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300 रु. की नौकरी और मालिक की बेटी से शादी, ये है येदियुरप्‍पा की कहानी

कर्नाटक में भाजपा को बड़ी जीत दिलाने वाले युदियुरप्‍पा के जरिए 10 रोचक फैक्‍ट...

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नई दिल्‍ली। नई दिल्‍ली। बीएस येदियुरप्‍पा ने कर्नाटक के सीएम के रूप में शपथ ले ली है। इससे पहले राज्‍य में करीब 24 घंटे तक का हाई वोल्‍टेज ड्रामा चला। उनके नेतृत्‍व में पार्टी राज्‍य में सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आई थी। इसी के चलते राज्‍यपाल ने उन्‍हें सरकार बनाने का न्‍यौता दिया। 

 

कर्नाटक में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा होने के साथ ही वह राज्‍य के पूर्व मुख्‍यमंत्री भी रह चुके हैं। उन्‍हीं के नेतृत्‍व में भाजपा 2008 में दक्षिण भारत में अपनी पहली सरकार बनाने में कामयाब रही थी। इस बार भी पार्टी की तरफ से वही सीएम पद के उम्‍मीदवार हैं। बेहद धार्मिक माने जाने वाले युदियुरप्‍पा की लाइफ भी बेहद रोचक रही है। उनकी शादी से लेकर राजनीतिक सफर पर एक नजर डालते हैं... 

 

 

#1- राइस मिल में क्‍लर्क के तौर पर किया काम: मांड्या जिले के बुकानाकेरे में 27 फरवरी 1943 को लिंगायत परिवार में येदियुरप्पा का जन्म हुआ। मात्र 4 साल की उम्र में उनकी मां का स्‍वर्गवास हो गया।1965  में येदियुरप्‍पा ने पहली नौकरी की। यह नौकरी सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट में फर्स्‍ट डिवीजन क्‍लर्क की थी। मन नहीं लगा तो यहां से नौकरी छोड़ दी। येदियुरप्‍पा यहां से शिकारीपुरा आ गए और यहां वीरभद्र शास्‍त्री की राइस मिल में क्‍लर्क की नौकरी करने लगे।  

 

 

#2- मिल मालिक की बेटी से ही किया विवाह: येदियुरप्‍पा के विवाह का किस्‍सा भी रोचक है। दरअसल पढ़ाई पूरी करने के बाद येेदियुरप्‍पा काम की तलाश में थे। उनके पारिवारिक मित्र और मैसूर में इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले शिवाकुमार ने उनकी मुलाकात वीरभद्र शास्‍त्री से कराई। शास्‍त्री ने उन्‍हें क्‍लर्क के तौर पर रख लिया। बाद में येदियुरप्‍पा का काबीलियत देखते हुए वीरभद्र शास्‍त्री ने अपनी बेटी मित्रा देवी से उनकी शादी कर दी। मित्रा देवी की 2004 में मौत हो चुकी है। 

 

 

#3- राजनीति में रखा कदम: बताया जाता है कि मित्रा देवी से शादी ही उनके जीवन का टर्निंग प्‍वाइंट था। येदि संघ से तो पहले ही जुड़े थे। लेकिन शादी के 2 साल बाद बाद उन्‍होंने राजनीति में प्रवेश करने का निर्णय लिया। येदि की बेटी उमा देवी ने अंग्रेजी अखबार टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि जब उन्‍होंने राजनीति में कदम रखने का फैसला किया तो मित्रा देवी के माता पिता यानी उमा देवी के नाना- नानी ने ही अपने दामाद को सबसे ज्‍यादा प्रोत्‍साहित किया। 

 

#4-  हार्ड वेयर की खोली शॉप : शादी और राजनीति में आने के बाद येदियुरप्‍पा ने एक हार्डवेयर की शॉप भी खोली। यह शॉप उन्‍होंने शिवमोगा में खोली। राजनीति में आने के बाद परिवार चलाने के लिए उन्‍होंने शिवमोगा में यह शॉप खेली थी। 

 

#5- मात्र 300 रुपए महीने की जॉब भी की : येदियुरप्‍पा का शुरुआती जीवन मुश्किल भरा रहा । 4 साल में मां की मौत के बाद पिता की भी जल्‍दी मौत हो गई थी। येदियुरप्‍पा को कुछ समय अपने चाचा के यहां गुजारना पड़ा। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान वह शेषाद्रिपुरम कॉलेज में इवनिंग क्‍लास करते थे और दिन में एक स्‍थानीय प्राइवेट कंपनी में 300 रुपए प्रति महीने की जॉब करते थे।  

 

 

#6- ज्‍योतिषी ने कहा तो नाम बदल लिया:  येदियुरप्‍पा की पूजा-पाठ में गहरी आस्‍था है। 12 मई को वोटिंग के दिन पहले उन्‍होंने पूजा की और उसके बाद वोट डालने गए। यही नहीं 2007 में ज्‍योतिषी के कहने पर येदियुरप्‍पा ने अपना नाम तक बदल लिया था। उन्‍होंने अपना नाम Yediyurappa से Yeddyurappa कर लिया। यानी ज्‍योतिषी के कहने पर उन्‍होंने अपने नाम में एक अतिरिक्‍त D जोड़ा और I से तौबा कर ली। 

 

 

#7- पार्टी से ज्‍यादा खुद पर भरोसा : साल 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कर्नाटक में  सरकार बनाई। हालांकि भ्रष्‍टाचार के आरोपों के चलते 2011 में सीएम की कुर्सी जाने के बाद येदियुरप्पा बीजेपी से अलग हो गए। ऐसे में लगा कि वह पूरे लिंगायत फैक्टर के साथ अपने बल पर राजनीति करेंगे। बीजेपी को यह समझते देर नहीं लगी कि येदियुरप्पा के बिना राज्य में उसका कोई जनाधार नहींं रह जाएगा। ऐसे में 2018 में भी बीजेपी ने उन्हें अपना सीएम पद का उम्मीदवार बनाया। 

 

 

#8- कपड़ों को लेकर बेहद सतर्क :  येदियुरप्‍पा अपने ड्रेस कोड के बेहद पक्‍के हैं।1983 में पहली बार विधायक बने। इसके बाद से उन्‍होंने हल्के रंग का सफारी सूट पहनना शुरू किया। तब से आज तक सार्वजनिक जीवन में उन्‍होंने कोई और ड्रेस नहीं पहना है। यहां तक की एक बार कन्‍नड़ काफ्रेंस के लिए उन्‍हें अमेरिका जाना पड़ा। लाख मना करने के बाद भी परिवार वालों ने उन्‍हें एक सूट पैक करके दे दिया। येेदियुरप्‍पा ने यहां सिर्फ ब्‍लेजर ही पहना। पूरा सूट नहीं पहना। 

 

#9- कंघी न मिले तो हो जाते हैं गुस्‍सा : येदियुरप्‍पा अपने अपीयरेंस को लेकर बहुत सतर्क रहते हैं। उमा देवी के मुताबिक, अगर उन्‍हें कंघी,  रुमाल और मोजे जैसी जरूरी चीजें सही जगह पर नहीं मिलें तो बुरी तरह से नाराज हो जाते हैं। 

 

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