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Home » Economy » PolicyNo need to import UREA: Collect urine, turn it into urea to end import : Nitin Gadkari 

नितिन गडकरी ने कहा- पेशाब से बनेगी यूरिया, आयात करने की नहीं होगी जरूरत

यूरिया आयात रोकने के लिए मानव मूत्र को सुरक्षित करने का प्रस्ताव

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नई दिल्ली। केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यूरिया का आयात रोकने के लिए मानव मूत्र को सुरक्षित रखने का प्रस्ताव दिया है। नितिन गडकरी  रविवार को एक कार्यक्रम काे संबोधित करते हुए कहा है, देश में मानव मूत्र से यूरिया निर्माण होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो हमें उर्वरक आयात की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्‍होंने कहा कि प्राकृतिक कचरे से ईंधन बनाया जा रहा है जो पर्यावरण के लिए अनुकूल है। मूत्र जैसे प्राकृतिक कचड़े से जैव-ईंधन बनाने के मौजूदा उदाहरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मानव मूत्र में अमोनियम सफ्लेट तथा नाइट्रोजन दोनों चीजें होती है।

 

मंत्री ने कहा, ‘‘मैंने हवाई अड्डों पर मूत्र को एकत्र करने को कहा हैहम यूरिया आयात करते हैं अगर हम पूरे देश में मूत्र इकट्ठा करना प्रारंभ कर दें तो हमें यूरिया के आयात की आवश्यकता ही नहीं होगीइसमें इतनी क्षमता है और कुछ भी नष्ट नहीं होगा.’’

 

 

आइडिया पर नहीं मिलता है सहयोग

गडकरी अपने संबोधन में कहते हैं, अगर देश के लोगों का मूत्र संरक्षित किया जा सके तो भारत यूरिया जैसे उर्वरकों का आयात रोक सकता है। हालांकि केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बाकी लोग उनके आइडिया पर सहयोग नहीं करते हैं लेकिन उनका आइडिया बहुत अच्‍छा होता है।

 


 

वह खुद अपना मूत्र इकट्ठा करते हैं और उसे दिल्‍ली में अपने आवास में बने बगीचे में उर्वरक के रूप में इस्‍तेमाल करते हैं

 

 बता दें कि कुछ साल पहले गडकरी ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया था कि वह खुद अपना मूत्र इकट्ठा करते हैं और उसे दिल्‍ली में अपने आवास में बने बगीचे में उर्वरक के रूप में इस्‍तेमाल करते हैं। गडकरी ने दावा किया कि मानव के बालों के इस्‍तेमाल से किसानों का उत्‍पादन 25 फीसदी बढ़ जाता है। उन्‍होंने बताया कि वह तिरुपति से हर महीने 5 ट्रक बाल खरीदते हैं। इससे वह उर्वरक तैयार करते हैं। 

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