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अब गोबर जमा करके कमा सकते हैं पैसे, कीमत 671 रुपए प्रति टन

दिल्ली का पहला बॅायोगैस प्लांट प्रोजेक्ट को मिली हरी झंडी

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अगर आप डेयरी चला रहें हैं तो अब आपको गोबर के बदले पैसे मिलेंगे। गोबर से आप अच्छी खासी रकम कमा सकते हैं। गोबर से पैसे कमाने का यह मौका नार्थ एमसीडी, दिल्ली दे रही है। दरअसल, नार्थ एमसीडी की प्रोजक्ट बायोगैस प्लांट को हरी झंडी मिल गई है। भलस्वा में 3 एकड़ एरिया में दिल्ली का पहला बॅायोगैस प्लांट बनाया जाएगा। यहां रोजाना करीब 200 टन गोबर को बायोगैस के रूप में प्रोसेस किया जाएगा। इस प्लांट के लिए गोबर उपलब्ध कराने वाले डेयरी मालिकों को गोबर की कीमत प्लांट संचालन करने वाली कंपनी देगी।

नई दिल्ली। अगर आप डेयरी चला रहे हैं तो आपको गोबर के बदले पैसे मिलेंगे। गोबर से आप अच्छी खासी रकम कमा सकते हैं। गोबर से पैसे कमाने का यह मौका दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) दे रहा है। नार्थ एमसीडी की बायोगैस प्लांट परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। इस प्लांट को चलाने के लिए भारी मात्रा में गोबर की जरूरत होगी। भलस्वा में 3 एकड़ एरिया में दिल्ली का पहला बॅायोगैस प्लांट बनाया जाएगा। यहां रोजाना करीब 200 टन गोबर को बायोगैस के रूप में प्रोसेस किया जाएगा। इस प्लांट के लिए गोबर उपलब्ध कराने वाले डेयरी मालिकों को गोबर की कीमत प्लांट संचालन करने वाली कंपनी देगी।

 

ऐसे मिलेगी गोबर के बदले रकम

स्टैडिंग कमेटी के चेयरमैन वीना विरमानी का कहना है कि प्लांट में गोबर उपलब्ध कराने वाले डेरी मालिकों को 671 रुपए/टन के हिसाब से प्लांट चलाने वाली कंपनी भुगतान करेगी। स्टैडिंग कमेटी चेयरमैन का मानना है दिल्ली के बाहरी इलाकों में कई ऐसी डेरियां हैं जो अवैध रूप से चलाई जाती है। यह सुविधा सिर्फ उन्हीं डेयरी मालिकों को दी जाएगी जिनके पास डेयरी बिजनेस का लाइसेंस मिला हुआ है।

 

गंदगी की समस्या होगी दूर 

डेरी मालिक गोबर को नालों में डाल देते हैं। इससे कई इलाकों में नाले ब्लाॅकेज होने की समस्या आती है। नाला जाम होने के चलते बरसात में जलभराव जैसी समस्या आम हो जाती है। यह देखा गया है कि जिन इलाकों में डेरियां हैं वहां गंदगी की समस्या अधिक है। इसे देखते हुए एमसीडी ने कुछ साल पहले बायोगैस प्लांट बनाने का प्लान तैयार किया था, जिसे अब मंजूरी दी गई है।

पिछले कुछ वर्षों में गोबर से बॉयो सीएनजी भी बनाई जाने लगी है। बॉयो सीएनजी को गाय भैंस समेत दूसरे पशुओं के गोबर के अलावा सड़ी-गली सब्जियों और फलों से भी बना सकते हैं। ये प्लांट गोबर गैस की तर्ज पर ही काम करता है, लेकिन प्लांट से निकली गैस को बॉयो सीएनजी बनाने के लिए अलग से मशीनें लगाई जाती हैं, जिसमें थोड़ी लागत तो लगती है लेकिन ये आज के समय को देखते हुए बड़ा और कमाई देने वाला कारोबार है। महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा में ऐसे कई प्लांट चल रहे हैं, लेकिन अब उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक बड़ा व्यसायिक प्लांट शुरू हो गया है।

 

 

 

 

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