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दिवाली पर पंजीरी लड्डू कीजिए गिफ्ट, कीमत सिर्फ 480 रुपए किलो

मिलावट की वजह से मिठाई कारोबार की मिठास फीकी, पंजीरी लड्डू लोगों की पसंद

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नई दिल्ली। मिठाईयों की मिठास के बिना दिवाली का त्योहार फीका है। दिवाली पर एकाएक मांग बढ़ने से मिठाईयों की सप्लाई बढ़ जाती है लेकिन बीते कुछ सालों मिलावट की खबरों की वजह से लोगों ने मिठाई खाने से किनारा करने लगे हैं। लेकिन आज भी कई ऐसी मिठाई दुकानें हैं जो अपनी विश्वनियता की वजह से लोगों का भरोसा बरकरार रखे हुए है। हम बात कर रहें हैं बीकानेरवाला की। अगर आप भी मिठाई खरीदने जा रहे हैं तो हम आपको बता दें कि इस सीजन पंजीरी लड्डू की मांग बढ़ी है। नोएडा सेक्टर-18 स्थित बीकानेरवाला के आेनर पंचदेव ने Moneybhaskar को बताया, ‘इस सीजन सबसे अधिक पंजीरी लड्डू की मांग है। यह 480 रुपए किलो मिल रहा है। वहीं इस फेस्टिवल पिस्ता बर्फी खाना महंगा पड़ेगा।’

वे कहते हैं, पिछले सीजन के मुकाबले इस बार मिठाई का कारोबार फीका है। ज्यादातर लोग ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी कर रहे हैं।

 

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पंजीरी लड्डू क्या है

यह ड्राई फ्रूट्स से तैयार किया जाता है। पांच तरह के ड्राई फ्रूट्स का इस्तेमाल कर इसे बनाया जाता है इसलिए इसे पंजीरी लड्डू कहते हैं। इसमें मावा सिर्फ 5-7 फीसदी ही होता है और ड्राई फ्रूट्स होने की वजह से यह सेहत के लिए लाभदायक होता है। यही वजह है कि पंजीरी लड्डू की मांग बढ़ी है। इसमें मिलावट का खतरा भी नहीं है।

 

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काजू बर्फी 819 रुपये किलो मिल रहा है, काजू केसरी 1040 रुपए किलो, रसगुल्ला 10 रुपये/पीस, मूंगदाल की बर्फी 440 रुपये किलो, मोतीचूर के लड्डू 450 रुपये, खोया बर्फी 520 रुपये/किलो मिल रहा है। वहीं इस साल सबसे महंगा पिस्ता बर्फी है। एक किलो पिस्ता बर्फी के लिए 2,000 रुपये खर्च करने पड़ेंगे जो कि पिछले साल 1800 रुपये/किलो मिल रहा था।

 

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कैसे पहचानें मिठाई असली है या नकली

पंचदेव बताते हैं कि मिलावटी या नकली मावे का स्वाद व रंग सामान्य से अलग होता है। मिलावटी मावे को उंगलियों में लेकर रगड़ने पर उसमें चिकनापन नहीं है, तो समझ जाएं कि वह नकली है। उन्होंने बताया कि मिलावटी मावा बनाने के लिए दूध की बजाए रसायन, आलू, शक्करकंद, रिफाइंड आदि का इस्तेमाल किया जाता है। सिंथेटिक दूध बनाने के लिए पानी में डिटर्जेंट पाउडर, तरल जेल और चिकनाहट लाने के लिए रिफाइंड व मोबिल ऑयल एवं एसेंस पाउडर का प्रयोग किया जाता है।

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