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DBT में 77% लोगों के काम आ रहा है आधार, 1 लाख करोड़ रु से ज्यादा खातों में हुए ट्रांसफर

अकेले डीबीटी के जरिए एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं।

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नई दिल्ली. भले ही आधार की सिक्युरिटी को लेकर कई तरह के विरोध हो रहे हैं, लेकिन डीबीटी में पेमेंट का यह प्रमुख जरिया बन चुका है। साल 2017-18 में अब तक 77 फीसदी पेमेंट आधार के जरिए हुए हैं। अकेले डीबीटी के जरिए एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। जो अभी तक का रिकॉर्ड है। इसके जरिए करीब 62 करोड़ लाभार्थियों को डीबीटी के जरिए पेमेंट किया गया है। सरकार का  दावा है कि इसके जरिए करीब 57 हजार करोड़ की सेविंग की जा चुकी है।

 

412 स्कीम के जरिए दी जा रही है DBT की सुविधा

फाइनेंस मिनिस्ट्री  के डीबीटी सेल से मिले आंकड़ों के अनुसार साल 2017-18 में 1.01 लाख करोड़ रुपए का फंड ट्रांसफर किया गया है। इसके तहत सरकार की 412 स्कीम जुड़ी हुई हैं। मिले आंकड़ों के अनुसार साल 2017-18 में जो फंड  ट्रांसफर डीबीटी के जरिए किए गए हैं, उसमें से 77 फीसदी पेमेंट आधार  के जरिए किए गए हैं। जबकि 23 फीसदी पेमेंट बिना आधार के जरिए किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार का की कोशिश है कि जल्द ही 100 फीसदी पेमेंट आधार के जरिए होने लगे हैं। अधिकारी के अनुसार आधार से लिंक पेमेंट होने से सरकार को फ्रॉड रोकने में काफी मदद मिली है। अकेले 2016-17 में सरकार को 57 हजार करोड़ की सेविंग हुई है।

 

पहल स्कीम से सबसे ज्यादा सेविंग

रिपोर्ट के अनुसार साल 2016-17 में सबसे ज्यादा सेविंग पेट्रोलियम और नेचुरल गैस द्वारा चलाई जा रही स्कीम पहल में हुई है। पहल में 29769 करोड़ रुपए की सेविंग हुई है। वहीं पीडीएस स्कीम में 14 हजार करोड़ रुपए , मनरेगा के तहत 11 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की सेविंग हुई है। जबकि बाकी सेविंग दूसरी स्कीम के जरिए हुई है। अधिकारी के अनुसार साल 2017-18 में यह आंकड़ा 65 हजार करोड़ रुपए को पार कर सकता है।

 

DBT लाभार्थियों की संख्या में 80% का इजाफा

रिपोर्ट के अनुसार,  देश में अब तक 110 करोड़ से ज्यादा लोगों के आधार बन चुके हैं। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर में जनधन स्कीम का भी बड़ा रोल रहा है। इस स्कीम के तहत करीब 38 करोड़ बैंक अकाउंट खुल चुके हैं। ऐसे में अब सरकार के लिए डीबीटी का लाभ पहुंचाना भी आसान हो गया है। इसकी वजह से पिछले साल के मुकाबले लाभार्थियों की संख्या में 80 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है। साल 2016-17 में जहां 35.7 करोड़ लाभार्थी थे वह अब बढ़कर 2017-18 में 63.24 करोड़ हो गए हैं।

 

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