत आने वाले सभी कर्मचारियों और नियोक्ताओं को लाभ मिलेगा।

ईएसआई योजना के अंतर्गत कवर किए जा रहे बीमा धारक व्यक्ति के आश्रित माता-पिता के लिए चिकित्सा लाभ प्रदान करने के लिए आय की सीमा को 5000/- रूप प्रति माह से बढ़ाकर मौजूदा सभी स्रोतों से 9000/- रूपया प्रति माह कर दिया गया है।

 ईएसआई योजना की पूरी लागत का वहन करेगा

 

राज्यों में चिकित्सा सेवा वितरण में सुधार लाने के लिए, यह निर्णय लिया गया कि ईएसआईसी खर्च के 1/8 वां हिस्सा का भी वहन करेगा जो कि पहले राज्यों द्वारा वहन किया जाता था। अब तक, ईसआईसी द्वारा ईएसआई स्कीम के खर्च का 7/8 वां हिस्सा वहन किया जा रहा था।

इस निर्णय के साथ ही, ईएसआईसी 2019-20 से शुरू होने वाली प्रति आईपी खर्च की निर्धारित सीमा में, तीन वर्षों की अवधि के लिए, ईएसआई योजना की पूरी लागत का वहन करेगा।

ईएसआईसी द्वारा, विशाखापत्तनम के शीलानगर में पहले से ही आवंटित 8.58 एकड़ भूमि के अलावा 10.56 एकड़ अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इस भूमि पर, 500 बेड वाले ईएसआईसी मॉडल अस्पताल का निर्माण सुपर स्पेशिएलिटी सुविधाओं के साथ किया जाएगा।

आंतरिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में अंतर को कम करने के लिए, 30 बेड वाले ईएसआई अस्पताल में ईएसआई डिस्पेंसरी के उन्नतिकरण की नीति पर पुनर्विचार करने के लिए उप-समिति की रिपोर्ट को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की गई।

 

 अब, 30 बेड वाले ईएसआई अस्पताल की स्थापना, सामान्य क्षेत्रों में 20,000 आईपी आबादी पर और पहाड़ी क्षेत्रों में 15,000 आईपी आबादी पर की जाएगी। इससे पहले, ईएसआईसी केवल ऐसे ही क्षेत्रों में अस्पताल की स्थापना कर रहा था, जहां पर न्यूनतम आईपी आबादी 50,000 है। इस निर्णय द्वारा ईएसआई योजना के अंतर्गत कम सेवा वाले कई क्षेत्रों में आईपी/ लाभार्थियों को आंतरिक सुविधाएं प्रदान किया जाएगा।

मुद्रास्फीति के प्रभाव का सामना करने के लिए, ईएसआईसी समय-समय पर पीडीबी और डीबी भुगतान की बुनियादी दरों को बढ़ाता रहा है। मुद्रास्फीति की क्षतिपूर्ति के लिए, पीडीबी/ डीबी दरों में वृद्धि की पद्धति और मात्रा पर निर्णय लेने के लिए ईएसआईसी की एक उप-समिति का गठन किया गया है।

 

पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की शुरूआत

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि ईएसआईसी, गुलबर्गा में अपने अस्पताल और कॉलेज परिसर में डिप्लोमा इन ओटी टेक्नोलॉजी (डीओटीटी) और डिप्लोमा इन मेडिकल रिकॉर्ड्स टेक्नोलॉजी (डीएमआरटी) के पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की शुरूआत करेगा। स्किल इंडिया मिशन के अनुरूप, यह पाठ्यक्रम प्रशिक्षित पैरामेडिकल श्रमशक्ति की उपलब्धता में अंतर को कम करने में मदद करेंगे।

 

 

 

 

बैठक में ये लोग थे शाामिल

 

उपरोक्त मामलों के अलावा, बीमा धारक व्यक्तियों और उनके लाभार्थियों और अन्य प्रशासनिक मामलों में सेवाओं/ लाभों में सुधार लाने से संबंधित लगभग 40 अन्य कार्य-सूची विषयों को सुनियोजित रूप से लाया गया और बैठक के दौरान उनका अनुमोदन किया गया।

इस बैठक में शामिल होने वाले अन्य गणमान्य व्यक्तियों में हीरा लाल सामरिया, सचिव, श्रम और रोजगार, राज कुमार, महानिदेशक, ईएसआईसी, अनुराधा प्रसाद, अतरिक्त सचिव, श्रम और रोजगार, श्रीमती शिवानी स्वैन, अतरिक्त सचिव और एफए, श्रम और रोजगार, और संध्या शुक्ला, आईए और एएस, वित्तीय आयुक्त, ईएसआईसी, कर्मचारियों और नियोक्ताओं के प्रतिनिधि, ईएसआई कॉरपोरेशन के सदस्य, राज्य सरकारों और ईएसआईसी के प्रतिनिधि प्रमुख रूप से थे।

 

 

योजना के अंगर्तग आने वाले लाभार्थी की कुल आबादी 13 करोड़ 32 लाख है

कर्मचारी राज्य बीमा निगम, सामाजिक सुरक्षा का एक अग्रणी संगठन है जो कि रोजगार के दौरान होने वाली चोट, बीमारी, मृत्यु इत्यादि जैसे समय में उचित चिकित्सा देखभाल और नकद लाभ का एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है। ईएसआई अधिनियम उन परिसरों/ उपसर्गों पर लागू होता है जहां पर 10 या इससे अधिक व्यक्ति कार्यरत हैं। ईएसआई अधिनियम के अंतर्गत, 21,000/- रूपया प्रति महीना तक कमाने वाले कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा कवर और अन्य लाभों के हकदार हैं। यह अधिनियम अब देश भर में 10 लाख 33 हजार कारखानों और प्रतिष्ठानों पर लागू हो चुका है, जिससे श्रमिकों के लगभग 3 करोड़ 43 लाख परिवारों को लाभ प्राप्त हो रहा है। अब तक, ईएसआई योजना के अंगर्तग आने वाले लाभार्थी की कुल आबादी 13 करोड़ 32 लाख से अधिक है। 1952 में हुई अपनी स्थापना के बाद से लेकर अब तक, ईएसआई कॉर्पोरेशन ने 154 अस्पतालों, 1489 डिस्पेंसरियों, 174 आईएसएम यूनिटों, 815 शाखाओं/ वेतन कार्यालयों और 63 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों को स्थापित किया है।

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