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अटल बिहारी वाजपेयी का निधन, 2 महीने से एम्स में भर्ती थे

3 बार देश के पीएम रहे अटल बिहारी वाजपेयी ने 2005 में राजनीति से ले लिया था संन्यास

atal bihari vajpayee passed away
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया है। वह बीते दो दिनों से एम्प में भर्ती थे। उन्हें जीवन रक्षक उपकारणों पर रखा गया था। कल से ही वाजपेयी को देखने के लिए आने वालों का सिलसिला जारी था। इससे पहले वे 9 साल से बीमार थे। राजनीति की आत्मा की रोशनी जैसे घर में ही कैद थी। वे जीवित थे, लेकिन नहीं जैसे। किसी से बात नहीं करते थे। जिनका भाषण सुनने विरोधी भी चुपके से सभा में जाते थे, उसी सरस्वती पुत्र ने मौन ओढ़ रखा था।

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया है। वह बीते दो दिनों से एम्स में भर्ती थे। उन्हें जीवन रक्षक उपकारणों पर रखा गया था। कल से ही वाजपेयी को देखने के लिए आने वालों का सिलसिला जारी था। वे 9 साल से बीमार थे। अटलजी को यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन के बाद 11 जून को एम्स में भर्ती किया गया था। उनकी सिर्फ एक किडनी काम कर रही थी। 30 साल से अटलजी के निजी फिजिशियन डॉ. रणदीप गुलेरिया की देखरेख में एम्स में उनका इलाज चल रहा था। बुधवार रात एम्स ने मेडिकल बुलेटिन में कहा था कि अटलजी की तबीयत पिछले 24 घंटे में काफी बिगड़ गई। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। गुरुवार सुबह जारी बुलेटिन में एम्स ने कहा कि अटलजी की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका। 

 
ये नेता मिलने आए

दो दिन में प्रधानमंत्री के अलावा उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, वाजपेयी के छह दशक तक साथी रहे पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण अाडवाणी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, सुमित्रा महाजन, वसुंधरा राजे, स्मृति ईरानी, सुरेश प्रभु, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, रामविलास पासवान, डॉ. हर्षवर्धन, जितेंद्र सिंह, अश्वनी कुमार चौबे, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, बसपा प्रमुख मायावती और अमर सिंह एम्स पहुंचे।

 

मोदी ने किए 7 ट्विट 

श्रद्धांजलि में मोदी ने 7 ट्वीट किए। उन्होंने कहा, ‘‘मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। हम सभी के श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच नहीं रहे। यह मेरे लिए निजी क्षति है। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना, एक युग का अंत है। लेकिन वो हमें कहकर गए हैं- मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?’’

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