नोटबंदी का उद्देश्य नोट को जब्त करना नहीं बल्कि उसे अर्थव्यवस्था में लाना थाः जेटली

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भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी के दो साल पूरा होने के मौके पर गुरुवार को कहा कि नोटबंदी का उद्देश्य नोट को जब्त करना नहीं था बल्कि इन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने के साथ इसे रखने वालों से टैक्स की वसूली करना था। उन्होंने कहा कि जिन्हें नोटबंदी की आधी-अधूरी जानकारी है वे इस बात की आलोचना करते हैं कि नोटबंदी से सारी नकदी बैंक में जमा हो गई।

Money Bhaskar

Nov 08,2018 02:16:00 PM IST

नई दिल्ली। भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी के दो साल पूरा होने के मौके पर गुरुवार को कहा कि नोटबंदी का उद्देश्य नोट को जब्त करना नहीं था बल्कि इन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने के साथ इसे रखने वालों से टैक्स की वसूली करना था। उन्होंने कहा कि जिन्हें नोटबंदी की आधी-अधूरी जानकारी है वे इस बात की आलोचना करते हैं कि नोटबंदी से सारी नकदी बैंक में जमा हो गई। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से देश को कई प्रकार के फायदे हुए। इनमें डिजिटाइजेशन से लेकर हर प्रकार के टैक्स से होने वाली आय में बढ़ोतरी शामिल है। 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की ऐतिहासिक घोषणा की थी। जेटली ने अपने बयान में कहा है कि नोटबंदी से देश को कई फायदे हुए। आइए जानते हैं क्या कहा जेटली ने-

प्रत्यक्ष कर पर असर

जेटली ने कहा कि नोटबंदी का असर आयकर पर हुआ। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 में (31 अक्टूबर तक) आयकर के कलेक्शन में पिछले विर्ष की समान अवधि के मुकाबले 20.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यहां तक कि कारपोरेट टैक्स में इस दौरान 19.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। जेटली ने कहा कि नोटबंदी के पहले के दो साल में प्रत्यक्ष कर की वसूली में क्रमशः 6.6 एवं 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। लेकिन नोटबंदी के बाद के दो साल में यह बढ़ोतरी दर क्रमशः 14.6 फीसदी एवं 18 फीसदी हो गई। उन्होंने कहा कि वैसे ही 2017-18 में 6.86 करोड़ रिटर्न फाइल किए गए जो कि इससे पहले के वित्त वर्ष के मुकाबले 25 फीसदी अधिक थे। जेटली ने बताया कि मई, 2014 में जब वर्तमान सरकार बनी थी तो आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या 3.8 करोड़ थी जो वर्तमान में 6.86 करोड़ हो गई।


अगली स्लाइड में पढ़ें नोटबंदी का अप्रत्यक्ष कर पर असर के बारे में

अप्रत्यक्ष कर पर असर

जेटली ने गुरुवार को कहा कि नोटबंदी एवं जीएसटी के लागू होने से नकदी पर काफी लगाम लगी। इससे डिजिटल ट्रांजेक्शन में इजाफा देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इसका फर्क यह हुआ कि जीएसटी से पहले अप्रत्यक्ष कर देने वाले 64 लाख लोग थे जो जीएसटी के बाद के काल में 1.2 करोड़ हो गए। वस्तु व सेवा की खपत के उचित रिकार्ड होने से टैक्स नेट में बढ़ोतरी हुई। इससे अप्रत्यक्ष कर को प्रोत्साहन मिला। इससे राज्य एवं केंद्र दोनों को फायदा हुआ। इस कारण अब कारोबारियों को अपने बिजनेस टर्नअोवर का सही खुलासा करना पड़ रहा है जिससे अप्रत्यक्ष कर पर असर देखने को मिला, वहीं इससे प्रत्यक्ष कर की बढ़ोतरी में भी मदद मिली। वित्त वर्ष 2014-15 में जीडीपी में अप्रत्यक्ष कर का औसत योगदान 4.4 फीसदी था जो जीएसटी लागू होने के बाद 5.4 फीसदी हो गया।

आगे पढ़ें डिजिटल पेमेंट में तेजी में तेजी के बारे में

डिजिटल पेमेंट में तेजी

जेटली ने कहा कि नोटबंदी के बाद से डिजिटल भुगतान में काफी उछाल आई है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर, 2016 के दौरान यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से 0.5 अरब रुपए का ट्रांजेक्शन किया गया जो सितंबर, 2018 में बढ़कर 598 अरब रुपए के स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने बताया कि भारत इंटरफेस फॉर मनी (भीम) ऐप को तत्काल भुगतान के लिए एनपीसीआई द्वारा विकसित किया गया था जिसे फिलहाल 1.25 करोड़ लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। सितंबर, 2016 में भीम द्वारा सिर्फ 0.02 अरब रुपए का ट्रांजेक्शन किया गया जो सितंबर, 2018 में बढ़कर 70.6 अरब रुपए रहा।

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