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नोटबंदी को लेकर गलत साबित हुआ सरकार का दावा, 2017 में 88 लाख करदाताओं ने नहीं भरा रिटर्न

2016 के मुकाबले 10 गुना अधिक लोगों ने नहीं जमा किया इनकम टैक्स

88 lakh taxpayers didn’t file returns in year of noteban

88 lakh taxpayers didn’t file returns in year of noteban: नवंबर, 2016 में नोटबंदी करने के फैसले को लेकर सरकार हमेशा सकारात्मक रही है। सरकार दावा करती रही है वित्त वर्ष 2016-17 में 1.06 करोड़ नए करदाताओं को जोड़ा। सरकार के मुताबिक यह आंकड़ा 2015-16 वित्त वर्ष से 25 फीसदी अधिक है। लेकिन अब आंकड़े सामने आए हैं कि 2016-17 में रिटर्न फाइल न करने वालों की संख्या 2015-16 के मुकाबले 8.56 लाख से 10 गुना बढ़कर 88.04 लाख हो गई।

नई दिल्ली.

नवंबर, 2016 में नोटबंदी करने के फैसले को लेकर सरकार हमेशा सकारात्मक रही है। सरकार दावा करती रही है वित्त वर्ष 2016-17 में 1.06 करोड़ नए करदाताओं को जोड़ा। सरकार के मुताबिक यह आंकड़ा 2015-16 वित्त वर्ष से 25 फीसदी अधिक है। लेकिन अब आंकड़े सामने आए हैं कि 2016-17 में रिटर्न फाइल न करने वालों की संख्या 2015-16 के मुकाबले 8.56 लाख से 10 गुना बढ़कर 88.04 लाख हो गई।

 

नोटबंदी से बढ़ गए स्टॉप फाइलर्स

The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक स्टॉप फाइलर्स (stop filers) की संख्या में यह इजाफा तकरीबन दो दशक में सबसे ज्यादा है। स्टॉप फाइलर्स की संख्या 2013 से लगातार घट रही थी। 2013 में 37.54 लाख स्टॉप फाइलर्स थे, 2014 में 27.02 लाख रह गए, 2015 में 16.32 लाख स्टॉप फाइलर्स थे और 2016 में सिर्फ 8.56 स्टॉप फाइलर्स थे।

 

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कौन होते हैं स्टॉप फाइलर्स

स्टॉप फाइलर्स वे लोग होते हैं जो पहले रिटर्न फाइल करते रहे हैं, लेकिन मौजूदा वर्ष में नहीं कर रहे हैं, हालांकि वे रिटर्न भरने के लिए बाध्य हैं। इसमें उन टैक्सपेयर्स को शामिल नहीं किया जाता है जो गुजर गए हैं या जिनका पैन कार्ड कैंसल हो गया है।

 

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क्यों हुआ यह इजाफा

कर अधिकारियों की मानें तो संभावना है कि नोटबंदी के बाद नौकरियां जाने से और लाेगों की आय में गिरावट होने से स्टॉप फाइलर्स की संख्या में हुआ होगा। बाजार में मौजूद कुल नकदी में से 500 और 1000 रुपए के नोट की संख्या 86 फीसदी थी। ऐसे में लाखों लोग प्रभावित हुए थे। आर्थिक गतिविधि में गिरावट का सुझाव देते हुए, एक अन्य कर अधिकारी ने कहा कि 2016-17 में कर डाटा 33 लाख से अधिक टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) कटौतीकर्ताओं की तेज गिरावट दिखाता है, जिन्होंने अतीत में रिटर्न दाखिल नहीं किया था। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि जिन व्यक्तियों ने पिछले वर्ष में कुछ लेन-देन किए थे, उन्होंने इस वर्ष के दौरान ऐसा नहीं किया था।

 

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बदली गई थी परिभाषा

वहीं अप्रैल 2016 में CBDT ने वित्तीय वर्ष के लिए TDS / TCS (स्रोत पर एकत्रित कर) के माध्यम से कर का भुगतान करने वाले लोगों को शामिल करने के लिए करदाता की परिभाषा को बदल दिया, भले ही उन्होंने रिटर्न दाखिल न किया हो। कर आधार की परिभाषा भी ऐसे व्यक्तियों और अन्य लोगों को शामिल करने के लिए दी गई थी, जिनके मामले में TDS और TCS का भुगतान किया गया है, लेकिन विचाराधीन पिछले वर्ष के तीन वित्तीय वर्षों में से किसी में भी रिटर्न दाखिल नहीं किया गया है।

 

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परिभाषा बदलने से बढ़े टैक्सपेयर्स

रिकॉर्ड बताते हैं कि 2016 में नई परिभाषा को अपनाने के बाद, कर विभाग ने लगभग 1.13 करोड़ टीडीएस घटाए। 4.14 करोड़ के मूल करदाताओं का आधार बढ़ा और वर्ष 2013-14 में 5.27 करोड़ तक पहुंचा। वहीं विभाग ने वर्ष 2014-15 और 2016-17 के बीच करदाताओं के लगभग 39.34 लाख टीडीएस काटे।

 

 

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