Home » Economy » Policyकांग्रेस बोली- लोकतंत्र खतरें में : Internal matter of judiciary says govt sources on PC by 4 SC judges

SC जजों की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस: सरकार नहीं देगी दखल- सोर्सेज, कांग्रेस बोली- लोकतंत्र खतरे में

सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों की ओर से की गई प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के बाद कांग्रेस पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र खतरे में हैं

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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों की ओर से की गई प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के बाद कांग्रेस पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र खतरे में हैं। कांग्रेस के ऑफिशियल ट्वीटर हैंडल से ट्वीट किया गया, सुप्रीम कोर्ट की कार्यशैली पर जजों की ओर से उठाए गए सवालों को सुनकर हम बहुत चिंतित हैं। लोकतंत्र खतरे में है। दूसरी ओर, सरकार इस मामले से दूसरी बनाए रख सकती है। सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, जजों की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस न्‍यायपालिका का आंतरिक मामला है। उन्‍होंने संकेत दिए किए कि सरकार का इसमें दखल देने का इरादा नहीं है। 


बता दें, सुप्रीम कोर्ट के चार जज जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेस कर सुप्रीम कोर्ट की कार्यशैली पर सवाल उठाए। इन्‍होंने कहा कि कोर्ट में सबकुछ ठीक नहीं है। भारत में सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब एक्टिंग जजों ने मीडिया से सीधे तौर पर बात की है। 


सरकार नहीं देखी दखल- सूत्र 

सूत्रों का कहना है कि सरकार को इस मामले में कुछ नहीं कहना है और न ही इसमें हस्‍तक्षेप करने का कोई इरादा है। यह न्‍यायपालिका का  इंटरनल मामला है। हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि शीर्ष अदालत इन मामलों का जितनी जल्‍दी हो समाधान कर ले। जिससे कि लोगों को भरोसा न्‍याय व्‍यवस्‍था में बना रहे। 

 

क्‍या बोले कानून के जानकार? 

 

शीर्ष कोर्ट के चार जजों की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस पर सुप्रीम कोर्ट के वकील केटीएस तुलसी ने कहा, कई परिस्थितियां ऐसी घटित हुईं कि कोर्ट के सीनियर जजों को ये कदम उठाना पड़ा। जब जज अपनी बातें रख रहे थे उनके चेहरे पर दर्द साफ दिख रहा था। हम मांगों को अनसुना किए जाने की बातों का समर्थन नहीं करते, लेकिन इस तरह के मामले सुप्रीम कोर्ट की छवि पर सवाल खड़े करते हैं।
   
पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा, ये बेहद दुखद है कि देश के सीनियर जजों को मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखनी पड़ रही है।

 

वकील प्रशांत भूषण ने कहा, ये बात सामने आने से चीफ जस्टिस पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। किसी को सामने आने की जरूरत थी जो चीफ जस्टिस की पावर के हो रहे गलत इस्तेमाल का खुलासा कर सके।  
 

सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा, मेरा मानना है कि यह एक ऐतिहासिक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस है। यह बहुत अच्‍छा हुआ। मेरा मानना है, हम भारत के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि न्‍यायपालिका में क्‍या चल रहा है और मैं इसका स्‍वागत करती हूं। 


भाजपा के सीनियर लीडर सुब्रमण्य‍म स्वामी भी जजों के पक्ष में खड़े दिखे। स्वामी ने कहा, वे जजों के इस फैसले की आलोचना नहीं करेंगे। हम सभी जजों का सम्मान करते हैं और अपेक्षा की जाती है कि पूरा सुप्रीम कोर्ट एक विचारधारा पर राजी हो।

 

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