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7.7 लाख वायरलाइन इंटरनेट कनेक्शन के बंद होने का खतरा, 11,000 करोड़ रुपए नहीं चुकाने पर इस कंपनी का लाइसेंस हो जाएगा रद्द

बकाए के भुगतान के लिए कंपनी के पास बचा है सिर्फ दो दिन का समय

7.7 million wireline internet connection will be canceled

वित्तीय संकट से जूझ रही सरकारी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी महानगर टेलीफोन निगम (एमटीएनएल) के सर्विस लाइसेंस की अवधि 6 अप्रैल को समाप्त हो रही है। इससे एमटीएनएल के सब्सक्राइबर्स के कनेक्शन बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि दूरसंचार मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक 6 अप्रैल के बाद भी  कंपनी का कामकाज जारी रहेगा।

नई दिल्ली। वित्तीय संकट से जूझ रही सरकारी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी महानगर टेलीफोन निगम (एमटीएनएल) के सर्विस लाइसेंस की अवधि 6 अप्रैल को समाप्त हो रही है। इससे एमटीएनएल के सब्सक्राइबर्स के कनेक्शन बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि दूरसंचार मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक 6 अप्रैल के बाद भी  कंपनी का कामकाज जारी रहेगा। सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय ने कंपनी को भरोसा दिलाया है कि वह पहले की तरह काम जारी रख सकती है। कंपनी को अपने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए करीब 11,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है और इसमें छूट के लिए उसने दूरसंचार विभाग को कई पत्र लिखे हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के आंकड़ों के मुताबिक एमटीएनएन के पास 7.7 लाख वायरलाइन इंटरनेट ग्राहक हैं।

 एमटीएनएल का 20 साल के लाइसेंस की अवधि 6 अप्रैल को खत्म हो रही है।

एमटीएनएल का 20 साल के लाइसेंस की अवधि 6 अप्रैल को खत्म हो रही है। हालांकि कंपनी का कहना है कि लाइसेंस की अवधि की गणना 11 जनवरी, 2001 से की जानी चाहिए जब उसने दिल्ली-एनसीआर में पूरी तरह काम करना शुरू किया था। कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, 'अप्रैल 1999 से जनवरी 2001 तक गाजियाबाद, फरीदाबाद , गुरुग्राम और नोएडा लाइसेंस समझौते का हिस्सा नहीं थे।' दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सरकार एमटीएनएल का कामकाज चलाने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास करेगी और कंपनी के लाइसेंस को बचाने की योजना पर काम चल रहा है। हालांकि उन्होंने इस बारे में और जानकारी देने से इनकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक विभाग ने कंपनी को इस आश्वासन के साथ अपना काम पहले की तरह जारी रखने को कहा है कि उसकी मांगों पर विचार किया जा रहा है।

MTNL पर 20,000 करोड़ रुपये का कर्ज है

एमटीएनएल पर अभी 20,000 करोड़ रुपये का कर्ज है और उसने इसे मूलधन और ब्याज के भुगतान की सॉवरिन गारंटी के साथ ऋण में बदलने की मांग की है। कंपनी कर्ज में डूबी हुई है और केंद्र सरकार से राहत पैकेज का इंतजार कर रही है। दिसंबर 2018 में खत्म तिमाही में कंपनी का एकल नुकसान 832.26 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी 3जी स्पेक्ट्रम वापस करना चाहती है जिससे उसे 3,500 करोड़ रुपये मिलेंगे। इस रकम का इस्तेमाल वह कंपनी को चलाने और लैंडलाइन कारोबार में करना चाहती है जो अच्छा चल रहा है। 

 

 

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