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Home » Economy » PolicyBJP Loses Election: Economic decisions that went against BJP

मोदी सरकार के इन आर्थिक फैसलों की वजह से हारी भाजपा

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान भाजपा के हाथ से निकल गए हैं।

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नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा तीन अहम राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता से बेदखल हो गई। भाजपा के हाथ से सत्ता निकलने के पीछे कई सामाजिक और क्षेत्रीय मुद्दे रहे। इसमें दलित उत्पीड़न, एसी-एसटी एक्ट और किसानों की कर्ज माफी अहम रहे। अर्थशास्त्री और ग्लोब कैपिटल मार्केट लिमिटेड के वाइस प्रेसीडेंट मनीष कुमार के मुताबिक केंद्र सरकार के कुछ आर्थिक मुद्दे ऐसे रहे, जिन्होंने भाजपा को करारी चोट पहुंचाने का काम किया है। उनका मानना है कि ये फैसले 2019 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

 

नोटबंदी
मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले ने शुरुआती दिनों में काफी सुर्खियां बटोरी। यही वजह रही कि नोटबंदी के बाद हुए यूपी जैसे राज्यों के चुनाव में भाजपा की जीत हुई। लेकिन वक्त गुजरने के साथ ही मार्केट में दोबारा से 2000 और 500 के नकली नोटों की खेप पहुंचने लगी। ऐसे में लोगों में ये संदेश गया कि आखिर नोटबंदी का फायदा क्या हुआ। वहीं नोटबंदी से आतंकवाद को आर्थिक तौर पर चोट पहुंचने की बात भी झूठ निकली। इतना ही नहीं नोटबंदी की वजह से असंगठित सेक्टर में काम कर रहे ज्यादातर मजदूरों का रोजगार छिन गया। ये ऐसे वजह रही जिसका प्रभाव अब वक्त गुजरने के साथ दिख रहा है। 

 

ब्लैक मनी
मोदी सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनाव में ब्लैक मनी का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था और देश से ब्लैक मनी खत्म करने का वादा किया गया था। इतना ही नहीं विदेशों में जमा ब्लैक मनी को वापस भारत लाने की बात कही थी। भाजपा ने सत्ता मिलने के बाद लंबे वक्त तक इस मुद्दे को किनारे रखा। हालांकि जीएसटी और रेरा, फ्यूजिटिव इकोनॉमिक अफेंडर एक्ट लाकर भाजपा ये दिखाने की कोशिश करती रही कि वो ब्लैक मनी के मुद्दे पर काफी संजीदगी से काम कर रही है। लेकिन माल्या, नीरव मोदी जैसे व्यापारियों द्वारा बैंकों को चूना लगाकर फरार होने के साथ एनपीए जैसे मु्द्दों ने सरकार के किए कराए पर पानी फेरने का काम किया।   

 

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महंगाई

महंगाई यूपीए सरकार का एक ऐसा मुद्दा था, जिस पर सवार होकर भाजपा सत्ता में आई और मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। हालांकि महंगाई रोकने में मोदी सरकार भी नाकामयाब रही। मोदी सरकार के कार्यकाल में दाल की कीमत 200 रुपए के पार पहुंच गई। साथ ही एलपीजी सिलेंडर के दाम में इजाफा हुआ। ये ऐसे मुद्दे रहे जिसका असर आम आदमी पर पड़ा। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल के दाम कंट्रोल में रखने में सरकार नाकामयाब रही। इस वजह से जनता में एक नकरात्मक माहौल बना।  

 

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जीएसटी 

जीएसटी इस सरकार का सबसे बड़ा आर्थिक फैसला रहा। भाजपा ने ऐतिहासिक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 30 जून 2017 की रात 12 बजे संसद के पटल पर जीएसटी बिल पेश किया गया और देश में 1 जुलाई 2017 से देशभर में जीएसटी बिल लागू हुआ। मोदी सरकार के इस फैसले की काफी सराहना हुई। लेकिन वक्त के साथ मोदी सरकार के इस फैसले का विपरीत असर देखने को मिला। दरअसल जीएसटी लागू होने से छोटे व्यापारियों को नकदी का समस्या हुई और साथ ही जीएसटी बिल में लगातार होने वाले बदलावों की वजह से बिजनेसमैन को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

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