BRI को लेकर टकरा सकते हैं चीन और अमेरिका, पेंटागन ने एनाकोंडा से की तुलना

  • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा को लेकर भारत कर रहा है विरोध
  • चीन के बेल्ट एंड रोड फोरम का बहिष्कार कर चुका है भारत

Money Bhaskar

Apr 12,2019 11:35:00 AM IST

नई दिल्ली। ट्रेड वॉर को लेकर बार-बार आमने-सामने आने वाले अमेरिका और चीन के रिश्ते एक बार फिर बिगड़ सकते हैं। इस बार रिश्ते बिगड़ने की वजह चीन का अरबों डॉलर का बेल्ट
एंड रोड इनीशिएटिव (BRI) बन सकता है। दरअसल, पेंटागन ने चीन पर वैश्विक स्तर पर अलग से अपनी नौसेना बनाने का आरोप लगाया है। पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस को चेतावनी देते
हुए कहा है कि चीन प्रतिकूल सौदों के लिए देशों की संप्रभुता का गला घोंट रहा है और एनाकोंडा की तरह दूसरे देशों को अपना भोजन बना रहा है।

दूसरे देशों को अरबों डॉलर का ऋण दे रहा चीन
गुरुवार को कांग्रेस की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने सुनवाई के दौरान चीफ ऑफ नेवल स्टाफ जॉन रिचर्डसन ने कहा है कि चीन BRI को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पालतू प्रोजेक्ट के तौर
पर पेश कर रहा है। इसके लिए वह विभिन्न देशों को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अरबों डॉलर का ऋण पेश कर रहा है। इससे जरिए चीन अपना वैश्विक प्रभाव बढ़ा रहा है। पेंटागन ने
कहा है कि चीन BRI के जरिए वैश्विक स्तर पर अपनी राजनयिक, आर्थिक, सैन्य और सामाजिक ताकत बढ़ाकर वैश्विक स्तर पर अपनी अलग नौसेना बनाने का प्रयास कर रहा है। चीन का
मुख्य मकसद दूसरे देशों की वित्तीय मदद करना है। इसके लिए वह उन देशों से वाणिज्यिक बंदरगाहों के निर्माण, घरेलू सुविधाओं का विकास और राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में
निवेश करने का वादा करता है। चीन BRI के जरिए एशियाई देशों को अफ्रीका और यूरोप को सड़क और समुद्री परिवहन के जरिए जोड़ना है।

BRI से बिगड़ रहे हैं भारत चीन के रिश्ते
चीन का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट BRI भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी बाधा बन रहा है। इसका कारण 60 अरब अमेरिकी डॉलर का चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) है।
CPEC पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजर रहा है। इस कारण भारत ने बीते साल चीन की ओर से आयोजित बेल्ट एंड रोड फोरम का विरोध किया था। रिचर्डसन का कहना है कि
चीन दूसरे देशों को ऋण देने के बदले वाणिज्यिक बंदरगाहों का प्रयोग, सैन्य ठिकाने और जलमार्गों पर अधिपत्य जमा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन अब श्रीलंका, पाकिस्तान, जिबूती के बाद
नाटो देश ग्रीस और इटली को भी अपना सहयोगी बना चुका है।

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