इंग्लैंड से नौकरी छोड़ भारत आया, अब घरेलू कामों में इस्तेमाल हुए पानी को पीने लायक बनाता है यह शख्स

भारत में जल संकट तेजी से बड़ी समस्या का रूप लेता जा रहा है। पानी की समस्या दूर करने में अपना योगदान देने के इरादे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर विकास ब्रह्मावर ने 2008 में यूके में नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया।

Money Bhaskar

Feb 11,2019 04:17:00 PM IST

नई दिल्ली। भारत में जल संकट तेजी से बड़ी समस्या का रूप लेता जा रहा है। पानी की समस्या दूर करने में अपना योगदान देने के इरादे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर विकास ब्रह्मावर ने 2008 में यूके में नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया। वहां वह टाइलर कैपिटल नामक कंपनी में काम करते थे। शुरुआत में उन्होंने ऐसे प्रोडक्ट बनाए जो शहरों और ग्रामीण क्षेत्र दोनों में पानी की क्वालिटी को बेहतर बनाने के काम में आते थे। जल्द ही उन्हें अहसास हुआ कि पानी की क्वालिटी की तुलना में इसकी कमी भारत की सबसे बड़ी समस्या है। फिर उन्होंने ऐसा सिस्टम तैयार किया जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के रिसाइकिल्ड पानी को फिर से इस्तेमाल करने लायक बनाता है। इसके लिए उन्होंने इजराइल, सिंगापुर और नामीबिया सहित कई देशों के वाटर मैनेजमेंट मॉडल का अध्ययन किया।


2011 में विकास ने बोसोन व्हाइट वाटर नाम का स्टार्टअप शुरू किया
2011 में विकास ने बोसोन व्हाइट वाटर नाम का स्टार्टअप शुरू किया। उनकी कंपनी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी को साफ कर घरेलू कामकाज जैसे टॉयलेट फ्लशिंग, गार्डेनिंग आदि के लायक बनाती है। बेंगलुरू में मौजूद कई आईटी पार्क, मॉल और बड़े अपार्टमेंट उनके क्लाइंट बने। पहले ये सब टैंकर के जरिए मिलने वाले पानी का इस्तेमाल करते थे। विकास की कंपनी टैंकर वाले पानी से काफी कम कीमत पर बेहतर क्वालिटी का पानी मुहैया कराती है।

सीवेज प्लांट का पानी टैंकर वाले पानी की तुलना में आधी कीमत पर मिल जाता है। 

 

इच्छुक पार्टी को कंपनी का सिस्टम अपने यहां इंस्टॉल कराना होता है। इसके बाद उन्हें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का रिसाइकिल्ड पानी खरीदना होता है। सीवेज प्लांट का पानी टैंकर वाले पानी की तुलना में आधी कीमत पर मिल जाता है। बोसोन व्हाइट वाटर कंपनी का सिस्टम क्लाइंट के परिसर में ही सीवेज प्लांट के पानी को साफ करता है। कंपनी अपने क्लाइंट को लाइव मॉनिटरिंग के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड भी मुहैया कराती है। इसके जरिए कहीं से भी पानी की क्वालिटी और मात्रा पर नजर रखी जा सकती है। प्रति लीटर 6 पैसे के हिसाब से 60,000 लीटर पानी पर 3,500 रुपए का खर्च आता है। 
 

इनका रिसाइकिल्ड पानी पीने लायक होता है 

 विकास ने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के रिसाइकिल्ड पानी को लेकर लोगों में कई तरह गलत धारणाएं हैं। कई लोग मानते हैं कि यह पानी हाइजेनिक नहीं होता है। तमाम बड़े अपार्टमेंट और कैंपस ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाना अनिवार्य है। लेकिन, इससे जो पानी मिलता है लोग उसे इस्तेमाल नहीं करते हैं। दुर्गंध और पानी के रंग में बदलाव लोगों की धारणा को मजबूत करता है। बोसोन व्हाइट वाटर कंपनी ने जो सिस्टम बनाया है वह रिसाइकिल्ड पानी की इन कमियों को दूर कर देता है। विकास कहते हैं कि उनके सिस्टम द्वारा साफ किए गए पानी को पीने के काम में भी लाया जा सकता है। 

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