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चीन के नकली 'चांद' से बचेगी 1200 करोड़ की बिजली, बल्ब जलाने की नहीं होगी जरूरत

2020 तक लाॅन्च हो सकता है यह चांद

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नई दिल्ली। चीन अपने शहरी इलाकों से स्ट्रीट लाइट हटाने और बिजली बचाने के मकसद से खुद अपना नकली चांद लॅान्च करने जा रहा है। चीन का दावा है कि इस चमकीले उपग्रह से शहर के 80 वर्ग किलोमीटर तक के क्षेत्र में रात में पर्याप्त उजाला होगा, वहां रोशनी करने के लिए स्ट्रीट लाइट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस नकली चांद से हर साल 17.2 करोड़ डॉलर (यानी 1200 करोड़ रुपए) की बिजली की बचत भी होगी। चीन का यह कृत्रिम चांद को 2020 से 2022 तक के बीच में लॅान्च किया जा सकता है। यह प्रोजेक्ट चेंगदू एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम रिसर्च इंस्टीट्यूट कॉर्पोरेशन डेवलप कर रहा हैं।

 

असली चांद से 8 गुना ज्यादा चमकदार होगा

यह कृत्रिम चांद असली चांद से आठ गुना ज्यादा चमकदार होगा। यह चांद सड़कों को रोशन करेगा। हालांकि इस प्रोजेक्ट से पर्यावरण पर कई बहुत तरीके से असर पड़ने की भी संभावना है लेकिन चीन का दावा है कि कृत्रिम चांद के रोशनी की तीव्रता और समय को एडजस्ट किया जा सकेगा। साथ ही रोशनी को मीटर की सटीकता से कंट्रोल किया जा सकता है। जब कृत्रिम चांद चक्कर लगा रहा होगा तो लोगों को केवल एक चमकदार तारा आकाश में दिखाई देगा। इससे प्रकृति और जानवरों को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

 

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500 किलोमीटर की ऊंचाई पर होगा यह चांद

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह चांद 500 किलोमीटर की पर ऊंचाई होगा । दरअसल यह एक शीशा होगा जिसे चेंगदू में करीब 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर केंद्रित किया जाएगा। यह शीशा रात में सूरज की रोशनी को प्रदर्शित करेगा। इसके जरिए चेंगदू में 16 लाख की आबादी के लिए स्‍ट्रीट लाइट का विकल्‍प भी तलाशा जाएगा। आर्टिफिशियल मून की चमक असली चांद से करीब आठ गुना ज्‍यादा होगी। रिपोर्ट की मानें तो यह कृत्रिम चांद 10 से लेकर 80 किलोमीटर तक के क्षेत्र को अपनी रोशनी से रोशन करेगा। जहां पर इसकी रोशनी पड़ रही है अगर वह इलाका 50 स्‍क्‍वॉयर किलोमीटर है तो फिर करीब 17 करोड़ डॉलर की बिजली की बचत हो सकेगी।

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रूस भी ऐसा प्रयोग कर चुका है

चीन से पहले रूस भी ऐसा प्रयोग कर चुका है। साल 1993 में रूस ने झन्‍माया नाम से एक प्‍लास्टिक का शीशा तैयार किया था। 65 फुट वाले झन्‍माया ने रोशनी की हल्‍की सी किरण प्रदर्शित की थी। उस समय अंतरिक्ष स्‍टेशन मीर पर मौजूद अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने जमीन पर पड़ रही रोशनी की किरण को फिल्‍माया भी था। न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की ओर से बताया गया है कि करीब दो-ढाई मील की दूरी तक पड़ रही रोशनी की उस किरण ने आठ मिनट के अंदर अटलांटिक महासागर से लेकर रूस समेत पूरे यूरोप तक का सफर तय किया था। धरती पर मौजूद लोगों को यह किरण सिर्फ किसी तारे समान नजर आई थी।

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