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INX, एयरसेल केस: ED वित्‍त मंत्रालय के 4 पूर्व अफसरों से करेगा पूछताछ, चिदंबरम तक पहुंची जांच

एयरसेल मैक्सिस और आईएनएक्‍स मीडिया में विदेशी निवेश को मंजूरी मामले की जांच पूर्व वित्‍त मंत्री पी. चिदंबरम तक पहुंच गई

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नई दिल्‍ली. एयरसेल मैक्सिस और आईएनएक्‍स मीडिया में विदेशी निवेश को मंजूरी मामले की जांच पूर्व वित्‍त मंत्री पी. चिदंबरम तक पहुंच गई है। इनमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) वित्‍त मंत्रालय के चार पूर्व सीनियर अफसरों से पूछताछ के लिए समन जारी किया है। ये चारों अफसर यूपीए सरकार के दौरान फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) के मेम्‍बर रहे। एफआईपीबी को कथित तौर पर प्रभावित करने के आरोप में कार्ति से अभी न्यायिक हिरासत में पूछताछ चल रही है। इस बीच, मंगलवार को सीबीआई कार्ति की हिरासत की अवधि बढ़ाने की मांग कर सकती है। 

 

 

एफआईपीबी को पिछले साल भंग कर दिया गया था। आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव इसके प्रमुख हुआ करते थे। एफआईपीबी में डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी ऐंड प्रमोशन (डीआईपीपी), कॉमर्स और विदेश मंत्रालयों का भी प्रतिनिधित्व हुआ करता था। जांच एजेंसी आईएनएक्‍स मीडिया के प्रमोटर पीटर मुखर्जी से मंगलवार को पूछताछ करने वाली है। इसमें यह आरोप है कि आईएनएम्‍स मीडिया ने कार्ति चिदंबरम को भुगतान किया है। कार्ति पूर्व वित्‍त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे हैं। वह एयरसेल-मैक्सिस और आईएनएक्‍स मीडिया केस, दोनों ही मामलों में आरोपी हैं। 

 

जिन पूर्व सीनियर एफआईपीबी अफसरों पूछताछ होगी, उनमें सेक्रेटरी, एडिशनल सेक्रेटरी, डिप्‍टी सेक्रेटरी और अंडर सेक्रेटरी स्‍तर के अफसर शामिल हैं। ये एफआईपीबी में दोनों ही मामलों से जुड़ी फाइल की जांच के लिए जिम्‍मेदार थे। 

 

एक सीनियर ईडी अफसर ने बताया कि इन अधिकारियों से एकबार पहले भी पूछताछ हो चुकी है और उनके बयान रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। इन दोनों ही मामलों की जांच में सामने आए कुछ नए तथ्‍यों को देखते हुए इन्‍हें पूछताछ के लिए दोबारा समन जारी किया गया है। सूत्रों के अनुसार, रोचक बात यह है कि उस वक्‍त सेक्रेटरी स्‍त्‍र के अफसर, जो एफडीआई प्रपोजल की मंजूरी के लिए जिम्‍मेदार था, ने कहा कि उसने फाइलों पर दस्‍तखत करने से पहले उन्‍हें पढ़ा नहीं था। 


28 फरवरी को कार्ति हुए थे गिरफ्तार 

कार्ति चिदंबरम को सीबीआई ने ईडी की जांच के आधार पर 28 फरवरी को गिरफ्तार किया था। साथ ही पीटर मुखर्जी और उनकी पत्‍नी इंद्राणी मुखर्जी के बयान दर्ज किए थे, जिन्‍होंने कार्ति को 7 लाख डॉलर (करीब 3.10 करोड़ रुपए) का भुगतान एफआईपीबी में विदेशी निवेश के अप्रूवल को मैनेज करने के लिए किया था। बयान के अनुसार, कार्ति की कंपनी एडवांटेज स्‍ट्रैटजिक कंसल्‍टिंग प्राइवेट लिमिटेड (एएससीपीएल) मुखर्जी के एफआईपीबी मामलों की  औपचारिकताओं को पूरी कराने की जिम्‍मेदारी संभाल रही थी। एएससीपीएल और उसकी एसोसिएटेड कंपनियों ने उस समय करीब 7 लाख डॉलर के चार इनवायस बनाए थे, जो कि अब ईडी द्वारा जब्‍त किए जा चुके हैं। 

 

FIR में नहीं है पी. चिदंबरम का नाम 

यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी. चिदंबरम का नाम सीबीआई की एफआईआर में नहीं है, लेकिन जांच एजेंसी ने कहा है कि वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने तब विदेशी निवेश के प्रस्ताव को मंजूरी देने में पक्षपात किया था। अडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के चार ‘मालिकों’ से भी कुछ पेमेंट्स के बारे में पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसियों को शक है कि यह पैसा एफआईपीबी क्लियरेंस को मैनेज करने के लिए कार्ति को दिया गया था। 

 

कार्ति पहुंचे सुप्रीम कोर्ट 

आईएनएक्स (INX) मीडिया मामले में कार्ति चिदंबरम राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति ने ईडी के समन को रद्द करने की मांग को लेकर याचिका दायर की है। इसके अलावा याचिका में ईडी को जांच से रोकने के लिए भी अपील की गई है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में मंगलवार को सुनवाई करेगा।
 

 

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