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उन्नाव बलात्कार काण्ड का आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर हिरासत में

कुलदीप सिंह सेंगर को आज तड़के केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने हिरासत में ले लिया है।

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित उन्नाव बलात्कार काण्ड के आरोपी भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को आज तड़के केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हिरासत में ले लिया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कुलदीप को उनके लखनऊ स्थित आवास से हिरासत में लिया गया। राज्य सरकार ने गुरुवार को ही इस मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द की थी।  

 सूत्रों ने बताया कि सीबीआई कुलदीप सिंह सेंगर से पूछताछ कर रही है। पुलिस के अनुसार सीबीआई की टीम आरोपी विधायक के घर तड़के करीब चार बजकर 45 मिनट पर पहुंची और उन्हें हिरासत में लिया।


हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी 
इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने  विधायक पर हुई कार्रवाई में हुई देरी पर नाराजगी जताई की थी।  न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले में हस्तक्षेप किया था। विधायक के खिलाफ 11 अप्रैल की रात बलात्कार और पोक्‍सो एक्ट सहित कई धाराओं में मुकदमें दर्ज किए गये थे। इससे पहले अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन राजीव कृष्ण की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर विधायक के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की गई । 


सीबीआई को सौंपी गई है जांच 
सीबीआई को बलात्कार के साथ ही पीड़िता के पिता की मृत्यु की जांच भी सौंपी गयी है।  सीबीआई बलात्कार मामले में दर्ज रिपोर्ट के साथ ही तीन अप्रैल को दर्ज दो और मुकदमों की जांच भी करेगी। पुलिस के अनुसार बलात्कार की घटना गत वर्ष चार जून हो हुई थी लेकिन पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिये गये बयान में विधायक का जिक्र नहीं किया था। इसलिए विधायक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गयी थी।


यह मामला उस समय सुर्खियों में आ गया जब पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के पास पिछले सप्ताह आत्ममदाह का प्रयास किया था। इसके बाद आनन-फानन में एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर ही विधायक के खिलाफ उन्नाव के माखी थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई।


छह पुलि‍सकर्मी और डॉक्‍टर नि‍लंबि‍त 
एसआईटी के अलावा इस मामले की जांच जेल उपमहानिरीक्षक और  जिला मजिस्ट्रेट उन्नाव ने भी की थी। इन कमेटियों की जांच के आधार पर इस मामले में पुलिस उपाधीक्षक कुंवर बहादुर सिंह सहित छह पुलिसकर्मी और दो डाक्टरों को निलम्बित कर दिया गया था। तीन डाक्टरों के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है।


उन्होंने बताया कि बलात्कार की घटना के बाद तीस जून 2017 को पीड़िता के चाचा उसे लेकर दिल्ली चले गये थे। इस सम्बंध में पहली रिपोर्ट पीड़िता ने 17 अगस्त 2017 को करायी थी। उनका कहना था कि पीड़िता के चाचा ने आरोप लगाया है कि मुकदमे की वापसी के लिए उसके भाई(पीड़िता के पिता) पर दबाव बनाया जा रहा था। मुकदमा वापस नहीं लेने के कारण उसके भाई को मारापीटा और फर्जी मुकदमों में जेल भि‍जवा दिया गया। उन्हें इतना मारा गया था कि जेल से अस्पताल लाने पर उनकी मृत्यु हो गयी।


पीड़ित का नहीं हुआ सही मेडि‍कल 
पुलिस के अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि जेल जाने से पहले और जेल में जाने के बाद पीड़िता के पिता की समुचित चिकित्सा नहीं की गयी इसलिए अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक और इमरजेंसी मेडिकल अफसर को निलम्बित कर दिया गया जबकि तीन अन्य डाक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया ।

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