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Home » Economy » PolicyAd Spend On Facebook To Shoot Upto 600 Crore Rupees For Upcoming Lok Sabha Elections

Lok sabha Election 2019: सोशल मीडिया बना प्रचार का नया टूल, अकेले Facebook पर खर्च होंगे 600 करोड़ रुपए

फेसबुक के साथ Twitter, SMS और कॉल्स पर भी खर्च किया जाएगा मोटा पैसा

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नई दिल्ली.
चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही सभी राजनीतिक दल ज़ोर-शोर से प्रचार में लग गए हैं। एक्सपर्ट्स की मानें, तो प्रचार में खर्च होने वाली कुल राशि मे से 60-70 फीसदी सोशल मीडिया के खाते में आएगी। प्रचार के डिजिटल माध्यम पर एक हज़ार से दो हज़ार रुपए तक खर्च होने की संभावना है। इसमें सोशल मीडिया और मोबाइल (sms और कॉल्स) शामिल हैं। इस कुल खर्च में से 600 करोड़ रुपए सिर्फ फेसबुक पर खर्च हो सकते हैं। फेसबुक ने आंकड़े जारी करके बताया था कि 9 मार्च तक फेसबुक पर पार्टियों के प्रचार में 5.6 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।

 

कितना खर्च करेंगी BJP और Congress


एक्सपर्ट्स के मुताबिक दोनों शीर्ष राष्ट्रीय पार्टियां- भाजपा और कांग्रेस अपने डिजिटल ऐड कैंपेन पर दुल मिलाकर 500-550 करोड़ रुपए खर्च करेंगी। सोशल मीडिया पर प्रचार में खर्च होने वाली कुल रकम में से क्षेत्रीय पार्टियों की हिस्सेदारी 30-35 फीसदी होगी। 

 

9 मार्च तक BJP ने किया सबसे ज्यादा खर्च


फेसबुक की ओर से दिए गए पब्लिक डाटा के मुताबिक 9 मार्च 2019 तक फेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापनों और राष्ट्रीय मुद्दों पर 5.6 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसमें भाजपा और उसकी सहायक पार्टियों की हिस्सेदारी 50 फीसदी से भी ज्यादा थी। BJP के टॉप फेसबुक पेज 'भारत के मन की बात' पर 1.8 करोड़ रु, Nation with NaMo पर 91.7 लाख रुपए और My Gov India पर 42.7 लाख रुपए खर्च किए गए। वहीं कांग्रेस के प्रमुख फेसबुक पेजों में Konda Vishweshwar Reddy पेज पर 1.9 लाख रुपए, Indian Youth Congress पर 28,542 रुपए, कांग्रेस सांसद मिलिंद देवरा के पेज पर 33,000 रुपए और Congress My Voice- Orissa Manifesto पर 60,134 रुपए खर्च किए गए। 

मोबाइल एसएमएस और OBD कैंपेन पर भी होगा बड़ा खर्च


Finacial Express की खबर के मुताबिक Facebook और Twitter पर तो खर्च किया ही जाएगा, लेकिन मोबाइल एसएमएस और Outbound Dialer (OBD) कैंपेन पर भी मोटा पैसा खर्च किया जाएगा। 2014 में अरुण जेटली के लिए OBD कैंपेन पर काम चुके एक एक मीडिया प्लानर के मुताबिक OBD कैंपेन पर 100 करोड़ रुपए और एसएमएस पर 200 करोड़ रुपए खर्च होने की उम्मीद है। 

इस साल Google रह जाएगा पीछे


जब बात डिजिटल मार्केटिंग की आती है तो सबसे बड़ा हिस्सा Google का होता है, लेकिन इस साल ऐसा नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल प्लेटफॉर्म्स लोगों के दिमाग को जल्दी टारगेट करते हैं। WhatsApp सबसे प्रभावशाली माध्यम है, पर उस पर अभी पैसे देकर विज्ञापन देने का फीचर मौजूद नहीं है।

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