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दिसंबर तिमाही में 7% रह सकती है भारत की GDP ग्रोथ रेट: रिपोर्ट

भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ रेट दिसंबर तिमाही में 7 फीसदी रह सकती है।

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नई दिल्‍ली. भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ रेट दिसंबर तिमाही में 7 फीसदी रह सकती है। ग्‍लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी मार्गन स्‍टैलनली ने एक रिपोर्ट में यह उम्‍मीद जताई है। फर्म का कहना है कि इस तिमाही में GDP ग्रोथ में तेजी आने की संभावना है। जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.3 फीसदी रही थी। जबकि जून र्क्‍वाटर में यह 5.7 फीसदी के स्‍तर पर थी। बता दें, 28 फरवरी को तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े आने हैं। 

 

इंडस्‍ट्री और सर्विस सेक्‍टर में तेजी की उम्मीद 

मार्गन स्‍टैनली की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, इंडस्‍ट्री और सर्विसेस सेक्‍टर में ग्रोथ के रफ्तार पकड़ने की उम्‍मीद है। जबकि, एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर की ग्रोथ रेट घट सकती है। रिपोर्ट का कहना है, हम दिसंबर 2017 तिमाही में इकोनॉमिक रिकवरी के रफ्तार पकड़ने और सालाना आधार पर जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी पहुंचने की उम्‍मीद कर रहे हैं। जोकि सितंबर तिमाही के 6.3 फीसदी से ज्‍यादा है। GVA टर्म में दिसंबर तिमाही में  ग्रोथ रेट सालाना आधार पर 6.7 फीसदी रह सकती है, जोकि इससे पिछली तिमाही में 6.1 फीसदी थी। 

 

कॉरपोरेट रेवेन्‍यू में दिखेगा सुधार 

रिपोर्ट के अनुसार, कॉरपोरेट रेवेन्‍यू ट्रेंड्स में भी दिसंबर तिमाही के दौरान सुधार दिखाई दे सकता है। कॉरपोरेट रेवेन्‍यू ट्रेंड इंडस्‍ट्री की जीवीए ग्रोथ को गहराई से ट्रैक करता है। इसके अलावा, ऑटो और टू-व्‍हीलर्स की बिक्री में भी दिसंबर तिमाही में तेजी दिखाई पड़ सकती है। इस पर बेस इफैक्‍ट का असर नहीं होगा। वहीं, सामानों का एक्‍सपोर्ट भी डबल डिजिट के लेवल पर पहुंच सकता है। 

 

चौथी तिमाही में बढ़ सकती हैं ब्‍याज दरें 

मार्गन स्‍टैनली ने अपनी एक रिपोर्ट में यह भी कहा है कि आरबीआई फाइनेंशियल ईयर 2018 की चौथी तिमाही में ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला ले सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले दिनों में देश में महंगाई बढ़ने का डर है। मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) मीटिंग के मिनट्स में भी इस बात को लेकर चिंता जताई गई थी। ऐसा लग रहा है कि अनुमानित समय से पहले ही आरबीआई ब्‍याज दरें बढ़ाने का फैसला ले सकती है।

 

 

आगे पढ़ें... किन वजहों से बढ़ सकती है महंगाई

 

 

किन वजहों से महंगाई बढ़ने का डर

एमपीसी मिनट्स के अनुसार, कुछ ऐसे फैक्टर हैं जो इनफ्लेशन आउटलुक पर दबाव बढ़ा रहे हैं। मसलन एचआरए में बढ़ोत्तरी, बजट में एमएसपी बढ़ाए जाने का एलान, कस्टम ड्यूटी में बढ़ोत्तरी, क्रूड की कीमतों में बनी हुई तेजी औक्‍र इपपुट कास्ट का बढ़ना। इन वजहों से आगे महंगाई बढ़ने का डर बना हुआ है।      

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