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इस दिवाली धंधा चौपट, सूना पड़ा एशिया का सबसे बड़ा सराफा मार्केट

कभी बॉलीवुड हस्ती कपूर खानदान से लेकर राजेश खन्ना के घर जाता था यहां से सामान

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नई दिल्ली. एक समय फेस्टिव सीजन में एशिया के सबसे बड़े सराफा मार्केट कूचा महाजन में पैर रखने की जगह नहीं होती थी। लेकिन इस बार दिवाली से पहले यहां सन्नाटा छाया हुआ है। कस्टमर्स के इंतजार में कारोबारी समय काट रहे हैं। यहीं दुकानदारों ने अब छुट्टी के दिन यानी संडे को भी मार्केट खोलना शुरू कर दिया है। कारोबारी मार्केट में मंदी के लिए नोटबंदी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

 

दो साल पहले तक रहती थी भीड़

दिल्ली के चांदनी चौक के कूचा महाजन में सराफा का सबसे बड़ा कारोबार चलता है। यह मार्केट सोने-चांदी व हीरे-जवाहरात का सबसे बड़ा होलसेल मार्केट है। दो साल पहले तक इस मार्केट में दिवाली पर भीड़ से दुकानों में बैठना तो दूर खड़े होने तक की जगह नहीं होती थी लेकिन इस दीवाली कूचा महाजन बाजार सूना है।

द बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के सदस्य योगेश कुमार चैनी (Y.K.) ने Moneybhaskar को बताया कि 2 साल पहले तक दिवाली पर यहां कारोबारियों के पास खाने-पीने तक का वक्त नहीं होता था लेकिन पिछले साल से बाजार में रौनक फीकी पड़ गई है। योगेश कुमार इसकी सबसे बड़ी वजह नोटबंदी को मान रहे हैं। वह कहते हैं कि मंदी को देखते हुए कारोबारियों ने संडे को भी मार्केट खोलने का फैसला लिया है। पिछले हफ्ते से हम संडे भी दुकानें खोल रहे हैं।

 

यह भी मंदी की वजह

इस साल दिवाली पर सोने-चांदी की खरीददारी कम हो रही है। योगश कुमार बताते हैं कि पिछले दो साल में सोने-चांदी की खरीदारी 50% कम हुई है। सोने-चांदी की खरीद पर सरकार के लिमिट तय करने का ज्वेलरी बाजार पर सबसे बुरा असर पड़ा है। वह कहते हैं कि इसके अलावा कई अन्य वजहों से भी बिक्री घटी है। ये भी हैं वजह...

 

- भाव में तेजी से लोग लाइट वेट ज्वेलरी खरीदने लगे हैं।

 

- पहले की तरह लोग ट्रैडिशनल ज्वेलरी खरीदना पसंद नहीं करते।

 

- मनी का फ्लो कम होने से लोगों में पर्चेजिंग पावर घटी है।

 

- इस साल शादियों के सीजन में भी बहुत ज्यादा बिक्री नहीं रही।

 

- आने वाले दो-चार महीनों में भी बिक्री में तेजी की उम्मीद नहीं।

 

 

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कपूर खानदान से राजेश खन्ना तक का फेवरेट था मार्केट

चांदनी चौक का कूचा महाजन सराफा मार्केट ना सिर्फ आम लोगों की पसंद है बल्कि इस बाजार ने बॉलीवुड जगत पर भी खास छाप छोड़ी है। योगेश बताते हैं- 90 के दशक में कपूर खानदान और राजेश खन्ना के घर में यहीं से ज्वैलरी जाती थी। राजेश खन्ना हर त्योहार खासकर दिवाली के समय कूचा महाजन से खरीददारी करने जरूर आते थे।


कभी रेजिडेंशियल हुआ करता था यह मार्केट

मुगलकाल का यह मार्केट कभी रेजिडेंशियल इलाका हुआ करता था। यहां 50-70 परिवार रहते थे। यहां रहने वाले कभी महाजन कहलाते थे, इसलिए इस मार्केट का नाम कूचा महाजन पड़ा।

अरबों का होता है कारोबार

कूचा महाजन से हर साल अरबों का कारोबार होता है। यहां तकरीबन 2,000 से अधिक दुकानें हैं। एक दुकान का टर्नओवर कम से कम 2 से 3 करोड़ रुपए हैं।

 

 

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ज्वैलरी लैब टेस्ट की भी व्यस्था

ज्वैलरी का सबसे पहला डिजाइन इसी मार्केट में आता है। इस मार्केट में लैब टेस्टिंग की भी व्यवस्था की गई है ताकि ग्राहक अगर चाहे तो सोने व हीरों  की खरीदारी करने से पहले उसकी सत्यता को परख सके। इसके लिए 30 रुपए चार्ज लगते हैं।

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