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जनता का पैसा हड़पने वाले चिट फंड्स की अब खैर नहीं, 10 साल तक की सजा के साथ 50 करोड़ रुपए तक का लग सकता है जुर्माना

रिश्तेदारों से पैसों के लेन-देन पर नहीं लगी पाबंदी

Govt Goes tough on Ponzi Schemes and Unregulated Deposit Schemes

नई दिल्ली.

आम जनता की गाढ़ी कमाई को धोखे से हड़पने वालों की अब खैर नहीं है। राष्ट्रपति ने ऐसे लोगों के खिलाफ Banning of Unregulated Deposit Schemes Ordinance, 2019 पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।इसके तहत अधिक ब्याज दर जैसे प्रलोभल देकर जनता का पैसा लूटने वाले लोगों को जेल सहित सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। यह अध्यादेश अवैध जमा योजनाओं की जांच करेगा जो बहुत गरीब लोगों और आर्थिक निरक्षर लोगों का पैसा ठगने का काम करते हैं।

 

ये हैं इसके मुख्य प्रावधान

-अवैध जमा स्वीकार करने पर पूरी तरह पाबंदी

-अवैध जमा योजना चलाना, ऐसी योजनाओं में जमा वापसी या विनिर्दिष्ट सेवा देने में जालसाजी करना, ऐसी योजनाओं में गलत प्रलोभन देना जुर्म माना जाएगा।

-इन अपराधों के लिए कठोर दंड और जुर्माने की व्यवस्था

-किसी भी व्यक्ति द्वारा अवैध जमा योजना में जमा कराने के लिए उत्प्रेरित करने पर पाबंदी और सजा का प्रावधान

-अवैध योजना चलाकर पैसे जमा लेने वालों की संपत्ति जब्त कर जमाकर्ताओं के पैसे वापस करने का प्रावधान

-Approved Regulated Deposit Schemes का राष्ट्रव्यापी तौर पर केंद्रीकृत ऑनलाइन डाटाबेस तैयार करना, जिससे ये पता लगाया जा सके कि कौन unregulated है।

 

रिश्तेदारों से बेहिचक कर सकते हैं लेन-देन

इस अध्यादेश के तहत रिश्तेदारों से लेन-देन पर रोक नहीं लगी है। लोग व्यवहारिक तौर पर जो भी लेन-देन करते हैं उसे इस अध्यादेश में शामिल नहीं किया गया है। लोग अपने रिश्तेदारों से लेनदेन या कारोबार के लिए किसी फर्म, कम्पनी या LLP जैसे संस्थाओं से लेनदेन करते हैं तो वह बेरोकटोकर जारी रख सकते हैं।

 

10 साल तक की हो सकती है सजा

इस अध्यादेश के तहत दोषियों को एक से 10 साल तक की सजा हो सकती है। 2 लाख रुपए से लेकर 50 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया गया है। कंपनियां या एजेंट ऐसी किसी भी योजना का विज्ञापन नहीं कर सकते हैं जो पंजीकृत नहीं है।

 

 

 

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