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राफेल पर अंबानी का राहुल को दूसरा जवाबी खत, कहा- कांग्रेस के बनाए नियमों पर ही काम कर रही कंपनी

अनिल अंबानी ने कहा कि राफेल सौदे पर आपको दी गई जानकारी पूरी तरह से भ्रामक है......

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नई दिल्ली। राफेल विमान सौदे पर लगातार हमलावर रुख को देखते हुए रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को एक और जवाबी खत लिखा है। अंबानी का दावा है कि उनके प्रति दुर्भावना रखने वाले कुछ निहित स्वार्थी तत्वों और कॉर्पोरेट प्रतिद्वंद्वियों ने इस सौदे पर कांग्रेस पार्टी को 'गलत, भ्रामक और भटकाने वाली जानकारी दे रहे हैं।' बता दें कि राहुल गांधी इस मुद्दे पर लगातार सरकार को घेर रहे हैं। गांधी का दावा है कि मौजूदा सरकार राफेल विमानों के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA)सरकार में तय कीमत से कहीं अधिक मूल्य चुका रही हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार ने इस सौदे में बदलाव सिर्फ 'एक उद्योगपति को फायदा पहुंचाने के लिए' किया है। बयान के अनुसार अनिल अंबानी ने राहुल गांधी की ओर से अपने ऊपर लगातार किए जा रहे आक्षेपों पर 'गहरी खिन्नता' प्रकट की है और इन आक्षेपों को निराधार बताया है। अंबानी ने दावा किया कि 2005 में कांग्रेस की ओर से बनाई गई नीति के तहत ही उनकी कंपनी काम कर रही है। 

भारत आने वाले विमानों का एक भी कल-पुर्जा नहीं बना रही कंपनी 

रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG)की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, अंबानी ने ताजा पत्र में कहा है कि भारत जो 36 राफेल जेट विमान फ्रांस से खरीद रहा है, उन विमानों के एक रुपये मूल्य के एक भी कलपुर्जे का विनिर्माण उनके समूह द्वारा नहीं किया जाएगा। अंबानी ने दावा किया कि उनकी कंपनी ने भारत सरकार के साथ कोई करार नहीं किया है।  


 

कांग्रेस ने ही शुरू की थी कांग्रेस नीति 
उन्होंने याद दिलाया है कि ऑफसेट नीति कांग्रेस के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार ने ही 2005 में लागू की थी। अंबानी ने स्पष्ट किया है कि उनके समूह ने राफेल विमानों की खरीददारी की इच्छा जताए जाने से महीनों पहले रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में कदम रखने की घोषणा दिसंबर 2014 से जनवरी 2015 के बीच ही कर दी थी। 

 

आगे पढ़ें- और क्या कहा अनिल अंबानी ने...... 

 

 

कंपनी को नहीं पहुंचा कोई भी फायदा 
अंबानी के पत्र के हवाले से कहा है कि रिलायंस को इस सौदे से जो हजारों करोड़ रुपए का फायदा होने की बात की जा रही है वह कुछ निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा प्रचारित कोरी कल्पना मात्र है। ' पत्र में कहा गया है कि लड़ाकू जेट की आपूर्ति करने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट ने रिलायंस समूह से करार अनुबंध के तहत अपनी ऑफसेट अनिवार्यता को पूरा करने के लिए किया है। उन्होंने लिखा है, 'सीधे शब्दों में कहें तो भारत सरकार के साथ कोई एग्रीमेंट है ही नहीं।  उन्होंने कहा है कि रिलायंस डसॉल्ट संयुक्त उपक्रम कोई राफेल जेट विमानों का विनिर्माण नहीं करने जा रहा है। सभी 36 के 36 विमान शत प्रतिशत फ्रांस में ही तैयार किए जाएंगे और उन्हें वहीं से भारत को निर्यात किया जाएगा। 

 

आगे पढ़ें- आखिर क्या होता है ऑफसेट ...... 

 

 

आखिर क्या होता है ऑफसेट 
बता दें कि रक्षा ऑफसेट के तहत विदेशी आपूर्तिकर्ता को उत्पाद के एक निश्चित प्रतिशत का विनिर्माण खरीद करने वाले देश में करना होता है। कई बार यह कार्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिए किया जाता है। डिफेंस इंडस्ट्री में अफसेट का यूज काफी हो रहा है। इसके तहत आने वाले दिनों में राफेल से जुड़े जो कल पुर्जे भारत सरकार खरीदेगी उसे डसॉल्ट की मदद से अनिल अंबानी का ग्रुप तैयार करेगा। 

 

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भारत सरकार ने नहीं दिया ठेका 
अनिल अंबानी ने यह भी कहा है कि भारत के रक्षा मंत्रालय से रिलायंस समूह को इन विमानों के संबंध में कोई भी ठेका नहीं मिला है। अंबानी ने कहा है कि उनकी कंपनी की भूमिका केवल ऑफसेट/निर्यात दायित्व तक सीमित है। इसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)जैसे सरकारी संगठनों से लेकर 100 से अधिक की संख्या में छोटी मझोली कंपनियां शामिल होंगी। इससे भारत की डिफेंस की प्रोडक्शन क्षमता का विकास होगा। 

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