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बजट 2018 - प्री बजट मीटिंग: इंडस्‍ट्रीज ने FM से कहा, 18 से 25% तक हो कॉरपोरेशन टैक्‍स

सरकार ने बजट 2018-19 को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।

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नई दिल्‍ली. सरकार ने बजट 2018-19 को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत, प्री बजट मीटिंग्‍स का शुरू हो गई है। बुधवार को वित्‍त मंत्री अरुण जेटली के साथ हुई मीटिंग में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री (फिक्‍की) ने कॉरपोरेट टैक्‍स घटाकर 18-25 फीसदी तक किए जाने की सिफारिश की। इसके अलावा जीएसटी के तहत एंटी प्रोफिटीयरिंग प्रावधानों को और स्‍पष्‍ट करने के साथ-साथ इसके अनुपालन को सरल बनाने की भी सिफारिश की गई। 

 

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बजट 2018 - टैक्‍स कम रहने से बढ़ेगा डॉमेस्टिक इन्‍वेस्‍टमेंट 

वित्‍त मंत्री के साथ बैठक में फिक्‍की के प्रेसिडेंट पंकज पटेल ने सुझाव दिया कि सरकार को Union Budget 2018 में बिजनेस और आम लोगों के लिए टैक्‍स की दरों में कमी लानी चाहिए। इससे डॉमेस्टिक इन्‍वेस्‍टमेंट और डिमांड बढेगी, साथ ही ग्‍लोबली भारत का प्रतिस्‍पर्धी वातावरण भी बरकरार रहेगा। उन्‍होंने कहा कि पिछले बजट में कारपोरेट टैक्‍स की दर घटाकर 25 फीसदी तक लाने के लिए रोडमैप तैयार किया गया था लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया। इस‍लिए अब इसे घटाए जाने की जरूरत है। उन्‍होंने यह भी कहा कि प्रोडक्टिव एक्‍सपेंडिचर जैसे इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर कैपिटल एक्‍सपेंडिचर पर लगातार फोकस की जरूरत है। अगर जरूरत हो तो वित्‍तीय घाटा लक्ष्‍य को कम करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। 

 

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बजट 2018 - 3- 4 हों जीएसटी में टैक्‍स दरें 

GST को उल्‍लेखनीय सुधार बताते हुए पटेल ने कहा कि आगे चलकर इसकी टैक्‍स दरों को 3-4 की संख्‍या में लाने और बाकी के आइटम्‍स को इसके दायरे में लाने की जरूरत है। साथ ही GST के अनुपालन को भी सरल बनाने के कोशिश की जानी चाहिए। उन्‍होंने यह भी सुझाव दिया कि सर्विसेज के एक ही तरह की लीगल एंटिटी में इंट्रा एंटिटी ट्रान्‍सफर को GST से छूट दी जाए। पटेल ने यह भी सुझाव दिया कि GST के तहत एंटी प्रोफिटीयरिंग प्रावधानों को और स्‍पष्‍ट करने की जरूरत है। इसकी वजह है कि अगर इन प्रावधानों के कन्‍फ्यूजन के चलते टैक्‍सपेयर अगर इन प्रावधानों का पालन नहीं कर पाया तो उसके खिलाफ दंडात्‍मक कार्रवाई हो सकती है। 

 

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बजट 2018 - रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर भी दिया बल

अपने सुझावों में पटेल ने रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। उन्‍होंने कहा कि पिछले बजट में रिसर्च और इनोवेशन के लिए पेटेंट बॉक्‍स प्रणाली को पेश किया गया था। लेकिन अब इसमें सुधार की जरूरत है। साथ ही सरकार को साइंटिफिक रिसर्च खर्च को लेकर फिर से ज्‍यादा डिडक्‍शन को लागू करना चाहिए। पटेल ने यह भी सुझाव दिया कि विकल्‍प के तौर पर रिसर्च टैक्‍स क्रेडिट के प्रावधान को भी लाया जा सकता है। इसके अलावा पटेल ने 2-3 रेगुलेशन फ्री जोन्‍स बनाने की भी सिफारिश की। उनका कहना है कि इन जोन्‍स में सभी रेगुलेटरी आवश्‍यकताओं से छूट हो। यह छूट विशेषकर न्‍यू एज, हाई टेक्‍नोलॉजी और इनोवेटिव इंडस्‍ट्री को मिले।  

 

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पब्लिक सेक्‍टर बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन का स्‍वागत करते हुए पटेल ने कहा कि सरकार को कुछ पब्लिक सेक्‍टर बैंकों के कंसोलिडेशन और प्राइवेटाइजेशन पर भी विचार करना चाहिए। देश में ज्‍यादा से ज्‍यादा 5 या 6 बड़े पब्लिक सेक्‍टर बैंक‍ होने चाहिए। उन्‍होंने यह भी कहा कि इन्‍सॉल्‍वेंसी और बैंकरप्‍सी कानून, 2016 (आईबीसी) के लागू होने को महत्‍वपूर्ण बताते हुए पटेल ने कहा कि इन्‍सॉलवेंसी स्‍कीम्‍स को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए टैक्‍स कंसीडरेशन महत्‍वपूर्ण हैं। साथ ही आईबीसी के नीतिगत लक्ष्‍यों को हासिल करने के लिए प्रावधानों को रक्षात्‍मक नहीं होना चाहिए। 

 

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