Home » Economy » Policybalance of payments crisis in pakistan पाकिस्‍तान का विदेशी मुद्रा भंडार संकट चीन-पाकिस्‍तान कोरिडॉर आईएमएफ

अगस्‍त के बाद आखिर क्‍या होगा पाकिस्‍तान का, देश के पास बस 2 महीने का डॉलर

बैलेंस ऑफ पेमेंट क्राइसिस से जूझ रहे पाकिस्‍तान को चीन से 2 अरब डॉलर कर्ज मिल भी जाता है तो भी यह अगस्‍त से ज्‍यादा

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नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान एक बार फिर से बड़े आर्थिक संकट में है। वहां के प्रमुख अखबार डॉन के मुताबिक, देश की इकोनॉमी के सामने इस समय बैलेंस ऑफ पेमेंट का संकट खड़ा हो गया है। सीधी भाषा में कहें तो पाकिस्‍तान के विदेशी मुद्रा भंडार में इतना पैसा नहीं बचा है कि वह आने वाले दिनों में चैन से अपना इम्‍पोर्ट जारी रख सके। पाकिस्‍तान का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूदा समय में 10.8 बिलियन डॉलर के लेवल पर आ गया है। पिछले साल मई में यह 16.4 अरब डॉलर था। फाइनेंशियल टाइम्‍स की रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्‍तान का इम्‍पोर्ट तेजी के साथ बढ़ा है। उसके पास जो भी विदेशी मुद्रा भंडार है, वह अगले 10 हफ्तों में खत्‍म हो सकता है। 

 

पाकिस्‍तान चीन से लेगा 2 अरब डॉलर तक का कर्ज 
इस संकट से निपटने के लिए चीन ने एक बार फिर से अपने पारंपरिक सहयोगी चीन का दरवाजा खटखटाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तान सरकार खुद को आर्थिक संकट से उबारने के लिए चीन से 1 से 2 अरब डॉलर का लोन के लिए बातचीत कर रही है। सरकार ऐसे समय में यह कर्ज लेने की सोच रही है जब इस साल जून में खत्‍म होने वाले वित्‍त वर्ष तक उसपर चीन और उसके बैंकों का कर्ज बढ़कर 5 अरब डॉलर होने जा रहा है। इसी साल अप्रैल में चीन ने पाकिस्‍तान को करीब 1.2 अरब डॉलर का कर्ज दिया था।  

 

कर्ज बढ़ने का सबसे बड़ा कारण सीपीईसी 
पाकिस्‍तान पर लगातार बढ़ते कर्ज का एक बड़ा कारण बीजिंग समर्थित चाइना पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी सीपीईसी है। करीब 60 अरब डॉलर की इस परियोजना से पाकिस्‍तान को काफी उम्‍मीदें हैं। पाकिस्‍तानी अधिकारी मान रहे हैं कि एक बार पूरी हो जाने के बाद यह परियोजना देश की इकोनॉमी की सूरत बदल देगी। यही कारण है कि देश की सरकार खर्च की परवाह किए बिना पैसा पानी कर तरह बहा रही है। हालांकि देश में ढंग का इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट नहीं होने के चलते उन्‍हें इस परियोजना के लिए ज्‍यादातर मशीनरी चीन से इम्‍पोर्ट करनी पड़ रही है। ऐसे में उनका विदेशी मुद्रा भंडार घट रहा है और कर्ज बढ़ रहा है। 

 

लगातार कम हुई है अमेरिकी मदद 
कर्ज बढ़ने का सीपीईसी ही एक कारण नहीं है। अमेरिका में ट्रम्‍प के सत्‍ता में आने के बाद पाकिस्‍तान को मिलने वाली आर्थिक मदद लगातार कमजोर हुई है। आतंकवाद के खिलाफ पर्याप्‍त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाते हुए अमेरिका ने बड़े पैमाने पर पाकिस्‍तान की मदद रोक दी है। इससे पहले पाकिस्‍तान को आतंकवाद के खिलाफ जंग के लिए अमेरिका को ओर से 33 अरब डॉलर की मदद महैया कराई चा चुकी है। अमेरिका के इस कदम से पाकिस्‍तान को सीधे 1.6 अरब डॉलर सालाना का नुकसान हो रहा है। हाल में क्रूड की बढ़ी कीमतों ने भी पाकिस्‍तान के खजाने को खाली करने में बड़ी भूमिका निभाई है। महंगे क्रूड ने पाकिस्‍तानी रुपए को जमीन पर ला दिया है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पाकिस्‍तानी रुपए की कीमत 120 रुपए के ऐतिहासिक गिरावट वाले लेबल पर आ गई है। इम्‍पोर्ट बेस्‍ड इकोनॉमी होने के चलते इसका सीधा असर उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा है। 

काफी नहीं होगा चीन का कर्ज 
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पाकिस्‍तानी सरकार को चीन की ओर से कर्ज मिल भी जाता है तो भी यह उसे बचाने के लिए पर्याप्‍त नहीं होगा। चीन कर्ज उसे मात्र अगस्‍त तक की बचा सकता है। फाइनेंशियल एनॉलिस्‍ट का अनुमान है कि देश में जुलाई में आम चुनाव हैं। इसके बाद पाकिस्‍तान को फिर से अंतराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज की जरूरत पड़ेगी। इससे पहले 2013 में IMF पाकिस्‍तान को 6.7 अरब डॉलर का कर्ज दे चुका है। माना जा रहा है कि चुनाव के बाद देश में बनने वाले नई सरकार IMF से कर्ज की पहल करेगी। 


 

निगेटिव हैं हर इंडिकेटर   
पाकिस्‍तानी इकोनॉमी की बात करें तो उसके हर इं‍डीकेटर निगेटिव आ रहे हैं। पाकिस्‍तान के पॉलिसीमेकर मान रहे थे सीपीईसी में भारी विवेश के चलते देश की इकोनॉमी की रफ्तार 6 फीसदी के आसपास रहेगी और आने वाले कुछ सालो में इकोनॉमी रिवाइवल मोड में आ जाएगी। हालांकि आईएमएफ़ ने कहा है कि अगले वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान की वृद्धि दर 4.7 फ़ीसदी रहेगी। 2009 से 2018 के बीच पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज 50 फीसदी बढ़ा है। उसका कारोबारी घाटा बढ़कर 33 अरब डॉलर हो गया था। 


 

पाकिस्‍तान ने अबतक क्‍या किया ? 
ऐसा नहीं है कि पाकिस्‍तान ने अपने बैलेंस ऑफ पेमेंट को थामने के लिए कदम नहीं उठाया, हालांकि ये नाकाफी साबित हुए। सरकार ने करीब 200 लग्‍जरी आयटम्‍स पर टैरिफ बढ़ाया है। साथ ही अपनी करंसी में 10 पैसे का डीवैल्‍यूशन भी किया है। अब  तक 2.2 बिलियन का लोन देश की सरकार ले चुकी है। 

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